राष्ट्रीय दामाद की शान में गुस्ताखी


ये अरविन्द केजरीवाल भी कमाल की चीज है। राजनीतिक पार्टी बनाने का एलान कर दिया लेकिन नाम अभी तय नहीं कर पाए है .खास बात यह है कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन वाले लोग यह भी तय नहीं कर पाए है कि उनका दर्शन दक्षिण पंथी है या बाम पंथी या फिर कांग्रेसी मध्यममार्गी .उनकी पार्टी चार दिन पहले बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के बारे में बड़ा खुलासा करती है कि 70 हजार करोड़ रूपये के सिचाई घोटाले में बीजेपी का समर्थन शरद पवार की पार्टी और उनके भतीजे को हासिल है .अचानक कोंग्रेस अध्यक्षा  सोनिया गाँधी के दामाद रोबेर्ट वाड्रा की बत्ती गूम करने के लिए बड़ा धमाका कर देती है .500 करोड़ रूपये का घोटाला की आवाज़ अब रेज्की या छुट्टे पैसे की खनक जैसे लगती है लेकिन यह देश के सबसे शक्तिशाली परिवार के दामाद या यूँ कहे कि राष्ट्रीय दामाद के खिलाफ मुहं खोलने का दुसाहस था .राबर्ट वाड्रा डी एल ऍफ़ से 65 करोड़ रुपया उधार लेते है और 500 करोड़ रुपया एक झटके में कमा लेते है यह आरोप गले से नीचे नहीं उतरता  है .भाई इस कांग्रेस जी के राज में 2जी से लेकर कोलगेट तक अपने छुटभैये नेताओं ने भी लाखों करोडो रूपये का घोटाला बिना एक पैसा लगाये करके दिखाया है .हवा और तरंगे बेच कर अपने नेताओं और उनके चमचों ने  करोडो -अरबों रूपये कमाए है। ऐसी हालत में सरकारी दामाद को 65 करोड़ रुपया उधार लेना पड़े और महज 500 करोड़ रूपये के लिए उनके खिलाफ जाँच हो यह देश के लिए तौहीन है .

 राजनीति करनी है तो कुछ न कुछ खुलासा करते रहना जरूरी है मिडिया की कोख से पैदा लिया इंडिया अगेंस्ट करप्शन को बता है राजनीती में बने रहने के लिए टीवी और अख़बारों में  धमाके जरूरी है ..14 मार्च 2011 को इकोनोमिक टाइम्स ने रोबेर्ट वाड्रा के रियल स्टेट कारोबार का सनसनीखेज खुलासा किया था .लेकिन बीजेपी ने इस खुलासे को कोई तुल नहीं दिया .खास बात यह थी किसी चैनेल और अख़बार ने इस खबर को आगे बढाने की जुर्रत नहीं कर सका .सवाल मीडिया मनेजमेंट का नहीं है सवाल देश के सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी की निष्ठां का है .भ्रष्टाचार पर एक के बाद एक खुलासे ने देश के आम जन को जरूर आंदोलित किया है लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी  टीवी स्टूडियो से बाहर कभी अपना चमत्कार नहीं दिखा सकी .2जी से लेकर कोलगेट के तमाम घोटाले में कोर्ट से लेकर सड़क तक अभियान छेड़ कर केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने आम जन में सत्ता से संघर्ष करने का जज्बा पैदा किया था .लेकिन इस पुरे प्रकरण में बीजेपी टीवी स्टूडियो ओर संसद में तेरी कमीज से  मेरी कमीज सफ़ेद  इसी बहस में उलझी रही .2जी प्रकरण पर छिड़ी बहस के बीच कांग्रेसी मैनेजर बीजेपी को  येदुरप्पा की याद दिलाते रहे ,कोलगेट घोटाला में कांग्रेस की तरकस में अजय संचेती सहित कई पुराने छुटभैये नेताओं का नाम थे .महाराष्ट्र में 70 हजार सिचाई घोटाला का पर्दाफास हुआ तो कोंग्रेसी मनेजरों ने अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ हल्ला बोल दिया .कुछ इस तरह मनो 70 हजार करोड़ रूपये के घोटाले के लिए अजित पवार से ज्यादा गडकरी जिम्मेदार है जिन्होंने अजय संचेती की एक कंपनी के लिए पवन वंसल को चिठ्ठी लिखी थी .ये निष्ठां का सवाल है यह जिम्मेदारी का सवाल है बीजेपी अपनी जिम्मेदारी को भूल गयी थी यही वजह है लाखों करोड़ों रूपये  के घोटाले का पर्दाफास होने के वाबजूद कांग्रेस पुरे दबंगई अंदाज में विपक्ष पर हावी है वरिष्ठ पत्रकार .अरुण शौरी कहते है "मुझे बताये किसी घोटाले को पर्दाफास करने में बीजेपी ने क्या योगदान दिया है .किसी एक नेता का नाम बताये जिन्होंने अपने अथक प्रयास से सरकार के खिलाफ सबूत जुटाए हों .पिछले सात साल से देश का कोयला खदान कुछ पूंजीपतियों के हाथों लूटता रहा लेकिन बीजेपी की तरफ से कोई विरोध नहीं सुना गया . भला हो बीजेपी के सांसद हंसराज अहीर का जिन्होंने अपने चार साल के निरंतर प्रयास से कोल घोटाले पर तथ्य जुटाकर सी वी सी को जाँच के लिए मजबूर किया है "

