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सितंबर 14, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इस तस्वीर में शायद कोई आपका नहीं होगा ....

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शनिवार का दिन ऑफिस से आज ६.३० बजे ही निकलने का मौका मिल गया था । मन में ढेर सारे प्रोग्राम थे ,कहीं बाहर तफरी करने का मूड था .... अचानक पटना से प्रशांत का फोन आया ... कहाँ हो ? मैंने कहा कनौट प्लेस पहुँचने वाला हूँ ॥ उसने कहा उधर मत जाना! दो -तीन ब्लास्ट हो गए हैं । मैं तब तक कनौट प्लेस पहुँच चुका था । मन में एक सवाल आया घर चलूं या मौके पर जाऊं ? तब तक घर से भी फोन आ चुका था कहाँ हो ? आप ठीक हो ? यही सवाल मेरे सारे चिर परिचित से आ रहे थे । मेरे साथ खड़े लगभग हर के मोबाइल बज रहे थे और हर से यही सवाल पूछे जा रहे थे । घर परिवार के लोग अपनों के सकुसल जान कर निश्चिंत हो रहे थे । कमोवेश यही निश्चिन्तता सरकार के साथ भी थी । चूँकि ये सीरियल बोम्ब धमाके राजधानी दिल्ली में हुए थे जाहिर तौर पर होम मिनिस्टर से लेकर आला अधिकारीयों को घटना स्थल पर आना जरूरी था , लेकिन मैंने किसी चेहरे पर कोई तनाव या सिकन नहीं देखा ... शायद इसलिए भी कि पाटिल साहब के गृह मंत्री रहते हुए ११ बड़े सिलसिलेवार धमाके हुए है जिसमे अब तक ३००० से ज्यादा लोग मारे गए है .५००० से ज्यादा लोग जख्मी हुए जाहिर है इस हालत में कोई