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इन जातिवादी नेताओं से नक्सली क्या बुरे हैं

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देश में नक्सली हमलों का कहर जारी है .लेकिन सरकार यह तय नहीं कर पायी है कि नक्सली देश के दुश्मन है या दोस्त .देश के प्रधान मंत्री कहते है कि नक्सली आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है .लेकिन गृह मंत्री नक्सली के खिलाफ असफल अभियान छेड़ने के  वाबजूद यह कहने से कतराते है कि नक्सली देश का दुश्मन है .यानी यह तय करने में असमर्थ है कि इस मुल्क का, इस मुल्क के प्रगति का कौन दुश्मन है कौन दोस्त? .नक्सली बन्दूक के जोर पर व्यवस्था परिवर्तन की बात करते है .यानी देश के पिछड़े लोगों को ढाल बनाकर वो शासन पर कब्ज़ा करने की कोशिश मे लगे है .कही उनके समर्थन मे तो कही उनके विरोध में राजनीती का माहोल भी गर्म है .यानी ये बयान राजनीति में नफा नुकसान के आधार पर दिया जा रहा है .लेकिन जो लोग  सत्ता पर अपनी प्रभुसत्ता बनाये रखने के लिए देश को टुकड़े टुकड़े मे बाटने की कोशिश में लगे है वे हमारे राज  नेता के रूप मे स्थापित है .और हम यह पहचानने मे आज भी धोखा खा रहे है कि ये इस देश की प्रगति के दोस्त है या दुश्मन .यानी दुश्मन को पहचानने मे सरकार भी धोखा खा रही है और हम भी . बाबा भीमराव आंबेडकर ने कहा थ...

कश्मीर: पत्थर युग मे लौटने की कबायद तेज

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घर से ऑफिस निकले शफीक अहमद शेख को नहीं पता था कि अगले चौक पर कुछ पत्थर वाले उनका इंतजार कर रहे है .जैसे ही उनकी मिनी बस मगरमाल बाग पहुची एक पत्थर सीधे बस की ओर उछाला गया .ओर सीधे चोट शेख के सर पर लगी .कुछ ही पल में शेख सदा सदा के लिए खामोश हो गए . बारामुला के अब्दुल अजीज अपने ११ दिन के बच्चा इरफ़ान को हस्पताल ले जा रहे थे लेकिन उन्हें हस्पताल नहीं जाने दिया गया एक उत्साही नौजवान ने एक पत्थर उछाला और पल भर में वह दिन का बच्चा दम तोड़ गया .यानी पत्थर के खेल के शौकीन कश्मीर का नौजवान पत्थरों से लोगों की जान ले रहे है लेकिन सियासत ऐसी कि हुकूमत पत्थर वाजों को रोक नहीं पा रही है और सियासी नेता इसे नौजवानों की हतासा मान रही है .यानि पत्थर युग में पहुच चूका कश्मीर एक नयी संस्कृति को अपना लिया है . हर जुम्मे के दिन पत्थर वाजी का यह आम नज़ारा होता है .श्रीनगर के जामा मस्जिद के इलाके ,पुराने बारामुला और सोपोर मे अचानक हर शुक्रवार को चौराहे पर एक महफ़िल सजाई जाती है जिसमे उत्साही नौजवानों की टोली हाथ मे पत्थर लिए पुलिस कर्मी को आगे बढ़ने के उकसाती है .इनका नारा होता है जीवे जीवे पाकिस्तान ,हम क्या ...

