पोस्ट

दिसंबर 23, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गुरुग्राम ,गली न-5 का चरवाहा विद्यालय ( विद्यादान की अनूठी परंपरा की साक्षी )

इमेज
शहरों की भागम भागम जिंदगी के बीच ,दिन रात निगेटिव ख़बरों के बौछार के बीच कभी दिल को सकून लगने वाली चीजें कम ही दिखाई देती है। लेकिन  गुरुग्राम के यूनिटेक हाउस के नजदीक सिलोखरा गांव के गली न. 5 की हलचल एक नए भारत की कहानी कहती है। शहर के ऑटो चालक ,माली ,गार्ड ,रेडी -पटरी वाले परिवरो के सपनो की  बुनियाद यह विश्वास है कि सिर्फ शिक्षा से जीवनस्तर बेहतर हो सकते हैं सरकारी अनुदानों और कर्जमाफी से नहीं  । सिर्फ शिक्षा -ज्ञान ही मानव मात्र के कल्याण का साधन हो सकता है। सिलोखरा गांव की  14 साल की  उमकी प्राइमरी एजुकेशन के बाद घर बैठ गयी थी ,छोटे मोटे काम करने को अभिशप्त हो गयी थी।  मजदूर पिता को किसी ने लोटस पेटल फाउंडेशन का नाम बताया। अगले दिन उमकी अपने स्कूल में कमल की तरह खिल  रही  थी।" प्रतिस्ठान लर्निंग" में उमकी ने शिक्षा ली और 12 वी  करने के बाद इसी लोटस के जरिये आई टी आई की ट्रेनिंग ली और आज अपने माँ बाप के सपनो को पूरा कर रही है।  स्कूल  ड्रॉपआउट  ऐसे दर्जनों बच्चो ने इस स्कूल से शिक्षित होकर गुरुग्राम के कई कॉर्पोरेटकंपनी में अपनी काबिलीयत से नौकरी पाई है। तक़रीबन 600 ब

अटल थे अटल हैं और अटल रहेंगे...

इमेज
अटल थे अटल हैं और अटल रहेंगे    .गीता का यह उपदेश  ' न दैन्यं न पलायनम् ' (   दीनता नहीं चाहिए , चुनौतियों से भागना नहीं , बल्कि जूझना जरूरी है ) यह उनके जीवन का दर्शन था। देश उनके जन्म दिन को सुशासन दिवस के रूप में मना रहा है लेकिन यह जानना भी जरुरी है क्यों अटल थे अटल हैं और अटल रहेंगे। उनके साथ 50 वर्षो तक साया की तरह रहे शिव कुमार जी बताते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर अटल जी काफी संजीदा थे। उनकी इच्छा थी कि जनम भूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो। लेकिन सोमनाथ से अयोध्या की आडवाणी जी की रथ यात्रा का प्रस्ताव कार्यकारिणी में आया तो अटल जी ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा इससे विरोध बढ़ेगा। लेकिन कार्यकारिणी ने एक स्वर से रथ यात्रा का प्रस्ताव पारित किया। शिव कुमार जी बताते हैं कि जब आडवाणी जी की यात्रा को हरी झंडी दिखाने खुद अटल जी पहुंचे और भव्य यात्रा की शुरुआत की हरी झंडी दिखाई। उत्सुकतावस् उन्होंने अटल जी से पूछ लिया आपने जब विरोध किया था तब हरी झंडी दिखाने क्यों आये। अटल जी का जवाब था वह मेरा फैसला था और रथ यात्रा पार्टी का फैसला है ,उसे मानना मेरा कर्तव्य और धर्