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सबके राम ! अयोध्या की एक और अग्निपरीक्षा

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अयोध्या ! जिसे जीता या हराया न जा सके। लेकिन यह भी सच है कि इस अयोध्या नगरी को अपने धैर्य ,साहस,पराक्रम और शीलता के लिए बार बार अग्निपरीक्षा भी देनी पड़ी है। भारत की आस्था और संस्कृति के प्रतीक राम अपने जन्मस्थान अयोध्या के मंदिर में 500 साल के संघर्ष के  बाद ही पहुँच पाए। राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे के  जयघोष के साथ अमर बलिदानियों ,कारसेवकों की अटूट निष्ठा का व्रत और संकल्प के रूप में आज अयोध्या में राम लला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं। लेकिन मंदिर में चढ़ावा चोरी के नाम पर उठा सियासी बबंडर के बीच अयोध्या को  फिर अपनी निष्ठां और ईमानदारी की अग्निपरीक्षा से गुजरने को कहा जा रहा है।   राम मंदिर चंदा चोरी के बाद अयोध्या में एक बार फिर भक्तिमय वातावरण ने  कई सियासी लोगों को भावुक कर रखा है। राम मंदिर की जगह अस्पताल बनवाने वाले केजरीवाल अयोध्या में राम लला का दर्शन कर रहे हैं और कहते है मैं सबसे बड़ा सनातनी हूँ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव  को सीधे राम कृष्ण के वशंज बताये जाने लगा है  और पार्टी भर भर कर राम मंदिर के प्रति आस्था जता रही है। सपा...

इतिहास रचने जा रहे हैं PM मोदी ; नेहरू युग बनाम मोदी युग

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  नेहरू युग बनाम मोदी युग :इंडिया बनाम  भारत की कहानी  हजारों वर्षों के भारत की सभ्यता की कहानी में कई नायक आये और चले गए लेकिन कुछ ही नायकों  ने लम्बे समय तक लोगों के दिलों दिमाग में अपनी छाप छोड़ी । आज़ादी के बाद पंडित नेहरू प्रधानमंत्री बने और लम्बे समय तक देश पर छाप छोड़ा। जिसे लोग नेहरू युग भी कहते हैं।  प्रधानमंत्री मोदी 10 जून को पंडित नेहरू के बाद दूसरा कार्यकाल पूरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे  । पंडित नेहरू के बाद सत्ता में रहते हुए लगातार 3 बार चुनाव जीतकर इतिहास रचने वाले यह रिकॉर्ड भी मोदी ने अपने नाम कर लिया है ।यानी   प्रधानमंत्री मोदी 10 जून को प्रधानमंत्री पद पर 4399 दिनों का कार्यकाल पूरा कर लेंगे जबकि  जवाहरलाल नेहरू 4398 दिन तक पद पर रहे थे। लेकिन बात सिर्फ टेन्योर का नहीं है। नेहरू जी को जब भारत के भाग्य विधाता बनने का मौका मिला  तो  केंद्र से लेकर राज्यों तक एकक्षत्र शासन करने का सुअवसर भी  मिला था। राजनीतिक रूप से  उनके सामने कोई चुनौती नहीं थी। लेकिन नरेंद्र मोदी को सत्ता पिछले 20 वर्षों से गठबंध...

