संदेश

2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कश्मीर " गले का नस" या नैरेटिव : चौकीदार मोदी ने पाकिस्तान के तर्क बदल दिए हैं

चित्र
जर्जर माली हालात के बीच कश्मीर -कश्मीर करके पाकिस्तानी हुकूमत ने  अपने गरीब अवाम को गुमराह करने का एक और मौका ढूंढ लिया है । 70 साल से पाकिस्तान के हुकुमरानों और फौज के लिए "भारत" निशाने पर होता था आज आर एस एस और मोदी हैं और आरोप इस बार मानवाधिकार हनन नहीं धारा 370 और 35 A है। जो पाकिस्तान अब तक कश्मीर का भारत में विलय को नहीं स्वीकारता उसे भारत के संविधान के धाराओं से क्या लेना देना ? कल अगर भारत के लोग भारत के  विभाजन के मसौदे (१९४७) को मानने से इंकार कर दे फिर पाकिस्तान की हुकूमत और फौज  का क्या तर्क होगा ? मेजर मस्तगुल (आतंकवादी ) से लेकर मुशर्रफ तक कश्मीर ,भारत के खिलाफ  पाकिस्तान के प्रोपगैंडा और नैरेटिव का कारगर हथियार रहा है जिसकी बदौलत पाकिस्तान की  हर  हुकूमत अपनी उम्र पूरा करती रही है कुछ फौज की बूटों के नीचे रौंदी जाती रही है । लेकिन आज भारत में  कुछ डाइनेस्टी पत्रकार और नेता कश्मीर को लेकर सेंसेशन बना रहे हैं। उनकी इस उत्तेजना में जमीनी सच्चाई कम और नैरेटिव ज्यादा है और वे पाकिस्तान के प्रोपगैंडा फॉर्मूले को पुख्ता बना रहे हैं। यानी आने वाले दिनों में मोदी सरका…

देश ,काल और परिस्थिति से अनजान राहुल गांधी : ये तारीख़ सही करने का वक्त है

चित्र
प्रिय राहुल गाँधी जी , आप भी न ! नहीं बदलने की कसम ले रखी है। नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री मोदी पर आपके तीखे हमले से लबालब भरा हुआ मैं लखनऊ से दिल्ली वापस आ रहा था। एयरपोर्ट के रास्ते में पड़ने वाले एटीएम बूथ  पर  सर्दी के मौसम में लगी लाइन देखकर मैंने अपने बुजुर्ग ड्राइवर ताज मोहम्मद से पूछा भाई ! आपका क्या हाल है ? नोटबंदी में ? उनका जवाब था भाई जान ,अपना तो सब कुछ लाइन में लगकर ही मिलता है ,, हमें क्या चिंता ,चिंता वो करे जो अपना काला धन घर में रखा था अब  बैंक में जमा करवाने के लिए किराये पर  लोगों को लाइन में खड़ा किये हैं। गरीबों के  सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता  है…  धन्ना सेठ चोरों को अब डर लगने लगा है..  ताज साहब भारत की गरीबी पर एक संक्षिप्त भाषण मुझे सुना गए। ताज मोहम्मद की आवाज मेरे कानों फिर गूंजने लगी है जब आपने कश्मीर पर धारा 370 और तथाकथित बढ़ी हिंसा को लेकर  मोदी सरकार को घेरने की सियासी पहल तेज की है। लेकिन अब मैं इस बात से आश्वस्त हूँ  कि बूढी सेठानी (सोनिया जी )को दुबारा गद्दी क्यों संभालनी पड़ी है। राहुल जी ,जो सोच  लखनऊ के ताज मोहम्मद की  थी जिसे समझने में आपलोगों …

