संदेश

2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ये दिल्ली है मेरी जान ! यहाँ एक चाय वाले को शून्य से ज्यादा मार्क्स नहीं मिलता .....

चित्र
चार साल मोदी सरकार ! बहस का बाज़ार गर्म है ,नेशनल टीवी के सेल्स और मार्केटिंग टीम ने फाइव स्टार होटलों में दरबार सजा दिया है। सोशल मीडिया के क्रन्तिकारी मिनी ब्लॉगर मोदी पास /फेल पर अपने व्यक्तित्व के हिसाब गोले बरसा रहे हैं। सरकारी मीडिया भी इस अवसर पर सिस्टम के दायरे में ओ बी ,डी एस एन जी दौरा  रहे  है. इस निरपेक्ष भाव से कि यह पब्लिक तय करे क्या देखा /समझा। सोशल मीडिया पर शुमार किये जाने वाले  महान पत्रकार पुण्य प्रसून ,रवीश कुमार ,राजदीप जैसे दर्जनों पत्रकार एक अलग धारा बनाने की कोशिश में सीधे सीधे पी एम मोदी पर हमला बोल रहे हैं। आखिर इतना शोर क्यों है भाई ? मोदी को लेकर इतनी प्रतिक्रिया क्यों है ?  अपने यशवंत सिन्हा जी कहते हैं "मोदी एक मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बने हैं देश का कोई भी मुख्यमंत्री  इस लायक हो  सकता है। यानी मोदी में ऐसी कुछ भी खासियत नहीं है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी कहते हैं ,कॉपी में कुछ लिखा ही नहीं है तो नंबर क्या दूँ ? यानी महान रजनीतिज्ञ जोशी जी शून्य से आगे नहीं सोच रहे हैं। खामोश वाले शत्रुघ्न सिन्हा जी अपनी आलोचना से कोंग्रेसियो को भी प…

जब वी मेट !

चित्र
जब वी मेट ! कुछ ऐसा ही इन दिनों सियासत में भी हो रहा। जनता की नज़रो में एक दूसरे से पूछते हैं" हम आपके हैं कौन " और नज़र ओझल होते ही तेरा साथ है तो हमें क्या कमी है ... पिछले 25 वर्षों में केंद्र और राज्यों में इसी तरह के नैतिक /अनैतिक गठजोड़ तक़रीबन 20 बार बने है और हर बार जनता जनार्दन बूढ़े  संरक्षक की तरह अपने को असहाय ही पाया है। जब कुछ सियासी दल अकेला विधायक मधु कोड़ा पर सब कुछ लुटाता और बाद में  उसे भरपूर लूटता है तो कभी किंग मेकर बनने वाले कुमारस्वामी किंग बन जाते  है । मायावती के लिए कभी बीजेपी सबसे ज्यादा  गुणवान गठबंधन होता है तो कभी ममता दी केंद्र में  बीजेपी के लिए आदर्श हो जाती है। तो कभी वामपंथी और दक्षिण पंथी का  गठबंधन केंद्र में कांग्रेस का अलटरनेट मंच बनता है तो कभी बीजेपी को सत्ता से दूर करने के लिए कांग्रेस और वामपंथी सेक्युलर गांठ जोड़  लेती है। ऐसे में कुछ सम्बन्ध जो पब्लिक में बनते है उसे जायज करार दिया जाता है लेकिन कुछ सम्बन्ध जब वी मेट वाला बनता है तो माननीय न्यायलय के सामने भी  मुश्किल होता है कि इसे अनैतिक कैसे कहा जाय क्योंकि संविधान ने दूल्हे दुल्हन क…

मोदी जी ! "ननिहाल से कोई खाली नहीं जाता यह बात मिथिला के लोग जानते हैं "