भोजशाला : क्यों सलमान खुर्शीद इसे अयोध्या नहीं मानते

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  भोजशाला :भारत की सभ्यता और संस्कृति को कोर्ट से मिली पहचान  (क्यों सलमान खुर्शीद इसे अयोध्या नहीं मानते ) 1947 के बाद आज के  भारत को जो लोग नेशन स्टेट मानते हैं उन्हें भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट के फैसले ने निराश  किया होगा । लेकिन भारत को एक प्राचीन सभ्यता और सविलिजेशनल स्टेट के रूप में जो जानते हैं उन्हें मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले ने आत्मगौरव और संतोष दिया होगा। न्याय होते देख कई पीढ़ियां भावुक हुई होगी।कोर्ट के फैसले ने उनका  भरोसा मजबूत किया है कि न्याय के लिए  भले ही संघर्ष लम्बा करना पड़ता है लेकिन अयोध्या में राम मंदिर भी बने और सनातन संस्कृति  की ज्ञान और विज्ञान के देवी सरस्वती के भोजशाला से सनातन संस्कृति की  पहचान सुनिश्चित हुई।   सरस्वती के वरद पुत्र और परमार कुलभूषण महाराजा  भोज का नाम  क्या भारत के पराक्रमी राजाओं के  इतिहास में दर्ज नहीं होना चाहिए था। लेकिन उनके महान थाती और धरोहर भोजशाला को कमाल मौला मस्जिद के विवाद में डालकर तक्षशिला ,विक्रमशिला और नालंदा जैसे ज्ञान विज्ञान केंद्र को खंडहर में तब्दील ...

बीजेपी के बंगाल जीत का नायक कौन !

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 बीजेपी के बंगाल जीत का नायक कौन ! क्या पश्चिम बंगाल का असेंबली चुनाव  भारत की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को  दुनिया के सामने लाया है ? बीजेपी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में सजे मंच इसकी गवाही देता  है। मंच पर उपस्थित बीजेपी के सबसे पुराने कार्यकर्त्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  कार्यकर्त्ता 98 वर्ष के माखनलाल  सरकार की मौजूदगी और प्रधानमंत्री मोदी के उन्हें  पांव छूकर प्राणम  कर भारत के संस्कार को स्थापित करना भी इस बात की गवाही देती है कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण के मूल मन्त्र ने बंगाल के समाज को एक विचारधारा से जोड़ने में अहम् भूमिका निभाई थी।   अंडमान में संघ के प्रचारक के रूप में सेवारत दिलीप घोष 2014 में जब बंगाल लौटे तो उन्होंने रामनवमी के अवसर पर पारंपरिक जुलूस निकालने की शुरुआत की। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया,कहा राम से बंगाल का कोई लेना देना नहीं है । प्रशासन ने इजाजत नहीं दी। दिलीप घोष ने कोर्ट के परमिसन से यात्रा निकाली तो सख्ती की गयी कि मुस्लिम इलाके से  यात्रा नहीं निकलेगी। ज...

तमिलनाडु में हिंदी: जनता के लिए जीडीपी है

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  तमिलनाडु में हिंदी : सियासत से दूर कारोबार के नजदीक  डियर टू टी लेस शुगर ! चेन्नई में हिंदी विरोध की ख़बरों को जेहन में बसाये मैंने मरीना बीच से बाहर एक टी स्टाल पर दो चाय मांगा था। चाय मिली लेकिन बगैर चीनी की। मेरे कुलिग ने कहा बढ़िया समझाए चीनी देना ही भूल गया। चाय वाला ने पूछा चीनी चाहिए ? मैंने कहा भाई बोला तो था लेस शुगर। उसने कहा सीधे कहो चीनी कम। मैं हंस पड़ा था। हिंदी विरोध के इस रहस्य को मैं दिन भर आज़माता रहा। होटल में खाना सर्व करने वाला वेटर तमिल बोलकर मेन्यू रखता था और हिंदी में आर्डर ले जाता था। ऑटो वाला बेधड़क आपके पास आकर पूछेगा कहाँ जाना। मुझे कुछ अटपटा सा लगता था कि राजनितिक दलों के चेन्नई ऑफिस में हिंदी में एक साउंड बाइट्स लेना मुश्किल हो जाता था लेकिन ऑफ द रिकॉर्ड हिंदी में बातचीत का जवाब आपको मिल जाता है।  ये कैसी राजनीति है जिसमे नेता आम लोगों को हिंदी का डर दिखा रहा है लेकिन जनता और कारोबारी हिंदी को स्टेट की जीडीपी मान रहा है। इस समय देश के अग्रणी राज्यों में तमिलनाडु जीडीपी को लेकर सबसे ऊपर है। 11 फीसदी की जीडीपी वाले कोस्टल स्टेट में व्याप...

