तमिलनाडु में हिंदी: जनता के लिए जीडीपी है
तमिलनाडु में हिंदी : सियासत से दूर कारोबार के नजदीक डियर टू टी लेस शुगर ! चेन्नई में हिंदी विरोध की ख़बरों को जेहन में बसाये मैंने मरीना बीच से बाहर एक टी स्टाल पर दो चाय मांगा था। चाय मिली लेकिन बगैर चीनी की। मेरे कुलिग ने कहा बढ़िया समझाए चीनी देना ही भूल गया। चाय वाला ने पूछा चीनी चाहिए ? मैंने कहा भाई बोला तो था लेस शुगर। उसने कहा सीधे कहो चीनी कम। मैं हंस पड़ा था। हिंदी विरोध के इस रहस्य को मैं दिन भर आज़माता रहा। होटल में खाना सर्व करने वाला वेटर तमिल बोलकर मेन्यू रखता था और हिंदी में आर्डर ले जाता था। ऑटो वाला बेधड़क आपके पास आकर पूछेगा कहाँ जाना। मुझे कुछ अटपटा सा लगता था कि राजनितिक दलों के चेन्नई ऑफिस में हिंदी में एक साउंड बाइट्स लेना मुश्किल हो जाता था लेकिन ऑफ द रिकॉर्ड हिंदी में बातचीत का जवाब आपको मिल जाता है। ये कैसी राजनीति है जिसमे नेता आम लोगों को हिंदी का डर दिखा रहा है लेकिन जनता और कारोबारी हिंदी को स्टेट की जीडीपी मान रहा है। इस समय देश के अग्रणी राज्यों में तमिलनाडु जीडीपी को लेकर सबसे ऊपर है। 11 फीसदी की जीडीपी वाले कोस्टल स्टेट में व्याप...