तेरी कमीज मैली या मेरी कमीज


गाँधी के साबरमती आश्रम में लगे कुछ अनमोल शब्दों के बीच एक पोस्टर पर नज़र रुकी। साबरमती आश्रम क्यों ? गाँधी जी कहते हैं "अहमदाबाद कारोबारियों का शहर है और आंदोलन के लिए धन यहाँ जुटाया जा सकता है ........ " . भारत की तस्वीर बदलने में गाँधी को धन की कितनी जरूरत पड़ी थी,ये कोई बहस का मुद्दा नहीं है क्योंकि लंगोटी वाले बाबा के पीछे देश का जनमानस खड़ा था। लेकिन आज के सन्दर्भ में राजनितिक दलों में धन के प्रति बढ़ी जिज्ञासा, ये सवाल जरूर खड़ा करता है कि क्या इस देश में भ्रष्टाचार अब कोई मुद्दा नहीं बनेगा ? भ्रष्टाचार के खिलाफ जनमानस को एकजुट करके नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने थे ,ईमानदार और कर्मठ राजनेता उनकी पहचान है । अरविन्द केजरीवाल अन्ना को सीढ़ी बनाकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए लेकिन डी राजा ,कनिमोझी आज जश्न मना रहे हैं तो रोबर्ट बाड्रा पी एम मोदी को ललकार रहा है। रही सही कसर राहुल गाँधी ने पूरी कर दी और वे अब भ्रष्टाचार के तमाम आरोप को ही झूठ बता रहे हैं। तो क्या 2017 के आखिरी महीने तक लोगों ने कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को भुला दिया है और यह बात राहुल गाँधी जान चुके हैं ? तो यकीन मानिये 2018 में सोशल मीडिया देश में एक नए राजनीतिक बदलाव का माहौल बनाएगा जिसका मुद्दा तेरी कमीज मैली या मेरी कमीज ही रहने वाला है।

नोटबंदी से लेकर डिजिटल पेमेंट और "आधार" भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी मुहीम मानी जा सकती थी लेकिन यह एक प्रभावकारी स्टेप क्यों नहीं बना ? यह एक बड़ा सवाल है। क्या इस देश का सिस्टम " चलता है " के अपने आदर्श को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
मैक्सिमम गवर्नेंस और मिनिमम गवर्नमेंट गुजरात के विकास का आधार हो सकता है तो यह बात पुरे देश में क्यों नहीं लागु हो सकती। क्या इस देश ने अपने लिए ऐसा सिस्टम बनाया है जिसमे जनता से पूरी अपेक्षा है लेकिन जनता अपने राजनेता और सिस्टम से कोई अपेक्षा नहीं करे।

विविधता से भरे इस देश में लालू जी के जेल को भी बलिदान बताया जाता है। भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद शशिकला का भतीजा अपने को जयललिता का उत्तराधिकारी बताता है। आदर्श घोटला के आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चौहान अपने को अदालत में पाक साफ़ साबित कर लेते हैं। वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों की एक लम्बी लिस्ट है लेकिन उन्हें गंगा स्नान करके पाप मुक्त होने का बरदान प्राप्त है।
लेकिन यह चुनौती पी एम मोदी और देश के लिए है। वर्षों बाद इस देश को एक ईमानदार और कर्मठ राष्ट्रीय नेता मिला है जिसपर लोगों की आस्था कमोवेश आज भी बरक़रार है। 2014 -2017 के सभी चुनाव में लोगों ने पीएम मोदी को सामने रखकर ही वोट किया है ,2018 के 8 राज्यों में मोदी फैक्टर ही चुनाव का मुद्दा होगा यह बात भी तय है। यही वजह है कि विपक्षी एकता की बात को नकारते हुए राहुल गाँधी सिर्फ कांग्रेस को इस लड़ाई में रखना चाहते हैं। इस गेम में उन्हें बगैर कुछ मिहनत किये भारी जनसमर्थन का भरोसा दिख रहा है। वे वही लोग हैं जिन्होंने भ्रष्टाचार के कारण कांग्रेस को हराया था वे हताशा में कांग्रेस की तरफ आ सकते हैं ये कांग्रेस पार्टी का विश्वास है। लेकिन 2018 मोदी सरकार के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है अगर "ये चलता है " नहीं रुका तो देश को भ्रष्टाचार के दलदल से निकलना मुश्किल है। नववर्ष की शुभकामनाओ के साथ : विनोद मिश्रा

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