संदेश

April 12, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

vinod mishra ka blog: प्यार करो या नफरत मुद्दा आडवानी ही है

प्यार करो या नफरत मुद्दा आडवानी ही है

चित्र
क्या यह चुनाव लाल कृष्ण आडवानी के लिए जनमत संग्रह है ?हो सकता है कि आपका जवाब ना में भी हो । लेकिन चुनाव प्रचार और नेताओं के बयानों का लेखा जोखा करे तो सबसे ज्यादा बयान आडवानी जी को लेकर ही दिया गया है । आम तौर चुप रहने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब भी कभी बयान दिया है आडवानी पहला और अन्तिम मुदा रहा है । तो यह मान लें कि बगैर किसी मुद्दे के इस अनोखे चुनाव में मुद्दा सिर्फ़ अडवानी हैं । पहले चरण का चुनाव संपन्न हुआ । नक्सल के रेड कोरिडोर में शांतिपूर्ण चुनाव के दावे को नक्सालियों ने बेमानी साबित कर दिया । चुनाव के दौरान सुरक्षा में लगे २९ जवान मारे गए । मुंबई हमले में मारे गए जवानों से दो गुना ज्यादा । लेकिन न तो नक्सल हिंसा मुद्दा बना न ही देश में जड़ जमा चुका आतंकवाद, यानि मुद्दा आडवानी ही है । बाबरी मस्जिद गिराने का तोहमत आडवानी पर लगा कर प्रधान मंत्री ने चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी । आज भी चुनाव प्रचार में सोनिया हो या राहुल , लालू हों या रामविलास मुद्दा सिर्फ़ आडवानी है । १९८४ के लोक सभा के चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्वा में बीजेपी चुनावी मैदान में उतरी थी और …