पहलीबार जब सरस्वती जी के रूप में मुझे सुषमा जी मिली थी

चित्र
1996 में जब 13 दिन बाद अटल बिहारी वाजपेयी की पहली सरकार गिरी और विपक्षी पार्टियां  सांप्रदायिक बनाम धर्मनिरपेक्षता का हवाला देकर संयुक्त मोर्चा की सरकार बना कर संसद में विश्वास मत लेने पहुंची । सुषमा जी ने इस अवसरवादी सियासत को धोखा बताते हुए संसद में अपने ओजश्वी भाषण में कहा था आज भारत में रामराज्य की नींव पड़ गयी है। उन्होंने जोर देकर कहा था यह देश देख रहा है कम्युनल कौन है और सेक्युलर कौन है और जल्द ही एक मजबूत बीजेपी सत्ता में वापस होगी और अपने संकल्पों को पूरा करेगी। कल लोकसभा में धारा 370 हटाने के निर्णय के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी को भेजे अपने अंतिम ट्वीट में सुषमा जी ने कहा "'मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी" और चंद घंटो के बाद मानो वे आश्वस्त होकर महानिर्वाण की अनंत यात्रा पर निकल गयी थी। 
सांप्रदायिक बनाम धर्मनिरपेक्षता :1996 
"धर्मनिरपेक्षता का बाना पहनकर हम पर साम्प्रदियकता का आरोप ये तमाम लोग सत्ता के लिए एक हो गए हैं। संविधान निर्माताओं ने धर्मनिरपेक्षता के स्वरुप की क्या कल्पना की होगी और इस सत्ता की सियासत ने अपनी सुविधा…

कश्मीर में क्या चल रहा है ?

चित्र
मीर साहब आदाब , इंडिया से बोल रहा हूँ। बोलो साहब आदाब ! कश्मीरियों का हाल पूछा शुक्रिया। क्या चल रहा है ? उधर से आवाज आयी। मैंने कहा भाई मैं भी आपसे ही पूछ रहा हूँ क्या चल रहा है। मीर साब की तेज हंसी की आवाज़ आयी। उन्होंने घर परिवार का हाल पूछा और कहा जब भी आप फोन करते हो खुश कर देते हो लेकिन ये भारत ये कश्मीर कबतक चलेगा ? मैंने पूछा दिक्कत क्या है ? उन्होंने कहा भाई दिक्कत तो कुछ नहीं है लेकिन अपने ओमर साहब और मेहबूबा की गड्डी पार्क नहीं हो रही है। हर चार घंटे में मीडिया के साथ राजभवन यह पूछने पहुंच जाते हैं कि क्या चल रहा है ? अरे भाई ! दो दिन पहले दोनों बाप बेटा पी एम मोदी से मिलकर आये हैं फिर गवर्नर साहब से क्यों पूछने जाता है ? ये तो उमर साहब को बतानी चाहिए कि कश्मीर में क्या चल रहा है ? मीर साहब बड़े बुजुर्ग की हैसियत में समझाते हुए बताया भाई ! गवर्नर मलिक साहब कह रहे हैं "कल क्या होगा यह नहीं पता लेकिन आज तो मैं कह सकता हूँ ऐसा कुछ भी नहीं है जो अफवाह में फैलाये जा रहे हैं। यानि क्या चल रहा है यह ठीक से गवर्नर साहब को नहीं पता है लेकिन वह जोर देकर कहते हैं, संसद चल रहा…

कश्मीर के पूर्व सीनियर आई ए एस अधिकारी शाह फैज़ल को कश्मीर में सिक्योरिटी डेप्लॉयमेंट से क्यों डर लगता है ?