चित्र
"पग पग पोखरि माछ मखान ,सरस बोल मूसकी मूख पान ,विद्या वैभब शांति प्रतीक ... ई मिथिला थीक"। ,अपने चार साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी जब तीसरे दौरे में नेपाल के जनकपुर धाम पहुंचे तो उन्होंने मिथिला के गौरवशाली परंपरा का कुछ यूँ बखान किया वो भी मिथिलेश कुमारी यानी सिया जी की मातृभाषा में। मिथिला में आकर मोदी अभिभूत थे ,यहाँ तक कि उन्होंने माता सीता के जनकपुर को अपना ननिहाल माना और कहा ननिहाल को कुछ दिए बगैर कोई कैसे जायेगा। लेकिन सरलता ,सरसता और मुस्की वाली मिथिला /बिहार की पीड़ा कथाकार राजकमल चौधरी की "अपराजिता "से बेहतर समझी जा सकती है। “गारंटी ऑफ पीस” खतम छल…विद्यापतिक गीत खतम छल। रूसक कथा खतम छल। डकैतीक कथा थम्हि गेल…सोना-चानीक तेजी-मन्दी सेहो बन्द भऽ गेल रहय। सिकरेटक लगातार धुँआ रहि गेल आ रहि गेल अपराजिता! सरिपहुँ… बागमती, कमला, बलान, गंडक आ खास कऽ कऽ कोसी तँ अपराजिता अछि ने! ककरो सामर्थ नहि जे एकरा पराजित कऽ सकय। सरकार आओत…चलि जायत..मिनिस्टरी बनत आ टूटत, मुदा ई कोसी…ई बागमती…ई कमला आ बलान…अपन एही प्रलयंकारी गति मे गाम केँ भसिअबैत, हरिअर-हरिअर खेत केँ उज्ज…

नरेंद्र मोदी व्यक्ति/ संगठन के अलावा एक आईडिया है जो सीधे आमजनमानस को कनेक्ट करता है

चित्र
" निर्मल भारत अभियान "और "स्वच्छ स्वच्छ भारत अभियान" में क्या फर्क है ? वही फर्क जो राहुल गाँधी और नरेंद्र मोदी में है। भारत को गंदगी से मुक्त कराने की इन दोनों स्कीमों का उद्देश्य भी एक ही था। लेकिन कांग्रेस की निर्मल भारत में सिर्फ कुछ हजार रुपयों का आश्वासन था जबकि पीएम मोदी ने खुद इसके लिए झाड़ू उठा लिया था। यानी स्वच्छाग्रही बनकर मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान को बिहैवियर चेंज का आंदोलन बना दिया। इस देश को समझने का दावा सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है। राहुल गाँधी इसका जिक्र अपने भाषणों में भी करते हैं लेकिन देश परिवर्तन के लिए आकुल है यह समझने में कांग्रेस पार्टी और राहुल ने भारी भूल की है। पीएम मोदी और राहुल की चुनौती भी एक जैसी है दोनों अपनी अपनी पार्टी की भीड़ और टीम में अकेले सेनापति हैं। दोनों पार्टियों में लीडरो को पाने की लालसा अधिक है। लेकिन राहुल गाँधी घर दुरुस्त करने के बजाय मोदी को हटाने के लिए अपनी पूरी जोर आजमाइश कर रहे हैं। यानी सत्ता सबकुछ ठीक कर देगी ऐसा कांग्रेस पार्टी सोचती है। जबकि मोदी मंत्री/मुख्यमंत्री के नाकामयाबी को नज़रअंदाज़ कर जनसंवाद को ही ब…

