कश्मीर में जम्हूरियत जिंदाबाद !

जम्हूरियत जिंदाबाद ! फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ज़िंदाबाद के नारों के बीच फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने  श्रीनगर का एम पी चुनाव जीत लिया है। लेकिन 9 अप्रैल के चुनाव के दो चित्र देश के बुद्धिजीवियों के बीच बहस का मुद्दा बना हुआ है। ये जम्हूरियत जिंदाबाद है  कि बाप -बेटा दोनों अब्दुल्लाह पथ्थरवाजो का गुणगान करते रहे और मुल्क को कोसते रहे. ..   एकबार फिर वे देश के कानून/नीति  निर्माता बन गए हैं। लेकिन मीडिया और बुद्दिजीवियो के बीच दोनों  चित्रों पर अलग अलग राय दी जा रही है और केंद्र की सरकार को सामने रखकर अनर्गल शब्द गढ़े जा रहे है.  उसकी हकीकत को जानने की तनिक भी कोशिश नहीं  हुई नेता उपदेश दे रहे है ,बुद्धिजीवी सरकार को गरिया रहे रहे हैं क्योंकि यहाँ जम्हुर्रियत ज़िंदाबाद है !

दरअसल सेना की जीप पर एक पथ्थरबाज  को बाँध कर ले जाते हुए जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है वह भी 9 अप्रैल का ही है ठीक उसी दिन  जिस दिन  सी आर पी एफ के जवानो पर पथ्थरवाजो के बेशर्म करतूत भी सामने आया था। बड़गाम के एक बूथ पर महज 9 आई टी बी पी के जवान और स्थानीय पुलिस मतदान प्रक्रिया बनाये रखने की जद्दोजेहद कर रहे थे ,लेकिन भारी तादाद में बूथ पर जमा हुए पथ्थरबाजो के हुड़दंग के सामने उनका एक भी नहीं चल रहा था। विकल्प दो ही थे पोलिंग या फिर फायरिंग। बैलेट पर पथरबाजो का हुड़दंग भारी पड़  रहा था। चुनाव अधिकारी ने सेना के क्विक रेस्पोंस टीम को सुचना दी। एस ओ एस मैसेज मिलते ही एक आर्मी कमांडर अपने 17 जवानो के साथ पोलिंग बूथ पर  पहुंचे । आर्मी ने लगभग वही विवेक का परिचय दिया जो लात खाकर कुछ सी आर पी एफ के जवानो ने दिया था। लेकिन आर्मी कमांडर ने अपने विवेक में कुछ दिमाग लगाया और जम्हुर्रियत मुर्दाबाद न हो इसकी तरकीब निकाली। 

आर्मी ने जैसे ही मोर्चा संभाला पथरबाजो की भीड़ तितरबितर हुई उसी में एक नौजवान आर्मी के पकड़ में आ गया। उसे जीप के बोनेट से बांधकर सेना के जवानो ने भीड़ को खदेड़ने का उपाय ढूंढा। आर्मी के लिए यह बड़ी चुनौती थी कि मतदान करने आये लोग सुरक्षित घर लौट सके यह भी जम्हुर्रियत ज़िंदाबाद के लिए जरूरी था। और यह उपाय काम आया ,जैसे ही एक पथरबाज से  बंधे जीप को आर्मी ने रोड पर उतरा और पथ्थरबाजो को ललकारा ,हुड़दंगी नौजवान गायब होने लगे थे। इस नए प्रयोग में आर्मी ने कई मासूमों की जान बचाई और देश के जम्हूरियत ज़िदाबाद को कायम रखा। देश के बुद्धिजीवी और अब्दुल्लाह परिवार को यह समझने की जरूरत है कि यहाँ जबतक जम्हुर्रियत ज़िंदाबाद है तभी तक वे कश्मीर में सियासतदां बने हुए हैं और बुद्धिजीवी अनापशनाप लिख रहे है। अगर आप कृतघ्न नहीं है तो मेरे साथ बोलिये जम्हुर्रियत ज़िंदाबाद। विनोद मिश्रा 

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