चित्र
प्रिय शाह फैज़ल साहब , कश्मीर को  लेकर आपकी और इमरान खान की बढ़ी चिंता के बीच मेरे व्यक्तिगत सुझाव पर प्रकाश डाला जा सकता है।  जनसंघ के संस्थापक नेता श्यामाप्रसाद मुख़र्जी की कश्मीर में  रहस्मयी मौत पर दुःख व्यक्त करते हुए  तात्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने  कहा था  जब बड़ी गलतियां की जाती हैं, तब इस उम्मीद में चुप रहना अपराध है कि एक-न-एक दिन कोई सच बोलेगा". यह अपराध आपकी पीढ़ियों ने आपको झूट बोलकर की है और हमारे सियासतदानो ने भी की है।   कश्मीर में भारत से  गलती हुई है यह बात पंडित नेहरू जी को तब पता चला जब वे पाकिस्तानी फौज को लाहौर तक खदेड़ देने के बावजूद यू एन अमन बहाली  के लिए चले गए। नतीजा डिक्सन और जनमत संग्रह जैसे प्रस्ताव आये जो भारत के मुँह पर झन्नाटेदार तमाचा था। कश्मीर पर अमेरिकी राष्ट्रपति  ट्रम्प की  हालिया मध्यस्तता की बात सामने आयी तो मुझे  अपना गाल एक बार फिर  सहलाना पड़ा। हमने तीन जंगे लड़ी, दर्जन भर एग्रीमेंट पाकिस्तान से किया फिर भी कश्मीर का मसला बरकार है । वजह पिछले 70 वर्षो से हमने सच न बोलने की कसम लेकर सिर्फ कुछ लोगों की सियासत को कश्मीर का मसाला बन…

अपराजीत कोसी या अपराजिता जातवादी मानसिकता : मिथिला को बचाना है

चित्र
"पग पग पोखरि माछ मखान ,सरस बोल मूसकी मूख पान ,विद्या वैभब शांति प्रतीक ... ई मिथिला थीक"। लेकिन सरलता ,सरसता और मुस्की वाला मिथिलांचल में  कोसी ,कमला बागमती ,गंडक के प्रलय में कराहती ज़िंदगी के बीच आज उस मिथिला के वैभव को देख आइये। जीवन संघर्ष की इससे भयानक तस्वीर आपने शायद ही कभी देखी होगी । हिंदी और मैथिली साहित्य के महान  विद्वान और कोसी अंचल के बाढ़ पीड़ित राजकमल चौधरी से  बेहतर मिथला के इस सलाना  फोटो ऑप  और मौत के मुहं से निकलने की आमजन की जद्दोजेहद शायद  नहीं देखा होगा।  “गारंटी ऑफ पीस” खत्म हुआ …विद्यापति के  गीत अब सुर ताल खो चूके हैं । रूस और मेक्सिम गोर्की की कहानी अब किसी मैथिल के दरबाजे पर डिसकस नहीं हो रही है । डकैती और अपराध की चर्चा  भी लगभग बंद हो चुके हैं। सोना-चानी और बाज़ार का हाल लेने वाला आजकल कोई नहीं है । उदासी और सन्नाटे के बीच सिर्फ अपराजिता मौजूद है। 
सच में  बागमती, कमला, बलान, गंडक और  खासकर  कोसी तो  अपराजिता है ,इसे कोई पराजित नहीं कर सका  ! यह किसी के बस की बात नहीं थी कि इसकी प्रचंडता को पराजित किया जा सके। सरकार आएगी ,चली जायेगी। मिनिस्ट्री बनेग…

