न लेफ्ट न राईट परिवार है राईट चोईस


नई सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री श्री प्रकश जायसवाल ने राहुल जी को सुपर प्रधानमंत्री बताते हुए यह साफ़ किया कि सभी मंत्रियों के कार्यों की समीक्षा राहुल जी करेंगे । प्रधानमंत्री इस समीक्षा से बाहर हैं या अन्दर इसका खुलासा मंत्री जी ने नही किया । यानि पॉवर सेंटर इस बार दो नही तीन है ।संवैधानिक सत्ता के ऊपर परिवार हावी है । जीत का सारा श्रेय राहुल जी को देकर कांग्रेसी लीडरों ने यह पहले ही साफ़ कर दिया है कि कोई इकोनोमिक्स नही , कोई पॉलिटिक्स नही सिर्फ़ परिवार ही चुनाव जितने के लिए काफ़ी है । यही वजह है जब भारी हिलो हुज्जत के बाद मंत्रियो की सूचि आई तो मंत्री परिषद् मे परिवार ही छाया रहा ।पी ऐ संगमा को सोनिया गांधी से शिकायत है लेकिन जब उनकी बेटी को मंत्री बना दिया जाय तो फ़िर कौन सी शिकायत । करूणानिधि के लिए राजसत्ता अपना कारोबार है इसलिए बड़े बेटे अझ्हगिरी को केन्द्र की सत्ता में बैठकर छोटे बेटे स्तालिन को राज्य में सत्ता सौपने की तैयारी पुरी कर ली है । अपने फारूक साहब गद गद है । राहुल जी की कृपा से बेटा उमर ने रियासत में सत्ता सिंहासन पा लिया , दामाद सचिन केन्द्र में मंत्री हो गए ,अपने गोबर गैस डिपार्टमेन्ट ही मिला तो क्या हुआ । लाल बत्ती गाड़ी और सत्ता का फाइव स्टार सुख भोगने से कौन रोक सकता है ?
यह कहानी सिर्फ़ एक दो परिवारों की नही है । कांग्रेस के कद्दावर लीडर जीतेन्द्र प्रसाद के बेटे जीतीन प्रसाद को मंत्री बनाकर पार्टी ने जीतेन्द्र प्रसाद के बफदारी का इनाम दिया । माधव राव सिंधिया नही रहे तो क्या हुआ बेटा ज्योतिरादिया तो सत्ता सँभालने लायक तो हो ही गया है । माधव सोलंकी के योगदान को ध्यान में रखते हुए उनके बेटे भारत भाई सोलंकी को मंत्री बनाया गया । जी के मुप्नार नही रहे तो क्या हुआ उनका खानदान चलाने के लिए बेटा जी के वासन तो है । मंत्री पद के लिए इसलिए वह काबिल हकदार है । वसंत दादा पाटिल को महाराष्ट्र के लोग भूल गए होंगे लेकिन कांग्रेस उनका आज भी एहसानमंद है इसलिए बेटा प्रतिक पाटिल लायक हुआ तो सबसे पहले उसे देश चलाने की ही जिम्मेवारी सौपी गई ।
अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे इसलिए अगर उनकी पत्नी पहली बार सांसद बनी है तो बगैर मंत्री पद पाये लोगों की सेवा कैसे कर सकती है । सलमान खुर्शीद साहब को तो मंत्री मंडल मे वैसे भी हक बनता है उनका पारिवारिक रिश्ता जाकिर हुसैन से लेकर खुर्शीद साहब तक रहा है । कुमारी शैलजा हरियाणा के मशहूर दलित नेता दलबीर सिंह की बेटी है ,इन्हे मंत्री पद न देना कांग्रेस की परम्परा का अपमान है । आर पी सिंह पूर्व मंत्री सी पी एन सिंह के पुत्र है ॥ मुह मे चांदी के चम्मच लेकर पैदा लेने वाले की फेहरिस्त लम्बी है अरुण यादव एम् पी के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुभाष यादव के पुत्र है तो तुषार भाई चौधरी गुजरात के कद्दावर लीडर अमर सिंह चौधरी के पुत्र है । लोग कहेंगे कि खानदान के नाम से चलने वाली पार्टी में खानदानी लीडरों को मंत्री बनाये जाने पर इतना हाय तौबा क्यों । यह तो परम्परा का सवाल है ।
पहली बार लोक सभा मे ८० से ज्यादा सांसद चुन के आए है जिनकी उमर ४० से कम है । कहा जाता है की नौजवान भारत का ये आएना है । जाहिर है देश के नौजवान मतदाताओं ने लेफ्ट राईट को नजरंदाज कर माध्यम मार्ग को चुना है । जाहिर है यही युवा शक्ति किसी पार्टी की उर्जा हो सकती है । युवा कांग्रेस ने नौजवानों को कांग्रेस में जोड़ने के लिए आम आदमी का सिपाही नामका संगठन बनाया है । युवा कांग्रेस के कई लीडरों ने राहुल जी की दखल के कारण कांग्रेस की टिकेट भी पायी । ये अलग बात है इन्हे उन जगहों से चुनाव लड़ाया गया जहा से कांग्रेस को चुनाव जितने की उम्मीद नही थी । अशोक तवर हो या मीनक्षी नटराजन ऐसे दर्जनों युवा चेहरे है जिन्होंने अपनी जीत से लोगों को चौकाया है । लेकिन न तो ये सचिन पायलट है न ही ज्योतिरादित्य और न ही आगथा संगमा फ़िर ये मंत्री कैसे बने ,शाशन और सत्ता की सीख तो इन्हे खानदान से मिली नही । कहा जाता है कि यह राहुल का जमाना है .जाहिर है केन्द्र की सत्ता मे हर जगह अभी राहुल ही बिकेंगे । राहुल गाँधी ने अभी भले ही कुछ नही कर दिखाया हो लेकिन इस दौर में इसे लोग राहुल का चमत्कार मानते है । लेकिन यह बात तय है कि चमत्कार का असर ज्यादा दिन नही टिकता । राहुल जी को सत्ता में टिकाये रखने के लिए आम आदमी का सिपाही ही असरदार हो सकता है ॥ ये अलग बात है इन्हे अभी काफ़ी दिनों तक राहुल जी के झंडे ढोने पड़ेंगे ।

