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तेरी कमीज मैली या मेरी कमीज

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गाँधी के साबरमती आश्रम में लगे कुछ अनमोल शब्दों के बीच एक पोस्टर पर नज़र रुकी। साबरमती आश्रम क्यों ? गाँधी जी कहते हैं "अहमदाबाद कारोबारियों का शहर है और आंदोलन के लिए धन यहाँ जुटाया जा सकता है ........ " . भारत की तस्वीर बदलने में गाँधी को धन की कितनी जरूरत पड़ी थी,ये कोई बहस का मुद्दा नहीं है क्योंकि लंगोटी वाले बाबा के पीछे देश का जनमानस खड़ा था। लेकिन आज के सन्दर्भ में राजनितिक दलों में धन के प्रति बढ़ी जिज्ञासा, ये सवाल जरूर खड़ा करता है कि क्या इस देश में भ्रष्टाचार अब कोई मुद्दा नहीं बनेगा ? भ्रष्टाचार के खिलाफ जनमानस को एकजुट करके नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने थे ,ईमानदार और कर्मठ राजनेता उनकी पहचान है । अरविन्द केजरीवाल अन्ना को सीढ़ी बनाकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए लेकिन डी राजा ,कनिमोझी आज जश्न मना रहे हैं तो रोबर्ट बाड्रा पी एम मोदी को ललकार रहा है। रही सही कसर राहुल गाँधी ने पूरी कर दी और वे अब भ्रष्टाचार के तमाम आरोप को ही झूठ बता रहे हैं। तो क्या 2017 के आखिरी महीने तक लोगों ने कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को भुला दिया है और यह बात राहुल गाँधी