आज कोंग्रेस अरविन्द केजरीवाल को बीजेपी की बी टीम बता रही  है और बीजेपी वाड्रा को लेकर कांग्रेस की हो रही फजीहत में अपनी कामयाबी मान रही हो लेकिन कल वही केजरीवाल बीजेपी के खिलाफ कोई बड़ा खुलासा करके कांग्रेस को बड़ा मौका देने वाले  है .लेकिन कांग्रेस के हमले के काउंटर में बीजेपी यह भी नहीं कह सकेगी कि यह कांग्रेस की साजिश है .सोनिया गांधी के दामाद रोबेर्ट वाड्रा को लेकर आज भी बीजेपी संतुलित प्रतिक्रिया दे रही है यह कांग्रेस आलाकमान का जाती मामला है सो  बीजेपी वाड्रा पर सवाल पूछने से बचेगी .लेकिन यह देश अपने प्रतिपक्षी पार्टी से यह बात जरूर जानना चाहेगी की सोनिया गाँधी को विदेशी बताने वाले लोग उनके दामाद को राष्ट्रीय दामाद का दर्जा कैसे दे दिया .देश के 31 वी वी आई पी की सूची में रोबेर्ट वाड्रा भी शामिल है .उन्हें कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा प्राप्त है .देश के किसी भी एअरपोर्ट पर वे बे रोकटोक आ जा सकते है .लेकिन उनकी कोई संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं है .इतने वर्षो में वाड्रा के जायज और नाजायज मिल्ली सत्ता को लेकर अगर बीजेपी ने कभी सवाल नहीं उठाया है तो आज उनके घोटाले पर प्रतिक्रिया देने का कोई हक बीजेपी को नहीं बनता है .वीकीलिक्स के एक खुलासे में साबिक कांग्रेसी मंत्री कैप्टेन सतीश शर्मा ने कहा था हमारे कई मंत्री आज हवाई जहाज गिफ्ट देने की हैसियत में है .रोबेर्ट वाड्रा कांग्रेस पार्टी और सरकार में मंत्रियों से ऊँची हस्ती रखते है ..अरविन्द केजरीवाल की हरकत  राष्ट्रीय दामाद की  शान में गुस्ताखी  मानी जायेगी .


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

क्या कश्मीर भारत के हाथ से फिसल रहा है ?

कश्मीर मसला है.... या बकैती ?

हिंदू आतंकवाद, इस्लामिक आतंकवाद और देश की सियासत