पाकिस्तान को दिया कश्मीरियों ने सबूत

१९४८ में पाकिस्तानी आर्मी ने कवालियों के भेष में कश्मीर पर अचानक आक्रमण कर दिया था । असमंजस मे पड़ा कश्मीर का महराजा ने भारत से मदद मांगी । भारत की फौज ने पाकिस्तानी फौज को खदेड़ बहार किया । लेकिन तब भी पाकिस्तान ने दुनिया से सबूत माँगा था और फौजी करवाई से साफ़ इंकार कर गया था । कारगिल आक्रमण के दौरान पाकिस्तानी फौज ने आतंकवादियों का साथ लेकर एक फ़िर वही रणनीति अपनाई । भारत ने कहा यह क्या कर रहे हो ? पाकिस्तान ने एक बार फ़िर सबूत माँगा । संसद हमले के दौरान पाकिस्तान ने फ़िर भारत से सबूत पेश करने को कहा ....
मुंबई हमले को अंजाम देने की साजिश का चिटठा भारत ने पुरी दुनिया के सामने रख दिया है लेकिन पाकिस्तान सबूत की पुरानी जीद पर कायम है । भारत -पाकिस्तान के बीच अबतक तीन जंग हो चुके हैं और हर बार पाकिस्तान ने मुहं की खायी है लेकिन हर बार भारत को खाली हाथ ही लौटना पड़ा है । कह सकते हैं कि भारतीय सेना के तमाम कामयाबी, राजीनीतिक फैसले के कारण बौनी साबित होती रही है । लेकिन पहली बार कश्मीरियों ने जो पुख्ता सबूत पाकिस्तान को दिया है वह पुरी दुनिया के लिए एक आइना हो सकता है ।
कश्मीर बनेगा पाकिस्तान का नारा लगाने वाले लोगों ने पोलिंग बायकाट का नारा दिया ।मजहब की बुनियाद पर पाकिस्तान को अपना वतन मानने वाले अलगाववादियों ने मौजूदा असेम्बली चुनाव को मिनी रायसुमारी ही मान लिया था । उन्हें यह पक्का यकीन था कि अमरनाथ श्रायण बोर्ड के मसले पर उठा सियासी विवाद ने पाकिस्तान और उनकी जमातों को बैठे बिठाये उन्हें कश्मीर का जनसमर्थन उनके हाथ में दे दिया है । इसी अनदेसे के कारण कश्मीर के कोई भी राजनितिक दल चुनाव के लिए तैयार नही थे । इलेक्शन कमीशन के फैसले के कारण उन्हें चुनाव में उतरना पड़ा । इस अंदेशे के शिकार ख़ुद भारत सरकार भी थी । लेकिन कश्मीर के लोगों ने यह दिखाया सियासत में उनकी परिपक्वता लीडरों से कही ज्यादा है । भारी सर्दी और बर्फ़बारी के बीच ६५ से ७० फीसद मतदान भारत के संसदीय इतिहास में एक रिकॉर्ड है।

