इतिहास रचने जा रहे हैं PM मोदी ; बदलते भारत की कहानी
नेहरू युग बनाम मोदी युग :इंडिया बनाम भारत की कहानी
हजारों वर्षों के भारत की सभ्यता की कहानी में कई नायक आये और चले गए लेकिन कुछ ही नायकों ने लम्बे समय तक लोगों के दिलों दिमाग में अपनी छाप छोड़ी । आज़ादी के बाद पंडित नेहरू प्रधानमंत्री बने और लम्बे समय तक देश पर छाप छोड़ा। जिसे लोग नेहरू युग भी कहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी 10 जून को पंडित नेहरू के बाद दूसरा कार्यकाल पूरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे । पंडित नेहरू के बाद सत्ता में रहते हुए लगातार 3 बार चुनाव जीतकर इतिहास रचने वाले यह रिकॉर्ड भी मोदी ने अपने नाम कर लिया है ।यानी प्रधानमंत्री मोदी 10 जून को प्रधानमंत्री पद पर 4399 दिनों का कार्यकाल पूरा कर लेंगे जबकि जवाहरलाल नेहरू 4398 दिन तक पद पर रहे थे।
लेकिन बात सिर्फ टेन्योर का नहीं है। नेहरू जी को भारत के भाग्य विधाता बनने का मौका मिला और केंद्र से लेकर राज्यों तक एकक्षत्र शासन का मौका मिला था। राजनीतिक रूप से उनके सामने कोई चुनौती नहीं थी। लेकिन नरेंद्र मोदी को सत्ता पिछले 20 वर्षों से गठबंधन की सरकारें के साथ साथ राज्यों में क्षेत्रीय क्षत्रपों के प्रभाव के बीच केंद्र में स्थिर सरकार का गठन सबसे बड़ी चुनौती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को लम्बे अरसे के बाद पूर्ण बहुमत पाकर पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी तबसे मोदी युग के रूप में लोगो ने एक नए भारत को देखा है।
3 जून 2022 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के पैतृक गांव में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था वे देश में एक मजबूत विपक्ष की आशा करते हैं, जो लोकतंत्र को मजबूत करेगा ।
अप्रैल 1952 में लोकसभा चुनावों में उनकी कांग्रेस पार्टी द्वारा 489 में से 364 सीटें जीतने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी विपक्ष के अभाव पर अफसोस जताया था।अंतर सिर्फ इतना है कि नेहरू काल में उनके मुखर विरोधी के रूप में सिर्फ तीन नाम थे जिनकी आवाज नक्कार खाने में तूती की आवाज साबित होती थी। सूचना का श्रोत सरकारी और अख़बारों की सरकार पर निर्भरता विपक्ष की आवाज कभी आम लोगों में नहीं पहुंच पायी। आज भारत में करोड़ों स्मार्ट फोन धारक बोलने और आलोचना करने की संवैधानिक अधिकार से खुद ब्रॉडकास्टर बन बैठे हैं ।
50 के दशक में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, आचार्य कृपलानी और राममनोहर लोहिया। अपने ज़माने के अच्छे वक्ता और संगठनकर्ता थे लेकिन जम्मू कश्मीर में परमिट प्रथा के विरोध में श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक देश एक विधान नारा देते हुए जम्मू कश्मीर की सीमा में घुसे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया बाद में कश्मीर के जेल में उनकी मौत भी हो गयी थी लेकिन देश में यह सामान्य घटना की तरह ही बताया गया। मुखर्जी का सपना 70 साल बाद नरेंद्र मोदी ही कश्मीर में एक देश ,एक संविधान और एक निशान लागू किया।आर्टिकल 370 निरस्त होने के बाद एक भारत श्रेष्ठ में कश्मीर का गौरव भी जुड़ा । यानी जिस परिवर्तन की आस भारत ने लगभग छोड़ दी थी मोदी के इन 12 वर्षों में वे सारे परिर्तन लोगों ने जमीन पर उतरते देखा ।
यह समझने की बात है कि प्रधानमंत्री बनते ही मोदी झाड़ू लेकर दिल्ली के मलिन बस्तियों की सफाई के लिए क्यों निकल पड़े थे। पहला संकल्प उन्होंने लाल किला से स्वच्छ भारत का ही लिया था। व्यवहार परिवर्तन का यह दुनिया में अबतक का सबसे बड़ा आंदोलन साबित हुआ।
