सबके राम ! अयोध्या की एक और अग्निपरीक्षा
अयोध्या ! जिसे जीता या हराया न जा सके। लेकिन यह भी सच है कि इस अयोध्या नगरी को अपने धैर्य ,साहस,पराक्रम और शीलता के लिए बार बार अग्निपरीक्षा भी देनी पड़ी है। भारत की आस्था और संस्कृति के प्रतीक राम अपने जन्मस्थान अयोध्या के मंदिर में 500 साल के संघर्ष के बाद ही पहुँच पाए। राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे के जयघोष के साथ अमर बलिदानियों ,कारसेवकों की अटूट निष्ठा का व्रत और संकल्प के रूप में आज अयोध्या में राम लला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं। लेकिन मंदिर में चढ़ावा चोरी के नाम पर उठा सियासी बबंडर के बीच अयोध्या को फिर अपनी निष्ठां और ईमानदारी की अग्निपरीक्षा से गुजरने को कहा जा रहा है।
राम मंदिर चंदा चोरी के बाद अयोध्या में एक बार फिर भक्तिमय वातावरण ने कई सियासी लोगों को भावुक कर रखा है। राम मंदिर की जगह अस्पताल बनवाने वाले केजरीवाल अयोध्या में राम लला का दर्शन कर रहे हैं और कहते है मैं सबसे बड़ा सनातनी हूँ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सीधे राम कृष्ण के वशंज बताये जाने लगा है और पार्टी भर भर कर राम मंदिर के प्रति आस्था जता रही है। सपा अपने को जोर जोर से सनातनी कह रही है । कांग्रेस के नेता सनातन आस्था के प्रतिक राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को आस्था के साथ खिलबाड़ मान रहे हैं। कई नेता लोगों के दिए गए दान को वापस करने की मांग कर रहे हैं। जिनके लिए राम काल्पनिक नायक थे वे आज भर भर कर उनके प्रति आस्था जता रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं प्रभु श्री राम की माया देखिये जो लोग हिन्दू आस्था को सांप्रदायिक बता रहे थे वे सबसे बड़े आस्थवान होने का इनदिनों दावा कर रहे हैं। योगी आदित्य नाथ इसे राम भक्तों की जीत बता रहे हैं। वजह अयोध्या आज भारत के प्रमुख तीर्थ सथलों में एक है जिसका दर्जा आज वेटिकन सिटी के रूप में दिया जा रहा है। मंदिर इकॉनमी राज्य के प्रमुख आय के स्रोत बने है तो स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का मौका। आखिर सियासत 2027 के असेंबली चुनाव से पहले कहां पीछे रहने वाली थी।
आज आप अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उतरेंगे तो अयोध्या में भले ही आपका आकर्षण प्रभु रामलला के मंदिर में हो लेकिन आपको निषाद राज से लेकर शबरी के प्रसाद के साथ ही राम लला के समक्ष उपस्थित होंगे। राम मंदिर के भक्तिमय वातावरण में सबके राम के राम मंदिर के प्रबंधन में योग्य और कुशल प्रशासक महासचिव के रूप में दलित समाज से आने वाले कृष्ण मोहन राम भी मिलेंगे। इस मंदिर में आज ब्राह्मणवाद और मनुवाद का सियासी विरोध की सियासत के लिए मुद्दा आज सिर्फ चढ़ावा चोरी ही हो सकता था । ऐसा शायद देश में पहली बार हुआ है कि राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आरोपों का जवाव देने के लिए दान की गयी चीजों का पूरा व्योरा देना पड़ा। सोशल मिडिया पर सियासती लोगों ने जिन बहुमूल्य चीजों के गायब होने का दावा किया था। उन तमाम बहुमूल्य चीजों को प्रदर्शित करना पड़ा। कांग्रेस पार्टी कहती है ये कैसे मान लूँ कि यह वही चांदी के खड़ाऊं है या सोने की राम चरित मानस पुस्तक है जिसे दानकर्ता ने मंदिर को दान दिया था। यह तो आरोपी दानकर्ता ही कह सकते हैं लेकिन आरोप पवन खेरा लगा रहे हैं जिनके नेता ने मंदिर के उद्घाटन समारोह का ही बॉयकॉट किया था।