कश्मीर :मर्ज पकड़ने की कोशिश में अमित शाह

चित्र
यह सवाल आम लोगों  के मन में जरूर उठता है कि कश्मीर का मसला क्या है ?
जितना मैं समझ पाया हूँ कि वर्षो पहले कुछ नेताओं ने जो गांठ अपनेहाथों से लगायी थी मौजूदा पीढ़ी को वह गांठ दातों से खोलना पड़ रहा है। तो क्या पहलीबार संसद में धारा 370 को लेकर गृह मंत्री अमित शाह का बयान समस्या से मुंह चुराने के बजाय एक सीधी अभिव्यक्ति थी ? कुछ चुनिंदा एलिट खानदानो  के लिए कश्मीर में बने नियम कायदे आज़ादी के बाद कानून बन गए। आर्टिकल 35 ए और 370 उन्ही चंद कानूनों में है जिसे दिल्ली ने कश्मीर  के कुछ परिवारों को खुश करने के लिए उपकृत किया था । आज  अमित शाह ने कश्मीर में इस एलिट रिवायत के नस पकड़ने की कोशिश की है  और कश्मीर के  पावर ब्रोकर्स और भ्रष्टाचार पर चोट करने की पहल की है।  अगर ऐसा है तो  माना जायेगा कि इस सो कॉल्ड स्पेशल स्टेटस के नाम पर लूट की छूट को वो पूरी तरह से ख़तम करने का उन्होंने कदम उठाया  है। याद रहे 70 वर्षो से कश्मीर में इस सिस्टेमैटिक करप्शन के लिए सिर्फ धारा 370 और 35 ए  जिम्मेदार है जो भ्रष्टाचारियों को पीढ़ी दर पीढ़ी से क़ानूनी प्रक्रिया और जाँच की प्रक्रिया में शील्ड का काम करता  है। 

भार…

संत कबीर दास जयंती पर विशेष : मीडिया में एक अदद कबीर की जरुरत है

चित्र
संत कबीर की जयंती ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को जून में मनाई जाती है। एक ऐसा उपदेशक जिसने हर धर्मों में व्याप्त रूढ़ियों की निंदा की  ,कुरीतियों के खिलाफ मुखर आवाज बने लेकिन कबीरदास जी को हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही संप्रदायों में बराबर का सम्मान मिला ।  गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पांय ।बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय . .. कबीर को जानने के लिए उनके गुरु को जानना भी जरुरी है। हालाँकि हमने भारत की गुरु शिष्य परम्परा को ही  नज़रअंदाज कर दिया है इसलिए न तो कबीर हमें याद आते हैं न हमें अपनी संस्कृति।  कबीर के गुरू स्वामी रामानंद थे। आठ साल की अवस्था में रामानंद का यज्ञोपवीत कराया गया। विद्वान ब्राह्मणों नें पलास का डंडा देकर उन्हें काशी पढ़ने  जाने के  लिए कहा और कुछ वक्त  बाद लौटने की भी नशीहत दी । लेकिन बालक रामानन्द लौटकर आने के लिए तैयार नहीं  हुए।  एक बार डंडा और कमंडल पकड़ी फिर सांसारिक माया में लौटने का कहाँ कोई सवाल रहा गया था। काशी में  महर्षि राघवानन्द जी ने उन्हें राम मंत्र की दीक्षा देकर विधिवत संन्यास की दीक्षा दी । रामानन्द जी काशी के पंच गंगा घाट पर तपस्या करने लगे…

पाकिस्तानी जनरलों के आतंकवादियों का क्या मर्ज है ?

चित्र
तो क्या मोदी भारत के सॉफ्ट स्टेट की पारम्परिक छवि तोड़ रहे हैं ,क्या मोदी अपने तमाम पूर्वर्ती प्रधानमंत्री से अलग हैं ? यकीन मानिये जवाब हाँ में ही मिलेगा।  दुनिया भर की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिश्केक दौरे पर थी । एस सी ओ समिट में काफी अरसे के बाद भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री एक मंच पर दिखे थे लेकिन यह सवाल सबके जेहन में था कि क्या प्रधानमंत्री मोदी आज भी वही हैं जो वे 2015 में थे। दुनिया ने यह भी देखा पी एम् मोदी ने हाथ मिलाने तो दूर वज़ीरे आज़म इमरान खान से नज़र मिलाना भी उचित नहीं समझा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस दौरे में पाकिस्तान के एयर स्पेस को इग्नोर करके यह संकेत पहले दे दिया था। 2014 के अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बुलाना ,अफगानिस्तान दौरे के बीच लाहौर पहुँच कर नवाज़ शरीफ के फैमिली फंक्शन में शरीक होना। लेकिन मोदी तो मोदी हैं उन्हने किर्गिस्तान जाने के लिए पाकिस्तान को कोई जेस्चर दिखाने का मौका नहीं दिया उन्होंने अपनी रूट बदल ली। " पाकिस्तान को अपनी मौत खुद मरने दो ,हमें पाकिस्तान पर अपना वक्त अब बर्बाद नहीं करना है " पी एम…