सिर्फ गंदगी और कार्यों की श्रेणी को लेकर भारत में जातीय परम्परा बनी वह एक दौर में अछूत की घृणित रवायत बन गयी थी। स्वच्छ भारत अभियान ने इस नजरिये को दुरुस्त किया। गाँधी जी ने अपना शौचालय साफ़ करने की एक रूटीन आदत डाली थी। लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी स्वच्छता के आग्रह को लेकर कभी कोई ठोस प्रयास नहीं हुए ।
मोदी युग में 2014 के बाद सरपर मैला ढोने जैसी प्रथा भी समाप्त हो गयी। हर घर में इज्जत घर परिवार की पहचान बन गयी। भारत से गंदगी को ख़त्म करना है और इसकी जिम्मेदारी किसी व्यक्ति की नहीं सबकी है। जनभागीदारी के आंदोलन से नरेंद्र मोदी महज पांच साल में भारत को खुले में शौच से पूर्णतया मुक्त कर दिया था। गांधी जी के 125 वीं जन्म जयंती पर देश ने उन्हें स्वच्छ भारत के रूप में उन्हें पुष्पांजलि दी थी और गांधी जी के क्लीन इंडिया के सपने को साकार होते लगभग 100 साल बाद देश ने देखा था।
चंपारण से गांधी ने जनभागीदारी का सत्याग्रह की शुरुआत की थी उसी चम्पारण में मोदी ने स्वच्छ भारत के लिए स्वच्छाग्रह की शुरुआत की थी। दुनिया का यह पहला आंदोलन था जिसमें हर वर्ग हर उम्र के लोगों ने व्यवहार परिवर्तन के लिए एक दूसरे को प्रेरित किया था।जनभागीदारी के इस अभिनव प्रयोग से प्रधानमंत्री ने देश की कई मुश्किल समस्याओं का निदान किया है।
भारत ने पहलीबार गाँधी जी के हिन्द स्वराज संकल्प को जमीन पर क्रियान्वयन होते देखा था । यह इस देश में सबके लिए एक बड़ी सीख थी कि गाँधी के विचारों जीवन में उतारना या फिर उनकी हर जगह तस्वीर लगाकर फर्ज पूरा कर लेने में बड़ा फर्क होता है । पिछले 70 सालों में नेहरू जी से लेकर मनमोहन सिंह तक गाँधी जी को सम्मान देने में उनके नाम पर सियासत करने में कभी कोई कोताही नहीं बरती लेकिन हिन्द स्वराज के गाँधी का भारत सिर्फ सेमिनारों और परिचर्चा तक ही सिमित रहा गया था ।
प्रधानमंत्री मोदी ने गाँधी के विचारों को न केवल जिया बल्कि विकास के साथ विरासत को विकसित भारत का आधार बना दिया। 1903 में गाँधी जी जब बनारस पहुंचे और काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास गंदगी का अम्बार पड़ा देखा तो उन्होंने कहा था कि हमें स्वराज मांगने का कोई हक़ नहीं है अगर हम अपने महान तीर्थस्थलों और गौरवशाली विरासत को भी सँभालने के लायक नहीं बने हैं तो स्वराज की कल्पना मेरे समझ से पड़े है ।
पंडित नेहरू का आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री होने का अवसर मिला था,जहाँ नीतियां बनाने और लागु करने की कोई चुनौती नहीं थी । मोदी अस्थिर सरकारे और अनिश्चिता से भरे सियासी माहौल में स्थिर सरकार देने के साथ साथ रिफार्म ,परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म से इन वर्षो में यह साबित किया कि सोच बदलेगा तो देश बदलेगा।
इन 12 वर्षों के पीएम ने कर्तव्य पथ पर चलकर गुलामी की मानसिकता से जुड़ी सोच की लेफ्ट लिबरल सत्ता विरोधी नैरेटिव की चुनौती का हमेशा सामना किया है।लेकिन ये सारे नेगेटिव कैंपेन प्रधानमंत्री मोदी के इमेज को कभी नहीं तोड़ पाया। वजह लोग जानते हैं एक सफल लीडर की पहचान इससे होती है कि उसने क्राइसिस या आपदा में परिस्थिति को कैसे संभाला है। जब चारों और हाहाकार रहा हो ,लाखों लोगों की जिंदगी संकट में हो ,सामने में विकराल स्थिति रही हो,तो देश का नेतृत्व कैसे रिएक्ट करता है। यह देश के नेतृत्व के व्यक्तित्व की सही पहचान होती है।
मोदी भुज के भूकंप से लेकर कोविड महामारी या अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हर बार अग्नि परीक्षा में सफल रहे हैं। हर असंभव काम पूरा होते देख लोगों से सुना जा सकता था कि मोदी है तो मुमकिन है।