राम मंदिर उद्घाटन से पहले अयोध्या में यह गीत लोगों को बार बार उद्वेलित करता था कि राम आयेंगे।राम गए कहां थे? राम तो भारत की आत्मा हैं,वो तो अयोध्या के कण कण में है। लोगों ने अयोध्या आना छोड़ दिया था। देश की सियासत ने भारत की प्राचीन नगरी अयोध्या से सनातनी लोगों को नाता तोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था। अयोध्या आज एक कस्बा भर नहीं रह गई बल्कि देश की पिलग्रिम टूरिज्म की धड़कन बन गई है। अयोध्या वैश्विक मानचित्र पर हिन्दू आस्था के लोगों के लिए एक अलग वेटिकन सिटी बन गई है । दुनिया भर में लोग अयोध्या से जुड़े हैं क्योंकि 2019 के बाद यहां लोग आए हैं जाहिर भक्ति लौटी है तो राम भी लौट आये हैं ।
आज अयोध्या धाम अपने भाग्योदय से गौरवान्वित है। लेकिन यह कम ही लोग जानते हैं कि यह एक लम्बे संघर्ष का परिणाम है। आरएसएस के लाखों स्वयंसेवकों ने वर्षों तक लोगों के बीच संपर्क बढ़ाया ।घर घर लोगों को अयोध्या का संदेश पहुंचाया।बिखरे समाज को जोड़ने के लिए राम के आदर्शों को लोगों के सामने रखा।उनकी सोई हुई चेतना को गांव गांव अभियान चलाकर जगाया।बीजेपी में आने से पहले संघ के एक कार्यकर्ता के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तीन लाख गांवों में राम मंदिर आंदोलन के जरिए सांस्कृतिक चेतना जगाने काम किया था। संघ के ऐसे सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गांव से शहर तक अभियान चलाकर भारत के संकल्प से राम मंदिर की सिद्धि को प्राप्त किया था ।
सत्ता और वोट की सियासत ने सिर्फ राम लला और अयोध्या को ही नहीं छोड़ा था बल्कि लोगों की चेतना से उसकी संस्कृति ,उसके गौरव को विस्मृत कर दिया था।संघ ने भारत को अपने राम से जोड़ दिया था।अपने स्थापना के 100 साल में संघ ने यह सबसे बड़ी कामयाबी पाई कि राम लला की प्राण प्रतिष्ठा में सभी जाति ,जनजाति से लेकर काशी के डोम राजा को भी यजमान बनाकर एक पंक्ति में बैठा दिया था ।राम मंदिर में सिर्फ राम लला ही नहीं विराजमान हुए थे बल्कि यह सामाजिक क्रांति का राष्ट्र मंदिर बन गया ।
2014 में पीएम मोदी बनारस आए थे तो उन्होंने कहा था मां गंगा ने मुझे बुलाया है।शायद वह कह रहे थे वे विकास के साथ विरासत संभालने के लिए ही आ रहे हैं। राम लला विराजमान की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पीएम मोदी की 11 दिनों का तप और व्रत पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा था "अब ऐसी तप की हम सबकी बारी है"।लोगों के बीच ही ऐसी तपस्या जरूरी है।जागृत भारत के सपने को साकार करने के लिए लोगों के बीच रहना होगा उनका साथ लेना होगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ लोगों के अहंकार ने इस भव्य दिव्य उत्सव और त्याग समर्पण के प्रतिक राम मंदिर में भक्ति की जगह प्रबंधन में लगे लोग आस्था को बाजार बना दिया। भक्ति भाव के चढ़ावे की चोरी होने लगी। मंदिर इकोनॉमी की चकाचौंध में कालनेमि बनकर सैकड़ों लोगों ने मंदिर प्रवेश कर लिया और अपनी जगह सुरक्षित कर ली , नतीजा सबके सामने है। भारत की सेक्युलर सियासत में 11 लाख बेसकीमती सम्पतियों के वक़्फ़ बोर्ड में कुल आय 200 करोड़ रु क्यों थी। क्यों एक ही परिवार के लोग वक्फ की संपत्तियों पर वर्षों से काबिज थे इस पर सवाल पूछने वाला कोई नहीं था लेकिन राम मंदिर में टिन्नू,लव कुश ,मृत्युंजय जैसे शातिर लोग घुस कर चढ़ावा चोरी करते पकडे जा रहे हैं तो सवाल राम मंदिर पर हो रहा है सवाल सनातन आस्था से पूछा जा रहा है। आखिर ऐसी अग्निपरीक्षा अयोध्या से ही क्यों मिलती है। यह भी एक बड़ा सवाल है।


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