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September 21, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बाटला हाउस और सेकुलरिस्म

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दरबाजे पर टक टक की आवाज होती है... अन्दर से आवाज आती है ... कौन है ? जी मैं वोदाफोन से आया हूँ। इंट्रो से लगा कि पुण्य प्रसून बाजपयी ने मेरठ वाले वेद प्रकाश शर्मा के किसी उपन्यास के कुछ पन्ने चुरा कर कहानी में ट्विस्ट देने की कोशिश की है । प्रसून जी का माने तो ये पुरा एनकाउंटर एक फ्रौड था । ठीक उसी तरह जब १९ तारीक को जामिया नगर के बतला हाउस में देल्ही पुलिस एल १८ पर दस्तक देने पहुंची तो आस पास के लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि पुलिस किसी मुर्गे की तलाश में है । अचानक गोलियों कि आवाज आने लगी तो लोगों को लगा कि कुछ बेक़सूर लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस ज्यादती कर रही है । लेकिन जब लोगों ने इंसपेक्टर मोहन चंद्र शर्मा को सहारा देते हुए दो पुलिस वाले को बाटला हाउस से निकलते हुए देखा तो कुछ लोग अपना अनुभव इस तरह बाँट रहे थे कि पदक पाने की लालच पुलिस कभी कभी अपने पावं पर भी गोली मार लेती है । और मोहन चंद शर्मा ने कुछ ऐसा ही किया होगा । शाम तक जामिया नगर के आस पास कोई यह मानने को तैयार नहीं था कि यह आतंकवादियों के ख़िलाफ़ पुलिस कि करवाई थी । लोग इसे फेक एनकाउंटर मान रहे थे । शहीद शर्मा जी कि मौत से क…