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देश ,काल और परिस्थिति से अनजान राहुल गांधी : ये तारीख़ सही करने का वक्त है

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प्रिय राहुल गाँधी जी , आप भी न ! नहीं बदलने की कसम ले रखी है। नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री मोदी पर आपके तीखे हमले से लबालब भरा हुआ मैं लखनऊ से दिल्ली वापस आ रहा था। एयरपोर्ट के रास्ते में पड़ने वाले एटीएम बूथ  पर  सर्दी के मौसम में लगी लाइन देखकर मैंने अपने बुजुर्ग ड्राइवर ताज मोहम्मद से पूछा भाई ! आपका क्या हाल है ? नोटबंदी में ? उनका जवाब था भाई जान ,अपना तो सब कुछ लाइन में लगकर ही मिलता है ,, हमें क्या चिंता ,चिंता वो करे जो अपना काला धन घर में रखा था अब  बैंक में जमा करवाने के लिए किराये पर  लोगों को लाइन में खड़ा किये हैं। गरीबों के  सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता  है…  धन्ना सेठ चोरों को अब डर लगने लगा है..  ताज साहब भारत की गरीबी पर एक संक्षिप्त भाषण मुझे सुना गए। ताज मोहम्मद की आवाज मेरे कानों फिर गूंजने लगी है जब आपने कश्मीर पर धारा 370 और तथाकथित बढ़ी हिंसा को लेकर  मोदी सरकार को घेरने की सियासी पहल तेज की है। लेकिन अब मैं इस बात से आश्वस्त हूँ  कि बूढी सेठानी (सोनिया जी )को दुबारा गद्दी क्यों संभालनी पड़ी है। राहुल जी ,जो सोच  लखनऊ के ताज मोहम्मद की  थी जिसे समझने में आप