संदेश

2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भोजशाला : क्यों सलमान खुर्शीद इसे अयोध्या नहीं मानते

चित्र
  भोजशाला :भारत की सभ्यता और संस्कृति को कोर्ट से मिली पहचान  (क्यों सलमान खुर्शीद इसे अयोध्या नहीं मानते ) 1947 के बाद आज के  भारत को जो लोग नेशन स्टेट मानते हैं उन्हें भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट के फैसले ने निराश  किया होगा । लेकिन भारत को एक प्राचीन सभ्यता और सविलिजेशनल स्टेट के रूप में जो जानते हैं उन्हें मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले ने आत्मगौरव और संतोष दिया होगा। न्याय होते देख कई पीढ़ियां भावुक हुई होगी।कोर्ट के फैसले ने उनका  भरोसा मजबूत किया है कि न्याय के लिए  भले ही संघर्ष लम्बा करना पड़ता है लेकिन अयोध्या में राम मंदिर भी बने और सनातन संस्कृति  की ज्ञान और विज्ञान के देवी सरस्वती के भोजशाला से सनातन संस्कृति की  पहचान सुनिश्चित हुई।   सरस्वती के वरद पुत्र और परमार कुलभूषण महाराजा  भोज का नाम  क्या भारत के पराक्रमी राजाओं के  इतिहास में दर्ज नहीं होना चाहिए था। लेकिन उनके महान थाती और धरोहर भोजशाला को कमाल मौला मस्जिद के विवाद में डालकर तक्षशिला ,विक्रमशिला और नालंदा जैसे ज्ञान विज्ञान केंद्र को खंडहर में तब्दील ...

बीजेपी के बंगाल जीत का नायक कौन !

चित्र
 बीजेपी के बंगाल जीत का नायक कौन ! क्या पश्चिम बंगाल का असेंबली चुनाव  भारत की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को  दुनिया के सामने लाया है ? बीजेपी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में सजे मंच इसकी गवाही देता  है। मंच पर उपस्थित बीजेपी के सबसे पुराने कार्यकर्त्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  कार्यकर्त्ता 98 वर्ष के माखनलाल  सरकार की मौजूदगी और प्रधानमंत्री मोदी के उन्हें  पांव छूकर प्राणम  कर भारत के संस्कार को स्थापित करना भी इस बात की गवाही देती है कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण के मूल मन्त्र ने बंगाल के समाज को एक विचारधारा से जोड़ने में अहम् भूमिका निभाई थी।   अंडमान में संघ के प्रचारक के रूप में सेवारत दिलीप घोष 2014 में जब बंगाल लौटे तो उन्होंने रामनवमी के अवसर पर पारंपरिक जुलूस निकालने की शुरुआत की। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया,कहा राम से बंगाल का कोई लेना देना नहीं है । प्रशासन ने इजाजत नहीं दी। दिलीप घोष ने कोर्ट के परमिसन से यात्रा निकाली तो सख्ती की गयी कि मुस्लिम इलाके से  यात्रा नहीं निकलेगी। ज...

तमिलनाडु में हिंदी: जनता के लिए जीडीपी है

चित्र
  तमिलनाडु में हिंदी : सियासत से दूर कारोबार के नजदीक  डियर टू टी लेस शुगर ! चेन्नई में हिंदी विरोध की ख़बरों को जेहन में बसाये मैंने मरीना बीच से बाहर एक टी स्टाल पर दो चाय मांगा था। चाय मिली लेकिन बगैर चीनी की। मेरे कुलिग ने कहा बढ़िया समझाए चीनी देना ही भूल गया। चाय वाला ने पूछा चीनी चाहिए ? मैंने कहा भाई बोला तो था लेस शुगर। उसने कहा सीधे कहो चीनी कम। मैं हंस पड़ा था। हिंदी विरोध के इस रहस्य को मैं दिन भर आज़माता रहा। होटल में खाना सर्व करने वाला वेटर तमिल बोलकर मेन्यू रखता था और हिंदी में आर्डर ले जाता था। ऑटो वाला बेधड़क आपके पास आकर पूछेगा कहाँ जाना। मुझे कुछ अटपटा सा लगता था कि राजनितिक दलों के चेन्नई ऑफिस में हिंदी में एक साउंड बाइट्स लेना मुश्किल हो जाता था लेकिन ऑफ द रिकॉर्ड हिंदी में बातचीत का जवाब आपको मिल जाता है।  ये कैसी राजनीति है जिसमे नेता आम लोगों को हिंदी का डर दिखा रहा है लेकिन जनता और कारोबारी हिंदी को स्टेट की जीडीपी मान रहा है। इस समय देश के अग्रणी राज्यों में तमिलनाडु जीडीपी को लेकर सबसे ऊपर है। 11 फीसदी की जीडीपी वाले कोस्टल स्टेट में व्याप...