सावधान : आजमगढ़ एक्सप्रेस दिल्ली पहुँच चुकी है ....


लोक सभा चुनाव के एन मौके पर आजमगढ़ एक्सप्रेस ने दिल्ली पहुँच कर आने वाले चुनाव की तस्वीर साफ़ कर दी है । बाटला हाउस मुठभेड़ के मामले को उलेमा काउंसिल ने मुद्दा बनाकर तमाम सेकुलर सियासी पार्टियों को यह भी संदेश दे दिया है कि muslim वोट पाने के लिए एकबार फ़िर राजनेताओं को मौलानाओं के शरण में ही जाना होगा । आजमगढ़ से चली इस स्पेशल ट्रेन पर उलेमा काउंसिल ने १३ लाख रूपये खर्च करके और हजारों नौजवानों को अपने साथ में लेकर अपनी राजनितिक हैसित भी बता दिया है । याद हो कि कुछ महीने पहले जामा मस्जिद के इमाम बुखारी ने युनितेड डेमोक्रेटिक फ्रंट बनाकर सेकुलर सियासत में अपनी दखल बढ़ाने की कोशिश की थी । लेकिन अवाम ने उनकी हैसियत बता दी थी । एकबार यही कोशिश उलेमा काउंसिल की तरफ़ से हो रही है । लेकिन अफ्शोशनाक पहलु ये है कि उलेमा काउंसिल ने मुद्दा बाटला हाउस एनकाउंटर का बनाया है । सबसे बड़ी सेकुलर पार्टी का दाबा करने वाली कांग्रेस के सामने मुश्किल यह है कि एक ओर सरकार ने बाटला हाउस एनकाउंटर के हीरो मोहनचंद शर्मा को मरणोपरांत अशोक चक्र उपाधि से नवाजा है ,लेकिन उसी सरकार के आला मंत्री बाटला हाउस मामले को लेकर जाँच की मांग करते हैं । यानि सरकार और पार्टी ठीक उसी तरह अंतर्द्वंद में फ़सी है जिस तरह राजीव गाँधी शाहबानो मामले से उबरने के लिए राममंदिर खुल्बया था । और हुआ यही, न खुदा मिला न बिसाले सनम ।
पुलिस की जांच की कसौटी अदालत है । एक दो नही दर्जनों बार पुलिस की थेओरी अदालत में झूठ का पुलिंदा साबित हो चुकी है ,लेकिन तमाम व्यवस्था के ऊपर अपनी व्यवस्था लादने की कोशिश हो रही है । यही कोशिश केन्द्र सरकार के के बरिष्ठ मंत्री अंतुले साहब, हेमंत करकरे की मौत पर सवाल उठा चुके है , लेकिन सरकार की ओर से उन्हें भी अशोक चक्र सम्मान से नवाजा जा चुका है । यानि वोट की सियासत ने तमाम संबैधानिक मर्यादों को बौना साबित कर दिया है ।
इस सियासत की वजह हमें समझने की जरूरत है । मुल्क के ९ वोटरों में एक वोटर muslim तबके से है । जहाँ तक muslim वोट बैंक का सवाल है १३ राज्यों के ८२ लोक सभा क्षेत्रों में muslim वोटरों की तादाद २२ फीसद से ज्यादा है जबकि ११५ लोकसभा क्षेत्रों में इनकी तादाद १७ फीसद है । उत्तर प्रदेश के ३३ , पशिम बंगाल के १८ ,बिहार के ९ ,केरला के ८ और जम्मू कश्मीर के तीन सीटों पर जीत और हार muslim वोटर ही तय करते है । यह भी सच है कि इस तादाद के बावजूद muslim सांसदों की तादाद कम रही है । यानि पहलीबार १९५२ के चुनाव मे ३६ muslim एम् पी चुनाव जीत कर आए थे उसके बाद उनकी संख्या में लगातार गिराबत ही दर्ज की गई है । या तो अवाम ने सिर्फ़ मुसलमान होना ,या फ़िर muslim पार्टी होना स्वीकार नहीं किया या फ़िर उन्होंने उलेमाओं के फतवे को तरजीह नही दी , लेकिन हमें यह नही भूलना चाहिए की आरिफ मोहम्मद खान जैसे मुलिम सेकुलर लीडर चुनाव जितने में कामयाब नही हो पा रहे है । पिछले २० वर्षों से मुलायम सिंह यादव और लालू यादव इसी muslim वोट बैंक को साथ लेकर सत्ता को अपने तरीके से परिभाषित कर रहे है । कांग्रेस के कई लीडर बाबरी