भारत का नक्सली और इंडिया का आई पी एल

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झारखण्ड के पूर्व विधानसभा स्पीकर इन्दर सिंह नामधारी ने कभी राज्य की सरकार को यह सुझाव दिया था कि एक साल तक झारखण्ड मे सारे विकास के काम रोक दिए जाय .सरकार और मीडिया मे इसका माखौल उड़ाया गया था . नामधारी जी की यह दलील थी की आदिवासी इलाके में विकास के नाम पर जो पैसे का बंदर बाट हो रहा है उसमे सबसे ज्यादा फायदा नक्सालियों को ही हो रहा है .सरकार की हर योजना में नक्सलियों का ३० फिसद देना तय तय है  .यानि नक्सली आन्दोलन को बढ़ने से रोकना है तो तो उसके फंडिंग के इस सुलभ तरीके को रोकने होंगे .सरकारी पैसा ,सरकारी हथियार लेकिन नक्सलियों के निशाने पर वही सरकार .यानी पैसे उगाहने के लिए नक्सलियों ने कमोवेश वही प्रबंध किया है जो तरीका आई पी एल के धुरंधरो ने राजनेताओ के साथ मिलकर किया है . कभी आई पी एल के बारे मे गृहमंत्री चिदम्बरम ने कहा था कि कुछ चलाक लोगों ने क्रिकेट को मनोरंजन के चासनी मे डाल कर इसे एक फ़ॉर्मूला बना दिया है .लेकिन नक्सलियों के कुसल प्रबंधन को समझने मे वे अब तक नाकाम रहे है . दंतेवाडा नक्सली हमले से आह़त गृह मंत्री ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की...

गृह मंत्री चिदम्बरम की माया कांग्रेस और बीजेपी पर भारी

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"बक स्टॉप आट माय डेस्क " यह उस गृह मंत्रालय के लीडर का बयान था जहाँ यह कभी रिवायत नहीं थी .छत्तीसगढ़ के दंदेवाडा से भी भयानक हमले इस मुल्क पर हुए है .आतंकवादी हमले मे एक एक दिन में २०० से ज्यादा लोग मारे गए है लेकिन गृह मंत्री  कभी भी इसकी जिम्मेदारी लेने आगे नहीं आये .कभी कहा गया हर जगह सुरक्षाबल मुस्तैद करना संभव नहीं है  . तो कभी कहा गया राज्य सरकारों या फिर आला पुलिस ऑफिसर को ख़ुफ़िया जानकारी पहले ही दे दी गयी थी .यानि हर बार पूर्वर्ती गृह मंत्री ने अपने को बेदाग़ साबित किया .लेकिन ऐसा क्या हो गया कि ७६ सी आर पी ऍफ़ के जवानों की न्रिशंश मौत ने गृह मंत्री को हिला दिया था ?.ऐसा क्या हो गया कि हर बात पर गृह मंत्री का इस्तीफा मांगने वाला विपक्ष गृह मंत्री के साथ मजबूती से खड़ा था ?.दंतेवाडा के नाक्साली हमले के ठीक चार दिन पहले गृह मंत्री चिदम्बरम पशिम बंगाल के मुख्या मंत्री को नशिहत दे आये थे और उन्हें जिम्मेदारी दुसरे पर नहीं थोपने की सलाह दे रहे  थे .दंतेवाडा के इस हमले के बाद गृह मंत्री ऐसी ही नशिहत रमण सिंह को भी दे सकते थे और सी आर पी ऍफ़ की मौत की जिम्मेदारी राज्य सरकार ...

सुरक्षाबलों की मौत पर बंद करो ये घडियाली आंसू

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६ अप्रैल २०१०, दंतेवाडा . भारत के आतंक विरोधी अभियान का  कला दिवस .एक नहीं दो नहीं ७६ से ज्यादा सुरक्षा वल मौत के घाट उतार दिए गए .नक्सली आतंकियों द्वारा किया गया यह सबसे बड़ा हमला है . ४ अप्रैल २०१० ,कोरापुट ११ जवान नक्सली हमले के शिकार हुए .१५ अप्रैल २०१० मिदनापुर के एक कैम्प पर नाक्सालियो ने हमला करके २४ जवानों को शहीद कर दिया .इस साल के कुछ बड़े हमले की यह सूचि है .यकीन मानिये अबतक नक्सल विरोधी अभियान मे २००० से ज्यादा जवानों की मौत हो चुकी है .लेकिन भारत सरकार की यह जिद है कि यह लड़ाई राज्य सरकारे लड़ेगी केंद्र सिर्फ उन्हें सहायता देगा .सियासत ऐसी कि नक्सल के खिलाफ अभियान को राज्यों मे ऑपरेशन ग्रीन हंट का नाम दिया जा रहा है लेकिन हमारे गृह मंत्री ऐसे किसी ग्रीन हंट ऑपरेशन से इनकार करते है .दंतेवाडा के मुकरना जंगल मे नाक्सालियो ने बड़ी ही बेरहमी से ७६ जवानों को भून डाला और सुरक्षाबल नाक्सालियो पर एक गोली भी नहीं चला पाए .यानि नक्सालियों के अम्बुश का तोड़ अभी सी आर पी ऍफ़ के पास नहीं है .नक्सली के हर अम्बुश मे सी आर पी ऍफ़ के जवान फसते है .१०० -२०० के नक्सली गुरिल्ला की फौज ...

