नरेंद्र मोदी व्यक्ति/ संगठन के अलावा एक आईडिया है जो सीधे आमजनमानस को कनेक्ट करता है


" निर्मल भारत अभियान "और "स्वच्छ स्वच्छ भारत अभियान" में क्या फर्क है ? वही फर्क जो राहुल गाँधी और नरेंद्र मोदी में है। भारत को गंदगी से मुक्त कराने की इन दोनों स्कीमों का उद्देश्य भी एक ही था। लेकिन कांग्रेस की निर्मल भारत में सिर्फ कुछ हजार रुपयों का आश्वासन था जबकि पीएम मोदी ने खुद इसके लिए झाड़ू उठा लिया था। यानी स्वच्छाग्रही बनकर मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान को बिहैवियर चेंज का आंदोलन बना दिया। इस देश को समझने का दावा सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है। राहुल गाँधी इसका जिक्र अपने भाषणों में भी करते हैं लेकिन देश परिवर्तन के लिए आकुल है यह समझने में कांग्रेस पार्टी और राहुल ने भारी भूल की है। पीएम मोदी और राहुल की चुनौती भी एक जैसी है दोनों अपनी अपनी पार्टी की भीड़ और टीम में अकेले सेनापति हैं। दोनों पार्टियों में लीडरो को पाने की लालसा अधिक है। लेकिन राहुल गाँधी घर दुरुस्त करने के बजाय मोदी को हटाने के लिए अपनी पूरी जोर आजमाइश कर रहे हैं। यानी सत्ता सबकुछ ठीक कर देगी ऐसा कांग्रेस पार्टी सोचती है। जबकि मोदी मंत्री/मुख्यमंत्री के नाकामयाबी को नज़रअंदाज़ कर जनसंवाद को ही ब्रह्माश्त्र मान रहे हैं। और सत्ता की सीढ़ी भी।
कर्नाटका के चुनाव प्रचार में अगर अनुवादक को चुप कराकर आम जनता मोदी को हिंदी में अपना चुनावी भाषण देने के लिए प्रेरित करती हैं तो माना जाएगा कि देश के करोडो लोगों में मोदी से अपेक्षा ख़तम नहीं हुई है वो उनसे सीधा संवाद चाहती है ,जिसके फायदे भी हैं और नुकसान भी । स्टेट में बीजेपी मुख्यमंत्री परफॉर्म नहीं कर पा रहे है तो आलोचना सिर्फ मोदी की ही हो रही है।  इस देश में पैसे की कमी नहीं है इस दौर में योजनाएं पैसे के अभाव में फ्लॉप नहीं हो रही है बल्कि दिक्कत टीम मोदी के संवाद और इच्छशक्ति में है। जनमानस को योजनाओ से जोड़ने में टीम मोदी ने  चूक की है. कई मंत्रालयों की चर्चा मंत्री जी के सोशल मीडिया पर ज्यादा है ज़मीन पर कम।  चार साल में अगर 11 राज्य ओ डी एफ यानी खुले में शौच से मुक्त हो सकता है। 7 करोड़ शौचालय बन सकते है। माता पिता अपने बच्चो के डर से सड़क के किनारे और घर में कचरा के डब्बे ढूंढते नजर आ रहे हैं। बिहार के सबसे पिछड़े इलाके मधुबनी का रेलवे स्टेशन देश का न 2 खूबसूरत स्टेशन बन सकता है तो माना जाएगा कि टीम मोदी में कुछ उत्साही अफसरों ने योजना में जनभागीदारी बढाकर असंभव को संभव बनाया है।
राहुल गाँधी मोदी को टारगेट कर उन्हें चुनौती नहीं दे सकते  इसके लिए उन्हें मोदी टीम के मुकाबले एक बेदाग टीम देश के सामने लाना चाहिए।  जिनका सिर्फ सोशल मीडिया से सरोकार न हो बल्कि उनके पास जनभागीदारी के लिए पी एम् मोदी से बढ़िया आईडिया हो। यह जानना जरुरी है कि मोदी व्यक्ति/ संगठन के अलावा एक आईडिया है जो सीधे आम जनमानस को कनेक्ट करता है।  कुनबे जोड़ने और आलोचना से मोदी का कद छोटा नहीं होगा। 

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