मस्जिद के लिए सर्ब्जनिक तौर पर माफ़ी भी मांग चुके है । यहाँ तक कि कांग्रेस ने अपने पूर्ब प्रधानमंत्री नारसिंह राव को टिकट देने से मना कर के muslim वोटरों को खुश करने की कोशिश की थी, लेकिन कामयाब नही हो सकी । बीजेपी का भूत और खौफ तमाम सेकुलर पार्टियों के लिए अबतक रामबाण साबित हुआ है । पिछले २० साल में लालू यादव ने बिहारी मुसलमानों के लिए क्या किया ? उनके पास माकूल जवाब होता है आडवानी को गिरफ्तार किया । ये अलग बात है कि बाबरी मस्जिद के ढहाने का श्रेय लेने वाले कल्याण सिंह आज मुलायम सिंह के खास बन गए हैं । इन वर्षों में सरयू की धारा भी बदल गई है लेकिन बीजेपी के लिए राम मन्दिर मुद्दा कायम है उसकी सूची में अब राम सेतु भी जुड़ गई है । अगर राम आदर्श है तो वो पुरे हिंदुस्तान के है सिर्फ़ बीजेपी के नहीं । राम का अस्तित्वा तबसे है जब दुनिया में शायद ही किसी दुसरे पंथ का उदय हुआ था । बीजेपी को भले ही अपने अस्तित्वा के लिए खतरा हो लेकिन इस मुल्क में राम के अस्तित्वा पर कभी खतरा नहीं मंडराएगा । मुल्क में धर्म के नाम पर कठमुलाओं के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए बीजेपी की भूमिका बदलने की जरूरत है ।
आतंकवाद के दलदल में फसा यह मुल्क बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा है लेकिन वोट बैंक की सियासत इसे बाहर निकलने नही दे रही । आज पुरी दुनिया ने हमें एक शोफ्ट नेशन का दर्जा दिया है । अमेरिका ने माना है की लश्कर के हमले से वेस्ट अब तक इसलिए बचा है क्योंकि लश्कर के सामने अपना करतब दिखाने के लिए भारत चुप चुप खड़ा है । पिछले २ वर्षों में लश्कर का इंडियन मुजाहिद्दीन ग्रुप ने दर्जनों आतंकवादी हमलों को अंजाम देकर वाकायदा इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी । मकसद था दुनिया को यह बताना की इन हमलों में पाकिस्तान का हाथ नही था बल्कि भारत की एक चरमपंथी संगठन ये हमले करा रही है । लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इस संगठन पर अब तक प्रतिबन्ध नही लगे है । सिम्मी पर अपना रूख तय करने में केन्द्र सरकार को वर्षों लगे हैं । आतंकवाद इस देश की समस्या है इसकी चपेट में हिंदू भी है तो muslim भी ,लेकिन जब कभी भी आतंकवाद पर ठोस करवाई की बात होती है तो , सामने में muslim समाज को रखा जाता है । यह muslim समाज के लिए अपमान की बात है। मौलानाओं के हर फतवे आज muslim समाज में अस्वीकृत हो रहा है। muslim समाज की धारा देश की मुख्यधारा में मिलकर मुल्क के प्रति अपनी भूमिका निभा रही है , लेकिन इस मुल्क की तथाकतित सेकुलर सियासत उन्हें आजमगढ़ एक्सप्रेस में जबरन धकेल रही है ।

टिप्पणियाँ

निशाचर ने कहा…
muslim समाज की धारा देश की मुख्यधारा में मिलकर मुल्क के प्रति अपनी भूमिका निभा रही है , लेकिन इस मुल्क की तथाकतित सेकुलर सियासत उन्हें आजमगढ़ एक्सप्रेस में जबरन धकेल रही है ।

बिलकुल सही कहा आपने. सेक्लुरिस्म के नाम पर देश में जो राजनीति हो रही है उसे जनता को नकारना ही होगा और इन लालू-मुलायम और सोनिया के चमचों को उनकी औकात बतानी ही होगी..........

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