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प्रधान मंत्री मोदी के बहाने देश से खिलाफत क्यों ?

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इंडिया और पाकिस्तान को लेकर आज भी कुछ नहीं बदला। हुकुमरानों के बदलने का सिलसिला लगा रहता था लेकिन आर -पार की पॉलिसी बरक़रार रही। हर दिन कश्मीर से ताबूत में आने वाले शहीदों के शव और सरहद पार के बम बंदूके देखने के मानो हम अभ्यस्त हो चले थे ।हालांकि इनदिनों कुछ बदलाव हुए हैं, कश्मीर की जियोग्राफी बदल गयी है और देश की मीडिया और सम्पादक कुछ ज्यादा क्रांतिकारी  हो  गए हैं। यहाँ मीडिया में कुछ बड़े सम्पादकों की जिद है कि उनके बगैर पूछे कश्मीर में इतना बड़ा चेंज कैसे हुआ ? उधर पाकिस्तान में हुकुमरान की जिद है कि पाकिस्तानी मीडिया पाकिस्तान फौज के कश्मीर पॉलिसी पर कोई टिपण्णी नहीं करे। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी ने बाकायदा फरमान जारी कर टीवी चैनलों को आगाह किया है कि कश्मीर डिस्कशन में कोई भी व्यक्ति /पत्रकार सरकार की पॉलिसी की निंदा नहीं कर सकता। कश्मीर पर इमरान खान  और फौज के रबैये को मजम्मत करने वाले कई सीनियर जर्नलिस्ट  को जेल की हवा भी खानी पड़ी है। भारत में अपने को लोकतंत्र का चौथा खम्भा मान चुके कुछ सम्पादकों को इस बात की फिक्र नहीं है कि बदले हालात में कश्मीर मे