बीजेपी के बंगाल जीत का नायक कौन !
बीजेपी के बंगाल जीत का नायक कौन !
क्या पश्चिम बंगाल का असेंबली चुनाव भारत की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने लाया है ? बीजेपी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में सजे मंच इसकी गवाही देता है। मंच पर उपस्थित बीजेपी के सबसे पुराने कार्यकर्त्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्त्ता 98 वर्ष के माखनलाल सरकार की मौजूदगी और प्रधानमंत्री मोदी के उन्हें पांव छूकर प्राणम कर भारत के संस्कार को स्थापित करना भी इस बात की गवाही देती है कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण के मूल मन्त्र ने बंगाल के समाज को एक विचारधारा से जोड़ने में अहम् भूमिका निभाई थी।
अंडमान में संघ के प्रचारक के रूप में सेवारत दिलीप घोष 2014 में जब बंगाल लौटे तो उन्होंने रामनवमी के अवसर पर पारंपरिक जुलूस निकालने की शुरुआत की। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया,कहा राम से बंगाल का कोई लेना देना नहीं है । प्रशासन ने इजाजत नहीं दी। दिलीप घोष ने कोर्ट के परमिसन से यात्रा निकाली तो सख्ती की गयी कि मुस्लिम इलाके से यात्रा नहीं निकलेगी। जहाँ भी लोगों ने रामनवमी जुलुश निकालने की कोशिश की वहां पत्थर पड़े और आगजनी की गयी। साम्प्रदयिक सौहार्द बनाने के नाम पर ऐसे आयोजन पर लगातार सख्ती की गयी। दुर्गा मूर्ति विसर्जन से लेकर सरस्वती पूजा तक ममता प्रशासन ने तुष्टिकरण के नाम पर हिन्दू समाज के पर्व त्योहारों पर पूरी सख्ती दिखाई।
पिछले दस वर्षों में CAA के विरोध का मामला हो या नूपुर शर्मा का मामला या फिर वक़्फ़ आंदोलन मुस्लिम कट्टरपंथियों ने बंगाल में जमकर आगजनी की तोड़फोड़ की। रेल सम्पतियों का भारी नुक्सान किया लेकिन पुलिस कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ममता बनर्जी की मां ,माटी ,मानुष उसी दिन मर गया जब आर जी कर मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर बेटी की रेप और निर्मम हत्या हुई और ममता सरकार ने माँ रत्ना देवी को बताया कि उसकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है। आम आदमी से सरोकार ममता की उसी दिन ख़त्म हो गया जब संदेशखाली की दर्जनों बेटियों के सामूहिक बलत्कार के मामले में रेखा पात्रा ने आवाज बुलंद की थी लेकिन निर्मम हुई CM ममता ने उसे अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ साजिश माना। कलिता जैसी सैकड़ों महिलाओं को केसरिया ने अपनी मातृ शक्ति को पहचानने में मदद की और महिलाओं ने कई जिलों से इस चुनाव में टीएमसी का नामोनिशान मिटा दिया।
2021 में बंगाली अस्मिता के नाम पर ममता बनर्जी ने बीजेपी की प्रचंड लहर को रोक दिया और अपनी सरकार को एंटी इंकम्बेंसी के शिकार होने से बचा ले गयी । लेकिन 2026 में SIR के खिलाफ मुहिम चलाकर ममता ने इसे बंगाली अस्मिता और बांग्ला प्राइड पर दिल्ली का हमला बताया लेकिन लोगों ने तवज्जो नहीं दी। इसे आगे बढ़ाते हुए चुनावी सभाओं में बाहरी और बंगाली बेटी का मुद्दा बनाया। बंगाली बनाम गुजराती लड़ाई को टीएमसी के नेताओं ने सिद्दत से प्रचार किया। बात नहीं बनी तो ममता ने मछली का मुद्दा उठाया ,कहा बीजेपी आएगी तो मछली ,अंडा ,मटन खाना बंद हो जाएगा। कई बीजेपी नेताओं ने मछली हाथ में लेकर चुनावी सभाओं में जाने लगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को मंगलवार के दिन मछली खाने के लिए आलोचना भी सहनी पड़ी। लेकिन पीएम मोदी के झाल मुरी दुकान पर 10 रु का भुजा खरीदना ममता की मछली प्रचार की हवा निकाल दी। बीजेपी के चुनाव प्रचार में झाल मुरी हीट आइटम बन गया था।
ये यही बीजेपी है जिसने 2011 में खाता नहीं खोल पायी .2016 में 3 विधानसभा सीट जीत ली। 2021 में 73 सीट जीती तो 2026 में 207 सीटों पर विजय पताका फहरा दिया। ये वही कोलकाता है ये वही परेड मैदान है जहाँ 1946 में तत्कालीन बंगाल के मुख्यमंत्री सुहरावर्दी ने डायरेक्ट एक्शन डे का एलान करके कोलकाता की सड़कों पर हजारो लाशें बिछा दी थी। कत्लोगारत की उस वीभत्स घटना ने देश विभाजन के नाम पर हजारों हिन्दू परिवारों का अस्तित्व मिटा दिया था। 80 साल बाद कोलकाता के उसी परेड ग्राउंड में भगवा झंडे के बीच वन्दे मातरम् का गीत बजा तो मानो बंगाल आनंद मठ को दुबारा याद किया था। । श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पार्टी बीजेपी ने गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर के जन्मदिन पर बंगाल की सत्ता संभाल कर यह संदेश दिया है कि भारत की सनातन सभ्यता और उसकी पहचान कभी मिटाई नहीं जा सकती। कभी कोई नायक आदि गुरु शंकर हुए ,कभी स्वामी विवेकानंद ,तो कभी बंकिम चंद्र तो कभी मोदी।

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