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सहिष्णुता ,धर्मनिरपेक्षता सिर्फ सियासी जुमले है ?

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महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बार बार सहिष्णुता  और अनेकता में एकता की महान परम्परा को याद दिलाकर यह बताने की कोशिश कर रहे है कि हम इस देश की मौलिक पहचान को भुला रहे है। यही बात हमारे कुछ इतिहासकार ,कुछ अकादमी सम्मान से सामनित लेखक ,वैज्ञानिक ,अभिनेता भी अपना सरकारी तमगा लौटाकर  बताने की कोशिश कर रहे हैं कि इसके लिए सिर्फ मोदी सरकार जिम्मेदार है। लेकिन इन तमाम बहस के बीच जम्मू कश्मीर सरकार का हलफनामा हमारे सेक्युलर सोच और सहिष्णुता की अवधारणा और निष्ठां पर सवालिया निशान लगा देता है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा देकर जम्मू  कश्मीर सरकार ने माना है कि साढ़े चार लाख निर्वासित पंडितो में सिर्फ एक परिवार अबतक कश्मीर लौटा है। २५ वर्षो से अपने ही मुल्क में निर्वासित जीवन जी रहे लाखो परिवार अगर घर लौटने की हिम्मत नहीं जुटा रहा है तो माना जायेगा कि सहिष्णुता ,धर्मनिरपेक्षता सिर्फ सियासी जुमले है ,इस मुल्क की सियासत इसके लिए कभी चिंतित नहीं हुई है। यह वही कश्मीर है जहाँ महात्मा गांधी को आशा की किरण दिखाई दी थी। यह वही कश्मीर था जहाँ भारत -पाकिस्तान विभाजन के दौर में भी हिन्दू