बायकाट काल देने वाली जमातों की अगुवाई करने वाले सएद अली शाह गिलानी मानते है की कश्मीर में बन्दूक की उपस्थिति गौण होने के कारण यह भौंचक करदेने वाले आवामी फैसले सामने आए है । यानि पाकिस्तान के बन्दूक को सेना ने ठिकाना लगा के रखा तो अवाम ने अपना फ़ैसला सुना दिया । हुर्रियत के लीडर एक दूसरे पर आरोप लगा रहे है । लेकिन ईमानदारी से लोगों के इस फैसले को स्वीकार करने के लिए कोई तैयार नही है । कह सकते है कि अगर इमानदारी से हमारी हुकूमत भारत के समर्थन में कश्मीरियों की उठी आवाज को दुनिया के सामने रखती है तो नही कश्मीर में आल्गाव्वादियों का अस्तित्वा बचेगा नही पाकिस्तान दुनिया में कश्मीर पर पुराना राग दुहराने में कामयाब हो पायेगा । यह पहलीबार नही है की कश्मीरियों ने भारत के समर्थन में अपना मत दिया हो लेकिन दिल्ली में बैठे हुकुमरानों ने हरबार इसका बेजा इस्तेमाल किया है । कभी दिल्ली की सरकार शेख अब्दुल्लाह के लिए तो कभी फारूक अब्दुल्लाह के लिए तो कभी मुफ्ती के लिए अवाम के फैसले को नज़रअंदाज करती रही है । हिजबुल मुजाहिद्दीन के चीफ सलाहुद्दीन को फारूक अब्दुल्लाह ने असेम्बली नही पहुँचने दिया तो हार कर वह पाकिस्तान चला गया । ऐसे कई लोग है जिन्हें अलगावाद में जान बुझ कर धकेला गया । लेकिन २००२ के चुनाव में चुनाव आयोग ने भरोसा दिया कि आवामी फैसले का पुरा सम्मान होगा और वह हुआ भी । यानि बिना लडे ही यह जंग भारत ने जीत ली है । मोजुदा दौर में भारत पाकिस्तान के बीच एकबार फ़िर जंग की सूरत बन रही है । भारत -पाकिस्तान को तथाकथित अटोमी पॉवर होने के नाम पर फ़िर दुनिया में जंग नहीं होने देने के लिए कोशिशे होगी । जाहिर है पाकिस्तान फ़िर एक बार मसले कश्मीर को सामने लायेगा । पाकिस्तान फ़िर यह साबित करेगा कि आतंकवाद की वजह सिर्फ़ कश्मीर है । कश्मीर का फ़ैसला करो आतंकवाद सदा सदा के लिए ख़तम हो जाएगा । एक बार फ़िर भारत बगले झांकते नजर आएगा । हमारी सरकार ने पाकिस्तान पर दवाब बनाया है आतंकवादियों को सौपो , उसने आतंकवाद को ख़तम करने की पहल नहीं की है । यानि सरकार को वो आतंकवादी चाहिए जिसे पिछली सरकार ने सम्मान के साथ छोड़ आई थी । और यह बात पाकिस्तान भी बेहतर समझ रहा है की भारत में जंग के गीत आगामी चुनाव के मद्दे नजर ही गए जा रहे है । भारत का दावा है की अमेरिका और दुसरे पश्चमी मुल्क सरकार के साथ है । अरब देश भी भारत की चिंता को समझ सकता है । पाकिस्तान आज बदहाली के कगार पर है । आर्थिक मंदी की मार के कारण पाकिस्तान एक हफ्ते भी अपनी अर्थव्यवस्था को संभाल नहीं सकता । ऐसे हालत में क्या पाकिस्तान से जंग लड़ने की जरूत है । जो सबूत कश्मीरियों ने दिया है क्या वही काबिलियत का सबूत भारत सरकार भी दे सकती है ? भारत के अवाम को इस्का इंतज़ार है ।

टिप्पणियाँ

vaishali ने कहा…
जम्मू एंड कश्मीर में जिस तरह से हुर्रियत के मुह पर कश्मीरियों ने जिस तरह से तमाचा जरा है उसकी गूंज अब हुर्रियत के लीडर खास कर स्येद अली शाह गिलानी और मीरविज उमर फारूक को लंबे समय तक सुनाई देता रहेगा। ये चुनाव पाकिस्तान को भी एक मेसेज है की यहाँ बुल्लेट नही बैल्लेट का बोलबाला है ।
@ Gyan Dutt Pandey
इस के लिए तो उसे धन्यवाद देना चाहिए जिस ने विजेट बनाया। कम से कम उस ने मूल्यांकन तो किया। आप को भी धन्यवाद मैं तो इसे साढ़े सत्रह लाख ही समझ रहा था।

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