ये बीजेपी हारती क्यों नहीं है ? सिर्फ जनता जानती है

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 ये बीजेपी हारती क्यों नहीं है ? सिर्फ जनता जानती है  पाकिस्तान के खिलाफ पीएम मोदी के ऑपरेशन सिंदूर ने सिर्फ पाकिस्तान के अंदर दहशत नहीं पैदा किया था बल्कि विपक्ष की सियासत का मनोबल भी तोड़ दिया था। दुनिया के लिए यह चौकाने वाला ऑप्रेशन था,पाकिस्तान के लिए उसके वजूद पर सवालिया निशान था कि उसके नुक्लिएर बम धरे के धरे रह गए और भारत ने 6 एयर बेस को तबाह कर दिया। पाकिस्तानी फौज के लिए सदमा था कि उसके सबसे बड़े दहशतगर्द फैक्ट्री मुरीदके और बहावलपुर को भारतीय सेना ने मलवे के ढेर में तब्दील कर दिया था। लेकिन जितनी शिद्दत  से पाकिस्तान अपना घाव छुपा रहा था उसका दर्द भारत के विपक्ष की सियासत में दिख रहा था। युद्द किया तो इतनी जल्दी ख़त्म क्यों कर दिया। इंदिरा जी की तरह पाकिस्तान को दो दुकड़े क्यों नहीं किया ,PoK क्यों नहीं लिया ,भारत के कितने विमान गिरे ,कितने जवान शहीद हुए बगैरह बगैरह सवाल मोदी सरकार पर दागे जा रहे थे।  कांग्रेस का यह सवाल सिर्फ इसलिए था कि इतिहास में सिर्फ एक आयरन लेडी इंदिरा गांधी ही हो सकती है।  48 घंटे के ऑपरेशन में पाकिस्तान घुटने के बल खड़ा था...

बेईमानों की प्रतिभा के सामने देश लाचार है ?

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बेईमानों की प्रतिभा के सामने देश लाचार है ? चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया बी आर गवई ने एक कांफ्रेंस में कहा कि मेरे बैच का टॉपर क्रिमिनल लॉयर बना। दूसरे नंबर पर आने वाला हाई कोर्ट का जज बना और मैं भारत का मुख्य न्यायाधीश बना  हूँ। ये उदहारण है कि रैंक से सफलता नहीं  सफलता मेहनत ,लगन समर्पण से मिलती है। लेकिन न्यायमूर्ति गवई के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि वंशवादी सियासत में ऐसी कौन सी प्रतिभा है कि लाखो करोडो रु की संपत्ति अर्जित करके ,दर्जनों भ्रष्टाचार के आरोप के वाबजूद देश का संविधान और कानून उन्हें कुछ बिगाड़ नहीं सकता।आखिर राजनेताओं में ऐसी कौन सी प्रतिभा लगन है कि वे हर बार बेदाग़ साबित होते हैं । ऐसा कौन से टैलेंट नेताओं के पास है कि एक झटके में सत्ता की सीढ़ी चढ़कर फाइव स्टार लाइफ स्टाइल अपनाकर  अपनी कई पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित कर जाते हैं।  ADR ने हाल में ही खुलासा किया है कि CM रेवंत रेड्डी ,एम् के स्टालिन पर सबसे ज्यादा आपराधिक मुकदद्मे दर्ज हैं।  हालाँकि विपक्ष सोनिया गाँधी ,राहुल गाँधी ,अखलेश यादव ,तेजस्वी यादव ,लालू यादव ,केजरीवाल ,हेमंत सोरेन ,अभिषे...