मोदी को हराने के लिए भौकने से काम नहीं चलेगा ....

दिल्ली के मुख्य्मंत्री अरविन्द केजरीवाल को प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षणिक योग्यता की जानकारी चाहिए ,क्यों चाहिए इसका  आर टी आई में खुलासा नहीं है ,लेकिन CIC ने  तुरंत जानकारी देने के लिए कहा है। कांग्रेस के नेताओं के लिए यह बड़ा मुद्दा है कि देश को यह जानना जरूरी है कि मोदी इंदिरा जी से ज्यादा पढ़े है या राहुल से कम। इस देश में आजतक किसी मंत्री और प्रधानमंत्री की योगयता के लिए सवाल नहीं पूछे गए ,,बजह ! शैक्षणिक योगयता इनके लिए अपेक्षित नहीं है। वैसे प्रधानमंत्री मोदी एम ए  प्रथमश्रेणी से उत्तीर्ण है ऐसा गुजरात यूनिवर्सिटी का दावा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा हालत में देश जिन समस्यायों से गुजर रहा है ,सूखे की चपेट में ७ राज्य के ११ करोड़ से ज्यादा लोग पानी के लिए तरस रहे हैं.. प्रति दिन ४ किसान आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या कर रहे है ,मंदी के कारण बेरोजगारों को नौकरी नहीं मिल रही है।  देश के प्रधानमंत्री को सवाल पूछने के बजाय हमारे सांसद अपने आका को खुश करने के लिए बे सिरपैर के तर्क गढ़ रहे है।  सियासी बहस प्रधानमंत्री की योगयता को लेकर  हो रही है। 

संविधान सभा में जनप्रतिनिधियों की योगयता पर जब बहस चलरही थी तो कई गणमान्य सदस्यों का तर्क था कि एम एल ए और एम पी की योगयता स्नातक और नहीं तो मैट्रिक जरूर होनी चाहिए। .यह बात गांधी जी तक पहुंची उन्होंने इसे देश के साथ इसे बड़ा मजाक माना। गांधी जी का तर्क था भारत का किसान आज भी मिटटी को पैर से दबाकर मौसम की भविष्यवाणी करता है ,उस देश में उनके अनुभव को किसी के योगयता से कमतर नहीं आँका जा सकता और वही हुआ जो गांधी जी चाहते थे। .यानि देश चलाने के लिए अनुभव को तरजीह मिली । अमेरिकी कांग्रेस के स्पीकर अगर पी एम मोदी को अपने सदन को सम्बोधित करने के लिए निमंत्रण दिया है तो मन जायेगा उन्होंने मोदी के अनुभव को तरजीह दिया उससे वे कुछ सिखना चाहते हैं।  

यह बात केजरीवाल जी को समझाना जरूरी है कि करोडो रूपये खर्च करके दिल्ली में ओड -इवन इसलिए चर्चा में है क्योंकि दिल्ली को हरियाणा और उत्तर प्रदेश अपने हिस्से का पानी पिला रहा है ,जिस दिन दिल्ली के लोगों को  लातूर जैसी ,बुंदेलखंड जैसी समस्या से दो चार होना पड़े उस दिन न तो केजरीवाल जी किसी विज्ञापन में नज़र आएंगे न ही रेडियो टीवी पर ज्ञान देते नज़र आएंगे। नेता अपनी योगयता से नहीं ,अपने अनुभव से भौकने और सियासी सवाल रखने में फर्क करता है। .यह अनुभवहीनता ही है की कोई अपनी गली में भौक रहा है तो कोई पालतू बने रहने के लिए भौके जा  रहा है।मोदी को हराने के लिए भौकने से काम नहीं चलेगा बल्कि सियासी सवाल पूछने होंगे। लेकिन ऐसी स्थिति दूर दूर तक बनती नज़र नहीं आ रही है। ...

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

क्या कश्मीर भारत के हाथ से फिसल रहा है ?

कश्मीर मसला है.... या बकैती ?

हिंदू आतंकवाद, इस्लामिक आतंकवाद और देश की सियासत