पाकिस्तान में मिडिल क्लास का न होना ... और हिंदुस्तान का मिडिल क्लास

चित्र
पाकिस्तान में फ़ौज ने बड़ी चालाकी से एक और तख्ता पलट को अंजाम दिया है। पाकिस्तान की सुप्रीम  अदालत ने फौजी अफसरों की जांच में वजीरे आज़म नवाज़ शरीफ को आचरण से  ईमानदार नहीं पाया और उन्हें  पहले सत्ता से बाद में सियासत से ताउम्र के लिए बेदखल कर दिया । फ़ौज की जिलालत और बेइज्जती  से आहत नवाज़ शरीफ पाकिस्तान को अलविदा कहते हुए एकबार फिर लंदन जा बसे हैं. लेकिन पाकिस्तान में कोई शोर गुल नहीं है। न ही मीडिया में इसको लेकर कोई तीखी प्रतिक्रिया है। सोशल मीडिया मजहबी और दहशतगर्द तंजीमो के प्रोपगैंडा से अबतक ऊपर नहीं उठा है। वजह पाकिस्तान में मिडिल क्लास का न होना अहम् है। एक ही वक्त दो मुल्क वजूद में आया पाकिस्तान और हिन्दुतान लेकिन वहां आज़ादी के 70 साल के बाद भी जमींदारों ,पुराने रजबारो और कारोबारियों का उच्च वर्ग है जो हुकूमत हैं या फिर  फौज के आलाधिकारी है. दूसरा तबका  निम्न वर्ग का है जिनकी भूमिका मजदूरी  और मजहबी तंजीमो के एक्टिविस्ट के रूप में  है। अल्लाह ,अमेरिका और आर्मी के इस अलायन्स ने कभी मध्यम वर्ग पनपने ही नहीं दिया । 

आज अमेरिका की भूमिका में वहां चीन आ गया है। लेकिन उसके पडोसी देश भार…

उम्मीदों का हाहाकार !

चित्र
उम्मीदों का हाहाकार ! हर तरफ निराशा ही निराशा। हर तरफ हिंसा का शोर ,किसान परेशान ,कारोबारी परेशान ,जज परेशान हैं ,मुल्जिम परेशान है।  दलित परेशान है सवर्ण परेशान है। कश्मीर परेशान ,कन्याकुमारी परेशान है । देशी अंदाज़ में इसे लोग  भसड़ कहते है। चारो ओर मनो भसड़ ही भसड़ है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी एन शेसन भी हाल में इस भसड़ के शिकार हुए हैं। सोशल मीडिया पर किसी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी तो बड़े बड़े संपादक भी इसे कन्फर्म करने की जहमत नहीं उठाई और चल पड़ा उनके व्यक्तिव कृतित्व का पाठ। जीते जीते जी उनका राम नाम सत्य है ! कर दिया गया। लेकिन संपादक  नहीं मानेगे की वे फेक न्यूज़ फैला रहे हैं। क्योकि वे ज्ञानी है और लोकतंत्र ने उन्हें चौथा स्तम्भ माना गया  है। ऐसा कुछ लोगो का दावा है .. 
. हर हफ्ते अटल जी सोशल मीडिया पर दिवंगत होते हैं और हर बार उनका प्रोफाइल डॉक्यूमेंट्री चैनेलो के लाइब्रेरी से  बाहर निकल आता है। । याद है आपको सोशल मीडिया का चर्चित फ़ारूक़ अहमद डार। वही डार जिसका फोटो ह्यूमन शील्ड के नाम से पब्लिश्ड करके ओमर अब्दुल्लाह ने बवाल खड़ा कर दिया था। बड़गाम के इस टेलर को लेकर कश्मीर में महीन…

सोशल मीडिया ने यहाँ नश्ले तबाह कर दी है !