शिक्षा का अधिकार : सबसे बड़ा अप्रैल फूल

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आज से हर बच्चे को होगा शिक्षा का अधिकार ,यानी कोई भी बच्चा या उसके माता पिता शासन से अपने बच्चो की पढाई लिखाई की व्यवस्था करने को कह सकता है . और शासन की यह जिम्मेदारी होगी कि उन बच्चो के लिए स्कूल की व्यवस्था कराये .शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार होगा ,यानि इस अधिकार को लागू करवाना सरकार की वाध्यता होगी . लेकिन मेरे एक मित्र का फोन ने इस क्रन्तिकारी खबर पर एक ही पल मे पानी फेर दिया था . राजधानी दिल्ली मे जिस वक्त प्रधानमंत्री इस एतिहासिक फैसले का एलान कर रहे थे ठीक उसी वक्त दिल्ली से महज ६ कि मी दूर गाज़ियाबाद ,शालीमार गार्डेन के तकरीबन २५० अभिवाक /माता -पिता अपने अपने बच्चो के स्कूल से निकाले जाने की खबर के साथ घर वापस लौट रहे थे .उनकी यह चिंता है कि अब अपने बच्चो का दाखिला कहाँ दिलावे . बच्चो के माता पिता का कहना है कि उन्होंने खेतान पब्लिक स्कूल के अनाप सनाप फ़ीस बढ़ोतरी का विरोध किया था ,लेकिन प्रबंधन ने अपना सख्त रबैया अपनाते हुए विरोध के स्वर को ही दबा दिया .मै जिस इलाके की बात कर रहा हूँ उस इलाके की आवादी ३ लाख से ज्यादा होगी लेकिन इस पुरे इलाके मे एक भी सरकारी स्कूल नहीं है .ए...

पाकिस्तानी फौज का जिहाद और खामोश भारत सरकार

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कहते है कि पानी रे पानी तेरा रंग कैसा ,लेकिन यह पानी अगर सियासत के रंग में रंग जाय  तो क्या कहने . आतंकवाद के मामले को लेकर पानी पानी हुआ पाकिस्तान एक बार फिर पानी को लेकर अपने जेहादिओं को आगे किया है .पिछले दिनों लश्करे तोइबा के सरगना हाफिज़ मुहमद सईद ने पानी को लेकर भारत के खिलाफ जेहाद करने की बात की है .हाफिज़ मोहमद सईद का यह बयान पाकिस्तान के फोजी जनरल अशफाक कियानी के बयान के ठीक एक दिन बाद आया जिसमे उन्होंने भारत पाकिस्तान के बीच पानी को एक बड़ा मसला माना था . यानी पाकिस्तानी फौज के लिए अब कश्मीर का मामला अब अपना असर खो रहा है .पाकिस्तान के लोगों मे कश्मीर को लेकर अब उतनी दिलचस्पी नहीं है ,सो पाकिस्तानी फौज क्या बेचे तो उन्होंने पानी का मसला उठाकर लोगों के दुखते नब्ज पर हाथ रख दिया है . इन्डस वाटर ट्रिटी के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच एक अंतर्राष्ट्रीय आयोग मौजूद है जो दोनों देशो के बीच पानी के बटवारे पर अपना फैसला देता है .लेकिन पाकिस्तन वाटर कामिसन को नजरंदाज करके लश्करे तोइबा को आगे किया है .यानि पानी के मामले मे अब पाकिस्तान की हुकूमत बात नहीं करेगी बल्कि यह लड़ाई प...