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June 9, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पाकिस्तानी जनरलों के आतंकवादियों का क्या मर्ज है ?

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तो क्या मोदी भारत के सॉफ्ट स्टेट की पारम्परिक छवि तोड़ रहे हैं ,क्या मोदी अपने तमाम पूर्वर्ती प्रधानमंत्री से अलग हैं ? यकीन मानिये जवाब हाँ में ही मिलेगा।  दुनिया भर की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिश्केक दौरे पर थी । एस सी ओ समिट में काफी अरसे के बाद भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री एक मंच पर दिखे थे लेकिन यह सवाल सबके जेहन में था कि क्या प्रधानमंत्री मोदी आज भी वही हैं जो वे 2015 में थे। दुनिया ने यह भी देखा पी एम् मोदी ने हाथ मिलाने तो दूर वज़ीरे आज़म इमरान खान से नज़र मिलाना भी उचित नहीं समझा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस दौरे में पाकिस्तान के एयर स्पेस को इग्नोर करके यह संकेत पहले दे दिया था। 2014 के अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बुलाना ,अफगानिस्तान दौरे के बीच लाहौर पहुँच कर नवाज़ शरीफ के फैमिली फंक्शन में शरीक होना। लेकिन मोदी तो मोदी हैं उन्हने किर्गिस्तान जाने के लिए पाकिस्तान को कोई जेस्चर दिखाने का मौका नहीं दिया उन्होंने अपनी रूट बदल ली। " पाकिस्तान को अपनी मौत खुद मरने दो ,हमें पाकिस्तान पर अपना वक्त अब बर्बाद नहीं करना है " पी एम…

बिहार में बहार है क्योंकि यहाँ आज हज़ारों कुमार हैं

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सैकड़ो पढ़े लिखे नौजवानो ने अपने अपने इलाके में अपने आईडिया से क्रांति लाने की पहल की है जिसका परिणाम जमीन पर दिखने लगा है.... शराबबंदी के बावजूद बिहार का राजस्व जी एस टी के कारण 23 % बढ़ा है। 14 वर्ष पहले का एक फेल्ड स्टेट आज बीमारू स्टेट की सूची से अपने को बाहर करके टॉप 5 की सूची में जगह बना लिया है। ऐसा दावा जे डी यू के एक प्रवक्ता का है। यानी नीतीश जी के राज में बिहार ने काफी तरक्की की है ऐसा उनका मानना है । हालिया चुनाव के नतीजे जे डी यू को उत्साहित भी करने वाले हैं। लेकिन क्षेत्रीय और जातीय पार्टियों के लगातार सिकुड़ते जनाधार के बीच नीतीश कुमार की सियासत भी सवालो को घेरे में है। उत्तर भारत के परिवार वाली पार्टियों के बीच शायद नीतीश जी अकेले शख्स हैं जिन्हे अपनी व्यक्तिगत छवि की चिंता पार्टी से ज्यादा है ,हर समकालीन नेतृत्व से उनके टकराव को इसी सन्दर्भ में देखा जा सकता है। समाज के हर वर्ग में मोदी सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से और अपनी छवि को लेकर नीतीश कुमार क्या वाकई चिंतित हैं ? क्या बिहार के विकास से ज्यादा नीतीश कुमार अपनी सियासत को लेकर ज्यादा सजग हैं। लेकिन इस सवालों के बीच आ…