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अगस्त 1, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तो क्या कश्मीर मसले का हल सिर्फ जनमतसंग्रह है ?

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गृह मंत्री पी चिदम्बरम शायद कश्मीर को लेकर ज्यादा चिंतित है .उन्हें इस बात का अफ़सोस है कि २००४ मे जो नौजवान यहाँ आई आई टी और आई आई एम् के लिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे वही नौजवान आज कश्मीर की आज़ादी की मांग  कर रहे है .यह एक बड़ा सवाल है कि पिछले वर्षों मे जिन इलाकों मे लोगों ने भारी तादाद मे शिरकत करके भारत के लोकतंत्र मे अपनी आस्था जताई थी आज उन इलाकों मे लोगों का भरोसा अलगाववादियों ने जीत लिया है .कश्मीर पिछले ६० दिनों से बंद ,हड़ताल और कर्फु की चपेट मे पूरी तरह अस्त व्यस्त है लेकिन कही से उजाले की किरण नहीं दिखाई दे रही है . पिछले जून महीने से अबतक कश्मीर मे ४० से ज्यादा नौजवान मारे गए है .सैकड़ो की तादाद मे लोग जख्मी हुए है . सरकार की ओर से यह दलील दी जा रही है १२०० से ज्यादा सुरक्षाबल घायल हुए है .यानि सरकार यह समझाने मे लगी है कि सुरक्षाबलों ने जब भी फायर खोला है वह उनकी मजबूरी रही है .सरकार की यह भी दलील है कि इन पत्थरबाजों के साथ आतंकवादी मिले हुए है .पत्थरबाजी की यह वारदात पाकिस्तान के इशारे पर हो रही है .अगर यह सब पाकिस्तान के इशारे पर हो रहा है तो फिर गृह मंत्री चिदम्बरम का य