प्रधानमंत्री बनने के लिए पप्पुओं में जंग

मुंबई हमले को लोग अबतक भूल गए होते । लेकिन इस देश का मीडिया उसे भूलने नहीं देता। ४० दिनों तक पाकिस्तान ने हमारे नेताओं को थकाया कि अजमल आमिर कसाब का पाकिस्तान से कोई सरोकार नहीं है । अब कह रहा है कि भारत की कमजोर सूचना के आधार पर नॉन स्टेट ऐक्टर को ढूंढा जा रहा है । पाकिस्तान के बयान से खुश हमारे विदेश मंत्री ने कहा कि अगर पाकिस्तान उनपर करवाई अपनी अदालत में भी करता है तो हमें कोई एतराज नहीं है । ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिल्बंद ने ठीक एक दिन पहले भारत आकर हमें बता गए थे कि पाकिस्तान की अदालत में भारत को न्याय मिल सकता है । और वहां की न्यायपालिका के बारे में ढेर जानकारियां बाट गए थे। हो सकता हो की राहुल के साथ अमेठी जाने की हड़बड़ी में वे डेनिअल पर्ल और पाकिस्तान के साबिक चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी के वाकये को वो भूल गए हों । लेकिन मुंबई हमले और कश्मीर मसले को जोड़कर उन्होंने हमारे नेताओं को यह संदेश दे दिया कि अगर पाकिस्तान के मामले में भारत अमेरिका और इंग्लॅण्ड का सहयोग चाहता है तो उसे कश्मीर के मामले में उसकी दखल को माननी होगी । यानि कुलमिलाकर देखें तो मम्मी की बदौलत पाकिस्तान को हम धमकाने चले थे ,अब वही मम्मी हमें नशिहत दे रही है । इस तरह भारत सरकार की पिछले ५० दिनों की कबायद टीवी चैनलों की टी आर पी भले ही बढ़ा दिए हों ,लेकिन देश को जस्टिस दिलाने निकले हमारे राजनेताओं ने इन दिनों मुंबई हमले को भुला कर प्रधानमंत्री बनाने की कबायद तेज कर दी है । भारत सरकार के संकटमोचक मंत्री राहुल गाँधी में प्रधानमंत्री की छवि देखते हैं । प्रणव मुखर्जी ने यह छवि देखने में काफ़ी देर लगा दी । इससे पहले अर्जुन सिंह ,दिग्विजय सिंह ,सलमान खुर्शीद जैसे दर्जनों लीडर राहुल गाँधी को प्रधान मंत्री बनाने की पहल कर चुके है । यानि हमारे प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को कांग्रेस पार्टी का समर्थन नही है और न ही उनसे कुछ अलग कर दिखने का नेताओं को भरोसा है , बल्कि सोनिया जी के समर्थन से वे सरकार चला रहे है । ख़ुद प्रधानमंत्री ने भी कई बार राहुल में प्रधानमंत्री बनने की काबिलियत देखी है ।हमारी सरकार के सामने सबसे बड़ी चिंता आगामी चुनाव है तो अगला प्रधानमंत्री । बाकि तमाम मुद्दे गौण हो गए हैं । पाकिस्तान सियासी तौर पर अपना बढ़त ले चुका है ।
सरकार को नींद से जगानी वाली विपक्षी पार्टियों में भी मुद्दा अगला प्रधानमंत्री ही है । पाकिस्तान के मामले में सरकार कुछ नही कर रही है तो विपक्षी दलों के शडो मंत्रिमंडल क्या कर रहे है । प्रधानमंत्री के घोषित उम्मीदवार लाल कृष्ण अडवाणी ब्लॉग लिखने के वजाय अगर पाकिस्तान के मसले पर अपनी रुख से दुनिया को आगाह करते तो शायद इस मुल्क के लिए बेहतर होता । यही वजह है कि इंडिया इंक ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेन्द्र मोदी को सबसे बेहतर उम्मीदवार कहा तो मानो बीजेपी में भूचाल आगया हो । आखिरकार नरेन्द्र मोदी को कहना पड़ा कि अडवानी जी उनके नेता है और वही देश का नेतृत्वा कर सकते हैं । एक प्रधानमंत्री के उम्मीदवार सुश्री मायावती भी है जिनका जन्मदिन का उत्सव ही सबसे बड़ी उपलब्धी है ।मायावती के लिए यह आर्थिक विकास दिवस है , शायद भारत की तस्वीर भी इस दिवस से बदल सकती है यह अलग बात है कि उनके उत्साही कार्यकर्त्ता ,आर्थिक विकास में कुछ लोगों की जान ले सकते हैं । कुल मिलकर प्रधान मंत्री के लिए जो चेहरे हमारे सामने है उनका मूल मंत्र जुगाड़ से है । अगर जुगाड़ से ये प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो हमारे पप्पू क्यों नही ।
अमिरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लोगों को भरोसा दिया चेंज का उसने कहा कि वे सबसे बेहतर उम्मीदवार है और लोगों ने अपना समर्थन दिया । हमारे सामने जो चेहरे हैं वे पिटे हुए मोहरे है । आलाकमान के पास कई डार्क होर्से है जिन्हें वे देश के सामने ला सकते है और देश को बता सकते हैं कि ये प्रधानमंत्री हैं और हो सकता है कि पप्पू धोखा खा जाय । लेकिन इस देश को पप्पुओं के बीच से प्रधानमंत्री चाहिए जो उसे चेंज का भरोसा दे सके ,सुरक्षा का एहसास दे सके । खास कर उसके स्वाभिमान को लौटा सके । इस देश को सीईओ की जरूरत नही है क्योकि देश कोई कारपोरेट कंपनी नही है । यह लाखों करोडो लोगों की संप्रभुता और सम्मान का सवाल है ।देश का मतलब संप्रभुता से होता है सीमा से नही । लाइजन करने वाले लोगों ने इस देश का नेतृत्व अपने हाथ में जबरन छीन लिया है । इस हालत में प्रधानमंत्री पद के लिए भले ही पप्पुओं के बीच जंग हो लेकिन प्रधानमंत्री वही होगा जिसका जुगाड़ होगा और परफेक्ट लाइजन ।क्या इनसे आप अपने देश का स्वाभिमान पा सकते हैं ?

टिप्पणियाँ

Udan Tashtari ने कहा…
अभी तो जंग का रंग जमना शुरु हुआ है. :)

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