बिहार में बहार है क्योंकि यहाँ आज हज़ारों कुमार हैं

चित्र
सैकड़ो पढ़े लिखे नौजवानो ने अपने अपने इलाके में अपने आईडिया से क्रांति लाने की पहल की है जिसका परिणाम जमीन पर दिखने लगा है.... शराबबंदी के बावजूद बिहार का राजस्व जी एस टी के कारण 23 % बढ़ा है। 14 वर्ष पहले का एक फेल्ड स्टेट आज बीमारू स्टेट की सूची से अपने को बाहर करके टॉप 5 की सूची में जगह बना लिया है। ऐसा दावा जे डी यू के एक प्रवक्ता का है। यानी नीतीश जी के राज में बिहार ने काफी तरक्की की है ऐसा उनका मानना है । हालिया चुनाव के नतीजे जे डी यू को उत्साहित भी करने वाले हैं। लेकिन क्षेत्रीय और जातीय पार्टियों के लगातार सिकुड़ते जनाधार के बीच नीतीश कुमार की सियासत भी सवालो को घेरे में है। उत्तर भारत के परिवार वाली पार्टियों के बीच शायद नीतीश जी अकेले शख्स हैं जिन्हे अपनी व्यक्तिगत छवि की चिंता पार्टी से ज्यादा है ,हर समकालीन नेतृत्व से उनके टकराव को इसी सन्दर्भ में देखा जा सकता है। समाज के हर वर्ग में मोदी सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से और अपनी छवि को लेकर नीतीश कुमार क्या वाकई चिंतित हैं ? क्या बिहार के विकास से ज्यादा नीतीश कुमार अपनी सियासत को लेकर ज्यादा सजग हैं। लेकिन इस सवालों के बीच आ…

अमित शाह : यानी पी एम मोदी के आडवाणी

चित्र
गुजरात असेंबली इलेक्शन के दौरन पत्रकारों के बीच ऑफ द रिकॉर्ड बात  करते हुए अमित शाह से मैं ने पूछा था कि लोगों की बढ़ती उम्मीदें इस बार पार्टी को नुकसान पंहुचा सकती  है? सौराष्ट्र के इलाके में मैंने लोगों से ये नाराजगी सुनी थी। गर्मी के सीजन में कई इलाकों में रोज पानी नहीं पहुँच पाता था । जबकि कुछ  साल पहले तक इन इलाकों में हफ्ते में एक बार पानी उपलब्ध होना बड़ी बात होती  थी। तब यहाँ टैंकरों से पानी भेजा जाता था। अब हर घर तक पाइप लगे हैं। अमित शाह का जवाब था " लोगों में एस्पिरेशन बढ़ना ,लोगों को तरक्की के साथ चलना  ही तो हमारे लिए परिणाम लाता हैं। बीजेपी दूसरे पार्टी से अलग क्यों है क्योंकि इससे लोगों की उम्मीदे जुडी हैं। जाहिर है नाराज भी वे हम से ही  होंगे। " आप माने या न माने गुजरात में निश्चिन्त भाव से उन्हें चुनाव लड़ते देख यह जरूर लगा था कि अमित शाह इस दौर में प्रधानमंत्री मोदी के बाद  सबसे जीनियस राजनीतिज्ञ हैं।
विविधताओं से भरे इस देश के  सियासी समाजी मिजाज को समझने वाला व्यक्ति पहले पार्टी अध्यक्ष फिर  गृह मंत्री बना है तो माना जाएगा कि यह मोदी सरकार का महत्वपूर्ण फैसला …