"नीतीश जी, हमारा स्कूल कब खुलेगा ? "


छः साल की एक कश्मीरी बच्ची ने प्रधानमंत्री मोदी से यह शिकायत की कि ऑनलाइन क्लासेज में बच्चों को बहुत होमवर्क दिया जाता है। "मैं छोटी सी बच्ची सुबह से दोपहर तक सिर्फ स्कूल का ही काम करती हूँ। इसे ठीक करो मोदी साहब।" और इस शिकायत पर जम्मू कश्मीर के एल जी मनोज सिन्हा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अधिकारियों से जवाब मांग लिया। सुदूर बिहार के ग्रामीण इलाके में पिछले डेढ़ साल से स्कूल बंद हैं ,कोई ऑनलाइन क्लासेज नहीं है ,कोई होम वर्क नहीं है ,सरकारी स्कूल के बच्चों को कोई किताब नहीं मिली है ,क्या किसी गांव के बच्चे ने प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बिहार को कहा है कि उसे होम वर्क क्यों नहीं मिलता ? उसे किताब क्यों नहीं मिलती ? बिहार के ग्रामीण पृष्ठभूमि में पले बढे धैर्य नारायण झा ने दुबई से यह सवाल मुझे पूछा तो शायद मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं था। कोरोना महामारी के बीच बंद पड़े स्कूल /कॉलेज ने देश के ग्रामीण अंचल के बच्चों को हाशिये पर धकेल दिया है।

एक के बाद दूसरे और अब तीसरे वेव की चर्चा देश में चल रही है। कहा जा रहा है कि इसमें ज्यादा बच्चे संक्रमित हो सकते हैं। विज्ञान और बाजार को समझे बगैर एक सवाल तो बनता है कि जब शहरों के तमाम प्राइवेट स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेज चल रहे हैं फिर ये ऑनलाइन क्लासेज ग्रामीण अंचल में क्यों नहीं ? देश में लगभग 30 लाख शिक्षक है और 10 लाख से ज्यादा कॉलेज टीचर होंगे। जो शायद स्कूल/कॉलेज खुलने का इन्तजार कर रहे होंगे। दूसरे फेज की टीकाकरण के बाद इनमें अधिकांश शिक्षकों ने टीका ले लिया होगा , लेकिन अब समस्या यह है कि तीसरे वेव की तैयारी में बच्चों को भी कोरोना टीका दिया जाना है और उसकी ट्रायल अभी शुरू हुई है। जाहिर है यह अकादमीक सत्र भी गुजर जाना है। 1 से लेकर 12 वी तक की परीक्षा रद्द हो चुकी है और बच्चे आसानी से प्रोमोट भी हो चुके हैं। लेकिन जब बच्चो की शिक्षा की बात होती है तो हमारे पास कोई जवाब नहीं है हम सिर्फ अभी उनकी हिफाज़त के चिंता करते हैं।
हालत बदलने के साथ सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में लोग फिर आना शुरू करेंगे। अभी हो सकता है कि यह तादाद आधी हो या एक तिहाई हो लेकिन ज़िंदगी चलेगी। तो क्या इसी तरह एक तिहाई बच्चों और शिक्षक लेकर स्कूल और कॉलेज क्यों नहीं खुले ? 12 वी के लगभग एक करोड़ बच्चे इसलिए पेपर नहीं दे सके क्योंकि अभी सारे लोग वाक्सिनेटेड नहीं है लेकिन भारत में छात्र और शिक्षक का पूर्ण रूप से टीकाकरण में अभी वक्त लगेगा। लेकिन क्या 10 दिन के बजाय 1 महीने तक पांच विषयों के एग्जाम नहीं हो सकते ? क्या सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ओपन स्पेस में परीक्षा नहीं हो सकती ? क्या ग्रामीण इलाके में बच्चों को शिफ्टवाइज पेड़ के नीचे क्लास नहीं लगायी जा सकती ? क्या बिहार में सोशल मीडिया के जरिये शिक्षक अपने क्लास के बच्चों को लेक्चर नहीं दे सकते ? आपदा है तो अवसर भी ढूंढने होंगे। आप अपनी राय यहाँ लिख सकते हैं।

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