चित्र
ये सोशल मीडिया की क्रांति है या रिलायंस जिओ वाले का दुनिया मुठी में करने वाला फ्री /सस्ता इंटरनेट डाटा का कमाल ,अभी अभी मोहम्मद अशरफ सेहराई ने कश्मीर के अलगाववादी संगठन तहरीके हुर्रियत के चेयरमैन का पद संभाला था और बेटा जुनैद अशरफ खान ने सोशल मीडिया पर एके 47 के साथ फोटो अपलोड कर अब्बा हुजूर को यह बता दिया कि वह हिज़्बुल मुजेहिद्दीन का आतंकवादी बन गया है।वह बता गया अब्बा हुजूर जिस आग से खेलने की सीख गिलानी और आपने दी अब उस तपिश में आप भी जलेंगे। कश्मीर के इतिहास में यह पहलीबार हुआ है जब किसी टॉप अलगावादी लीडर के घर से आतंकवादी वना हो।गिलानी साब से लेकर हिज़्ब के चीफ सलाहुद्दीन के बच्चे राज्य सरकार में आला दर्जे का अफसर है ,ऊँचे दर्जे के स्कूल में तालीम लेने वाले हुर्रियत लीडरो के बच्चो ने कभी तहरीक और जिहाद की तरफ नहीं देखा। लेकिन सोशल मीडिया का कमाल देखिये दूसरे के घर जलाने वाले का आज खुद घर जल रहा है। किसी ने सही कहा है कि सोशल मीडिया का प्रभाव पानी की तरह है जो सतह पर रुकता नहीं है बल्कि अपना रास्ता बनाता है गलत या सही यह पानी भी नहीं जानता। वह दौर था जब सैयद साल्हुद्दीन ,यासीन मालि…

"थके हुए देश को रास्ता सिर्फ कांग्रेस दिखा सकती है"

चित्र
हमारा नेता कैसा हो राहुल गाँधी जैसा हो ! कांग्रेस की महान परंपरा के बीच यह महाधिवेशन कुछ खास है। राहुल गाँधी सहित तमाम नेताओं के भाषण मोदी से शुरू होता है और आर एस एस पर ख़तम। वैसे बुजुर्ग कांग्रेसी नेता खड़गे पार्टी जनो से बीजेपी -आर एस एस की तरह काम करने की सलाह भी दे रहे थे तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या अधिवेशन में राहुल गाँधी को निर्विरोध 2019 में प्रधानमंत्री बना रहे थे। कोई रोकने वाला नहीं है .. सिद्दरामैया जानते हैं जितना 2018 का कर्नाटक चुनाव उनके लिए मुश्किल है उससे कई ज्यादा मुश्किल राहुल के लिए 2019 का चुनाव है। लेकिन गाँधी परिवार का महादरबार लगा है वहां पार्टी की समीक्षा मुश्किल है ,यही वजह है छोटे बड़े ,नौजवान ,बुजुर्ग सारे कोंग्रेसियों ने बीजेपी -आर एस एस की समीक्षा करना ही उचित समझा । कांग्रेस पार्टी का यह 84 वा अधिवेशन राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद संभवतः पहला इतना बड़ा सम्मेलन था लेकिन अध्यक्ष जी के भाषण में सोशल मीडिया के फेक न्यूज़ का प्रभाव ज्यादा दिखा। "देश गुस्से में है .. ,लोगों को लड़ाया जा रहा है ,जाति सम्रदायो को बाटा जा रहा है... थके हु…

स्वच्छ भारत का यह कारवां देश की राजनीति /अर्थनीति में भी बदलाव लाएगा और इसके लिए मोदी याद किये जाएंगे ..