अपने चुनावी कार्यक्रम में मैंने लोगों के बीच यह जानने की कई बार कोशिश की है कि लोग मोदी को क्यों पसंद करते हैं। जवाब था क्योंकि मोदी ने इस देश के लाखों करोड़ों गरीब लोगों को भी सपना देखना सिखाया है।42 करोड़ लोगों को पहली बार बैंकों में खाता खुला। सरकारी सहायता गरीब लोगों के सीधे अकाउंट में पहुंचा। घरों में शौचालय ,किचन में गैस चूल्हा ,नल से जल ,हर घर बिजली ,पक्का घर इतने भर से समाज में करोड़ों लोगों की सामाजिक हैसियत बदल गयी।
2014 से पहले जो सुविधा गांव में कुछ लोग उठाते थे वे सारी सुविधाएँ गांव हो या शहर अब गरीबों के भी पहुंच में है। जीवन में यह बदलाव भारत की जनता से पीएम मोदी को कनेक्ट करता है। पंडित नेहरू की तरह मोदी ने चाचा नेहरू की छवि नहीं बनायीं बल्कि आम लोगों को अपने घर के सदस्य होने का एहसास कराया है। प्रयाग राज के स्वच्छ कुम्भ में सफाई कर्मियों के पैर धोते मोदी या श्रमिकों के साथ भोजन करते हुए मोदी।देश के हर गरीब ने मोदी में अपनी तस्वीर देखी।
पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी लोगों के भरोसे पर खड़े उतरे हैं। लोग कहते हैं कि मोदी जो कहता है वह करता है। आज यह आम लोगों का विश्वास है । इन दस वर्षों में उन्होंने देश के सामने लाल किले से जितने भी संकल्प लिए उसे पूरा किया है। लाल किले के प्राचीर से वे जब 68वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित कर रहे थे तो वे विकास को लेकर अपनी प्रतिब्धता को लोगों के सामने रखा था। सबका साथ ,सबका विकास और सबका विश्वास। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं।
15 अगस्त 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से एलान किया कि अगले 1000 दिनों में भारत के हर गाँव में बिजली पहुंचेगी। इस संकल्प को अप्रैल 2018 में पूरा कर लिया गया था। समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजना पहुंचा कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लक्ष्य के साथ उन्होंने एक नए भारत के निर्माण की तस्वीर लोगों के सामने रखी है ।विकसित भारत की नीव यही से पड़ी थी। आज भारत फ़्रिजाइल 5 से टॉप 4 की मजबूत इकोनॉमी वाला एक आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से भरा देश बन गया है।
इंडिया दैट इज भारत से भारत दैट इज इंडिया की कहानी मोदी युग में बदले भारत की तस्वीर में साफ़ दिखने लगी है। आजादी के बाद बने इस देश को राज्यों का संघ बताया गया जिसमे हजारों साल की भारत की सिविलिजेशनल स्टेट की पहचान दम तोड़ती नजर आयी थी।
भारत दुनिया के कुछ ही सभ्यतागत देशों में एक महत्वपूर्ण नाम है। सभ्यता के विकास से जुड़े हुए कई प्राचीन देशों में उनकी संस्कृति की पहचान गायब हो गए लेकिन भारत एक जिवंत परंपरा वाला देश बरक़रार रहा है।
नेहरू युग की शुरआत के साथ ही अपनी राजनितिक सुविधा के कारण सिवलिजेशनल स्टेट के सूत्र को नकार दिया गया। हम अपनी ऐतिहासिक गौरव से पूरी तरह अलग कर दिए गए। प्रधानमंत्री मोदी इससे अलग हटकर कहते हैं कि हमें यह याद रखना चाहिए कि हम कौन हैं।हमारे पास एक महान सभ्यता के धरोहर है। हम इसके साक्षी हैं। हम कांस्य युग के पूर्व की सभ्यता को जीते हैं जिसका प्राण धर्म है। धर्म हमें एक माला की तरह अनगनित फूलों को जोड़कर एक आकार में बांधता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि धर्म रिलिजन और रिवाज से ऊपर की चीज है। यह जीवन का स्रोत है। बगैर धर्म के हमारी सभ्यता कुछ भी नहीं है। यही वजह है नरेंद्र मोदी भारत को एक पुण्य भूमि मानकर सेवा करने के लिए 24 /7 तत्पर रहते हैं।बाकी प्रधानमंत्रियों की कार्यशैली से तुलना करके आप इसकी बेहतर व्याख्या खुद कर सकते हैं।
*विनोद मिश्रा *

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