अब मैं कन्हैया हो गया हूँ......

मै हूँ अन्ना ,मैं हूँ केजरिवाल अब मैं कन्हैया हो गया हूँ। .. लेकिन मैं कभी ललितपुर का लोटन नहीं बनना चाहता हूँ और न ही  बुंदेलखंड और  नागपुर  के मंगतू राम जैसे हज़ारो किसानो में मेरी कोई दिलचस्पी है जो महज पचास हज़ार कर्ज न चुकाने के कारण आत्महत्या कर लेता है..मैं आज कन्हैया इसलिए हूँ कि वह मोदी को गरिया रहा है कल मैं केजरीवाल इसलिए था क्योकि वह मनमोहन सिंह को चोर कह रहा था....मीडिया में आज सिर्फ"" आज़ादी" की खबरे छप रही है मानो कुछ संपादको को गांधी के रूप में कन्हैया मिल गए  हो और वर्षो से गुलामी के बेड़ियों में जकड़े टीवी के स्वनामधन्य संपादको को खुली हवा में साँस लेने का मौका मिल गया हो। मीडिया में कही मोदी के समर्थन में जे एन यु के अति उत्साहित छात्रों को राष्ट्रद्रोही बताया जा रहा है तो कही  कुटिल संपादको की फौज जिन्हे मोदी और उनकी सत्ता से चिढ है वे इसे hight ऑफ़  इंटॉलरेन्स बता रहे है..
. एक गरीब माँ का बेटा कन्हैया जिसे आज मीडिया स्टार बता रहा है और लोगों को मानने के लिए विवश भी कर रहा है..कभी केजरीवाल को बेईमान तंत्र के सामने कठोर व्रती ईमानदार पेश करके मीडिया एक नयी उम्मीद का छदम माहोल बनाता है। . . ठीक वैसा ही गरीब माँ का बेटा मोदी अपने संघर्ष और मीडिया \सोशल मीडिया पराक्रम से आज देश का प्रधानमंत्री बन गए है.. लेकिन इस देश के गरीबो ,बेरोजगारो की हालात में कोई तबदीली नहीं आई। लेकिन इस सियासत को समझना जरुरी है कि पत्नी सीमा चिस्ती बतौर संपादक इंडियन एक्सप्रेस में कन्हैया के भाषण का अंग्रेजी अनुवाद छाप रही है और पति सीताराम येचुरी कन्हैया को बंगाल के इलेक्शन में स्टारप्रचारक बना रहे है
.केजरीवाल के चाटुकार आज संवैधानिक सत्ता की नई परिभाषा गढ़ रहे है   तो मोदी जी  जुमले और नित नयी योजनाओ के साथ विकास का दिवा स्वप्न दिखा रहे है .वो शायद भूल रहे है कि कुछ लोगो को उपकृत करने के लिए इस देश ने उन्हें प्रधानमंत्री नहीं चुना है। वे देश को एक नयी दिशा देने के संकल्प लेकर आये थे।  मीडिया अगर कांग्रेस का नहीं हुआ तो किसी का नहीं हो सकता इस बात की चिंता किये बगैर प्रधानमंत्री मोदी  कुछ तब्दीली का एहसास कराएँगे तो बगैर अमित शाह और स्मृति ईरानी,राजनाथ सिंह ,अरुण जेटली  के कई चुनाव जीत जायेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो मीडिया जैसे यू पी ए टू पर हावी था वैसा ही हावी होने की कोशिश एक बार फिर करेगा। .. 
 आज का मीडिया देश की मूल समस्या से लोगों को और सरकार को भटका रहा है..... देश के बंज़र हो रही धरती ,मर रहे किसानो और बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर संसद को बहस के लिए कम्पेल किया जा सकता है लेकिन कुछ मुठी भर बैमानो के साजिश के कारण बहस का मुद्दा टॉलरेंस हो गया है,,,बहस कन्हैया की आज़ादी को लेकर हो रही है बहस कन्हैया और उमर  खालिद के बहाने  जे एन यू की सुचिता की  हो रही है । "आज़ादी का   मतलब देश के उन किसानो से पूछा जाना चाहिए जिसे इस देश का भ्रष्टतंत्र हरदिन आत्महत्या के लिए उकसा रहा है ...... .  . 
" जिस खेत से दहक़ाँ को मय्यसर ना हो रोज़ी ,
उस खेत के हर खोशा ए गन्दुम को जल दो। 
उठो मेरी दुनिया के ग़रीबो को जगा दो। .इक़बाल 

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