चित्र
लम्बे अरसे के बाद एक निजी चैनल के कार्यक्रम में सोनिया जी खूब बरसी ,मोदी सरकार को खूब खरी खोटी सुनाई। ऐसा लगा चैनल ने सोनिया जी के लिए इलेक्शन मंच बना दिया था। वैसे भी सोनिया जी या तो चुनावी सभा में बोलती है या फिर कमिटेड पत्रकारों के प्रोग्राम में ,संसद में वह क्यों नहीं बोलती ,क्यों देश के महत्वपूर्ण सवाल अपने वकील सांसदों के जरिये बोलती हैं ? यह प्रश्न पिछले 25 साल से अनुत्तरित है। लेकिन देश में आईडिया ऑफ़ इंडिया पर हो रहे तथाकथित आघात से उद्वेलित सोनिया गांधी ने एक बड़ा मंच संभाल लिया था, तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी सिंगापूर से आईडिया ऑफ़ इंडिया का अलख विदेशो में जागते रहे हैे । ये नफरत की सियासत ही अगर आईडिया ऑफ़ इंडिया है तो सोनिया जी और उनके कुनबे को सत्ता के लिए कुछ वर्ष और इन्तजार करना होगा। क्योंकि देश की 70 फीसद आवादी पर राज करने वाली बीजेपी और पी एम मोदी ने देश में सियासत की एक नयी धारा दी है जिसमे आईडिया ऑफ़ इंडिया ,गाँधी -नेहरू ,सेकुलर ,सामजवाद ,जातिवाद जैसे जुमले न्यू इंडिया में बे असर हो गए है। 25 साल तक लगातार सत्ता में बने रहने वाले माणिक सरकार सत्ता से क्यों बेदखल ह…

क्यों संजय की दृष्टि कमजोर हो गयी है ?

चित्र
25 साल बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने कहा है "हम साथ साथ हैं " तो 25 साल बाद त्रिपुरा में राजनीति ने ऐसी पलटी मारी है कि सियासी पंडित चौक गए हैं, तो हैरान बुद्धिजीबी नए तरीके से चुनावी गणित समझाने लगे हैं। आंकड़ों के मायाजाल से  बीजेपी को मिली  जनमत को ठीक वैसे ही नकार रहे हैं जैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव  के बाद "बुआ और भतीजे " ने  हार का ठीकरा ई वी एम पर फोड़ा था। सियासी घमासान में कल के दोस्त दुश्मन बन रहे है और आज के दुश्मन दोस्त बनने का दम्भ भर रहे हैं ।  कुरक्षेत्र 2019 की तैयारी में मीडिया और सोशल मीडिया पर शंख फुके जा रहे हैं.. अनगिनत संजय 2019 के महाभारत की पल पल की खबरे देने के लिए  रिहर्सल में जुट गए हैं.

.. सबसे तेज और सटीक लेकिन दिक्कत यह है कि  धृतराष्ट्र अँधा नहीं है। लेकिन इतने महारथियों के  बीच अर्जुन का बार बार ननिहाल जाना  संजय को यह अवसर जरूर देता है कि वे अपनी टी आर पी बनाले। लेकिन चाणक्य अब किस मोर्चे की फतह की तैयारी में है और उसके तरकश में कितने तीर है यह बात संजय नहीं जानता। वह इसलिए नहीं कि चाणक्य की महीन चाल को समझना मुश्किल…

बड़े सम्पादको के लिए बहार है, अब न तो अखबार ढूढ़ने का संकट है न ही पाठक

चित्र
आज हर कोई सुनाने को बेताब है। हर के पास सवाल है लेकिन न तो कोई सुनने के लिए तैयार है न किसी के पास जवाब लेने का धैर्य।
मैं ऐसे नामचीन एडिटरों को जानता हूँ जो अपने व्यवसायिक दायित्व के बाद  रात दिन सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। मैं ऐसे लोगों को भी जानता हूँ जो दिन में 20 -25 ट्वीट और अपने सद्विचार सोशल मीडिया पर डालते हैं। आखिर ज्ञान की वर्षा इनदिनों क्यों तेज हो गयी है ?शायद इसलिए कि देश में बेरोजगारी बढ़ गयी है या फिर इसलिए कि गरीब की बीबी गांव की भौजाई।