टिप्पणियाँ

vaishali ने कहा…
जाहिर है सत्ता में मलाई खाने का मौका राहुल जी और उनकी पुज्नीये माता जी सोनिया गाँधी के आर्शीवाद से मिला हो ,तो भला मंत्री महोदय क्यों न राहुल बाबा का गुनगान करे । उन्हें पता है ये मलाई तब तक मिलता रहेगा जब तक गाँधी परिवार का आर्शीवाद उनपर बना रहेगा। ये परिवार वाद सिर्फ़ राजनीती की सेज पर ही नही बिछी है बल्कि ये आज हर सेक्टर में देखने को मिलता है । चाहे फ़िल्म इंडस्ट्री हो या फिर मीडिया इंडस्ट्री , हर जगह परिवार वाद का ये रोग हावी है । यानि जिसके खानदान के बुजुर्ग पीछे रह गए उनके बेटे पोते का भविष्य तराशने में कई सौ साल लग जा रहे है । ये भारत का बदला हुआ चेहरा है जिसमे समाजवाद के नाम पर परिवार वाद का बर्चस्प होता दिख रहा है । शायद कांग्रेस पार्टी आम आदमी का हाथ कांग्रेस के साथ का नारा महात्मा गाँधी और नेहरू की विरासत पर दबेदारी जता कर हासिल करने का दंभ भरती है । अब ये तो पुरा देश जानता है की बापू ने क्या ऐसी ही विरासत का सपना देखा था जिसे राहुल बाबा आगे बढ़ा रहे है ।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

क्या कश्मीर भारत के हाथ से फिसल रहा है ?

कश्मीर मसला है.... या बकैती ?

हिंदू आतंकवाद, इस्लामिक आतंकवाद और देश की सियासत