पेड और अनपेड सेनानियों की फ़ौज किसी को भक्त बताकर तो किसी को राष्ट्रवादी गैंग  बताकर अपनी अहमियत को साबित करना चाहती है। इनके ट्वीट  या न्यूज़ फीड पर ट्रोल ही इनका सोशल मीडिया पर टी आर पी है। कह सकते हैं जिसका जितना ट्रोल उतना इनाम। यानी  न्यू मीडिया के दौर में कई नामी गिरामी संपादक आज अपने पाठक के पत्र नहीं ढूंढ रहे हैं बल्कि उनका ध्यान इस और होता है कि उनके सत्यवचन पर कितनी तीखी प्रतिक्रिया हुई  है। बड़े सम्पादको के लिए बहार है, अब न तो अखबार ढूढ़ने का संकट है न ही पाठक। एक घंटे के अंदर वेबसाइट खोलकर  पर बड़े  सम्पादक अपने सम्पादकीय ले कर …

बोलने की आज़ादी या स्वच्छदंता

चित्र
बोलने की आज़ादी या स्वच्छदंता। मीडिया ने अपने हिसाब से संवैधानिक अधिकार ले  लिया है। आज  पारम्परिक मीडिया को सोशल मीडिया और न्यू मीडिया से मिली चुनौती  ने ख़बरों की  क्रेडिबिलिटी पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है। कहते हैं कि "आधा सच" ,झूठ से भी ज्यादा खतरनाक होता है। फिर आधा सच के बिना पर प्रसारित और प्रचारित हो रही खबरें ,समाज में ज़हर नहीं घोल रही  है ? देश की  दिशा और दशा बताने वाले स्वधन्य पत्रकार और मीडिया हाउस सोशल मीडिया से ब्रेकिंग न्यूज़ उधार ले  रहे हैं और उसका विश्लेषण भी कर रहे है। जबकि ऐसे नामी गिरामी चैनल का घटना पर कोई रिपोर्टर नहीं है। कॉस्ट कटिंग के दौर में ख़बरों की विश्वसनीयता एजेंसी और स्टिंगर के भरोसे है लेकिन संविधान और देश की आज़ादी  अक्षुण रखने का दावा हम कर रहे हैं।  आत्ममंथन करने के बजाय चैनल्स  टी आर पी के नाम पर सिस्टम में गलतियां ढूंढ रहे हैं। लेकिन मीडिया की  गलती  पर कौन सवाल उठाएगा  ? इस बात को लेकर कोई बहस नहीं है। 

मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट और एथिक्स को लेकर आज कोई गंभीर चर्चा मीडिया में नहीं है। मीडिया ने पेड न्यूज़ के रूप में अपने उच्च आदर्शो किस तरह मजाक बन…

गांधी ,दीनदयाल और अटल के सपनो के भारत में " मोदीकेयर "

चित्र
सन 2000 में पहलीबार अटल बिहारी वाजपेयी ने जनरल बजट में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना लाये। मकसद था गांव के खेत खलिहान सड़क संपर्क से जुड़े ,बाजार से जुड़े। अटल जी का मानना था कि जबतक खेतो तक सड़क संपर्क नहीं जुड़ेगा तबतक किसानों की माली हालात सुधरने वाली नहीं है। 2018 के बजट में "अटल जी" फिर लौट आये हैं। ऑल वेदर रोड नेटवर्क बनाकर मोदी सरकार ने खेत -खलिहान को बाज़ार से जोड़ने की पहल की है।  पिछले दस वर्षों में  ग्रामीण भारत को कुछ न कुछ हर बजट में मिलता रहा है लेकिन ग्रामीण भारत की  आधारभूत संरचना सुधारने के बजाय केंद्रीय योजनाए भ्रष्टाचार  की  भेट चढ़ गयी । लम्बे अरसे के बाद 2018 के ग्रामीण भारत के बजट ने सबको चौकाया है। पहलीबार ऐसा देखा जा रहा है कि हर कोई अपना हिस्सा इस बजट में ढूंढ रहा है। लेकिन देश के 70 फीसद आवादी अबतक अपना हिस्सा ढूंढने के बजाय सरकार से सिर्फ सहूलियत ही चाही थी  और गरीबी हटाओ का नारा किताबों तक सीमित रह गया था। 
पिछले महीने अपने रेडियो प्रोग्राम "मन की बात " में पी एम मोदी ने कहा था "शहरीकरण के तेज रफ़्तार के वाबजूद आज भी 70 फीसद लोग गाँव में ही र…

बिहार के लीडरों के पास आईडिया की कमी है या लीडर लोगों को अंडरएस्टीमेट करते है ?

चित्र
आदरणीय नीतीश कुमार जी ,
आपके नेतृत्व में बिहार ने दहेज़ और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को ख़तम करने का संकल्प लिया है। कहा जाता है कि विश्व की सबसे लम्बी मानव श्रृंखला में 5 करोड़ लोग शामिल हुए थे और यह 13668 किलोमीटर लम्बी श्रृंखला थी। हालाँकि विपक्षी दल इसे मानव रहित श्रृंखला बताते हैं और इसे फ्लॉप शो करार दे रहे है। लेकिन बिहार में बार बार इस मानव श्रृंखला से मुझे याद आया ,एकबार मैंने आपसे पूछा था कि बिहार के लीडरों के पास आईडिया की कमी है या लीडर लोगों को अंडरएस्टीमेट करते है ,हर बार वही घिसी पिटे नारे वही जातिवादी स्लोगन ? आपने शायद एक नए पत्रकार के उत्साह को भांप लिया था और मुस्कुरा दिया था। लेकिन शरावबंदी के बाद इस नए सोशल रिफार्म की शपथ ने मुझे अपनी बात जोर से रखने का मौका दिया है कि आप अपनी महत्वाकांक्षा में बिहार की सुध लेना भूल गए हैं और वाकई आपके पास बिहार के लिए कोई आईडिया नहीं है।
बिहार मे आपको पिछले 15 वर्षो से मिला जन समर्थन इस बात की पुष्टि करता है कि जातीय फॉर्मूले के ध्वस्त करके आपने बिहार में सुशासन बाबू का इमेज बनाया था लेकिन भ्रष्ट प्रशासन और शराब माफिया और पुलि…

जनमत को साजिश के प्रपंच से हराने की जी तोड़ कोशिशे जारी है

चित्र
लोकसभा में एक चर्चा के दौरान लालू जी ने सोनिया गाँधी से मुखातिब होते हुए कहा था ,मैडम ! ये वकील लोग आपकी पार्टी को गर्त में धकेल देंगे। लालू जी का इशारा कपिल सिब्बल की ओर था। उस दौर में  कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार में 10 से ज्यादा वकील केंद्रीय
मंत्री थे तो   दर्जन भर प्रवक्ता सुप्रीम कोर्ट के वकील  थे। बीजेपी में भी वकीलों ने अपनी पहुँच बनायीं और कुछ वकीलों ने टीवी के सौजन्य से अपनी खास जगह बनाली। लेकिन इस पार्टी में देसी राजनीति और सामाजिक ताना वाना पार्टी के साथ जुडी रही,लेकिन लालू जी की  बात का स्मरण इसलिए जरूरी है कि बिलकुल गबई अंदाज़ में उन्होंने देश के सियासी मिज़ाज़ में कोर्ट के कानूनी दावपेच का सदन में इस्तेमाल को उन्होंने खतरनाक माना था।  सुप्रीम कोर्ट के हालिया विवाद में कांग्रेस की भूमिका इस बात का सबूत है कि देश के कोने कोने में फैली यह पार्टी कुछ वकीलों के ड्राइंग रूम तक सिमट गयी है ,जहाँ जनमत के बगैर  सत्ता पाने का आसान जरिया ढूंढा जा रहा है। कह सकते हैं कि जनमत को साजिश के प्रपंच से हराने की जी तोड़ कोशिशे जारी है।

 ऐसी जल्दी क्यों है भाई। जस्टिस  बी एच लोया की तथकथित…