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नक्सल के खिलाफ जंग दंतेवाडा से नहीं दिल्ली से होनी चाहिए

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पिछले एक जनवरी से अबतक नक्सल प्रभावित राज्यों की चार बैठके हो चुकी है .केंद्र सरकार का मानना है कि नक्सल के खिलाफ किसी ग्रीन हंट ऑपरेशन की चर्चा नही है .राज्य सरकारे यह लडाई खुद लड़ लेगी लेकिन खबर यह भी है की केवल छत्तीसगढ़ मे ही इस ऑपरेशन के दौरान अबतक १५० से ज्यादा नाक्साली मारे गए है . यह quiet  डिप्लोमेसी का जमाना है सबकुछ चुपचाप होगा .यानि जंग भी और सियासत भी चुपचाप होंगे . लेकिन नक्सली इस जंग को चुप चाप नहीं होने देंगे .दिल्ली से लेकर राज्यों की राजधानियों में बुधिजिबियों का प्रदर्शन जारी है .आदिवासियों के समर्थन मे सरकार के खिलाफ उनका अभियान जारी है . तर्क यह दिया जा रहा है कि  ऑपरेशन ग्रीन हंट नक्सलियों के खिलाफ नहीं है बल्कि आदिवासियों के खिलाफ है . पिछले दिनों मशहूर आन्दोलनकारी मेधापाटेकर और संदीप पाण्डेय दंतेवाडा मे जनसुनवाई करने पहुचे थे .मकसद था दुनिया को बताना कि ऑपरेशन ग्रीन हंट में भोले भाले आदिवासियों को शिकार बन...

प्रवासी भारतीय दिवस के बहाने मालदार गांधी की तलाश

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प्रवासी भारतीय दिवस के बहाने मालदार गांधी की तलाश का यह अनोखा मेला है . दुनिया भर के लगभग ४० देशों के तकरीवन १५०० से ज्यादा गाँधी इन दिनों राजधानी दिल्ली मे जुटे हुए है और राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार इनके इस्तकवाल मे लाल कालीन बिछाए हुई है . कह सकते है कि कामयाब कारोबारियों ,कामयाब सेटर और कामयाब बुद्धिजीवियों के इस  अनोखा संगम को देश की आर्थिक सम्पन्नता से जोड़ दिया गया है . २००३ से शुरू हुआ इस सम्मलेन का मुख्या उद्देश्य यह था कि ९ जनबरी को महात्मा गाँधी अफ्रीका  से भारत लौटे थे इसलिए इस दिन को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाये .भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ़ ओवेर्साज  इस दिवस का आयोजन करता है . अपने देश से नौकरी की तलाश में ,रोजगार की तलाश मे , बेहतर जिन्दगी की तलाश मे सदियों से लोगों का पलायन विदेशी मुल्कों मे होता रहा है .सूरीनाम से लेकर गुआना तक फिजी से लेकर अफ्रीका तक मोरिसस से लेकर लातिन अमेरिका तक ऐसे कम ही देश होंगे जहाँ भारतीय ने अपनी दस्तक न दी हो लेकिन इनमे से कम ही लोगों को हमने याद किया है .इनकी तादाद लाखों मे हो सकती है लेकिन प्रवासी दिवस के मौके पर ...

vinod mishra ka blog: पाकिस्तान की हालत देखकर हमारा दिल क्यों नहीं पसीजता

पाकिस्तान की हालत देखकर हमारा दिल क्यों नहीं पसीजता

पाकिस्तान की हालत देखकर हमारा दिल क्यों नहीं पसीजता

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 पूरी दुनिया नए साल के जश्न डूबी हुई थी लेकिन उसी दुनिया के एक कोने में इन्शानियत चीत्कारें मार रही थी . क्या बच्चे क्या जवान ठीक १ जनबरी को हुए धमाके ने पाकिस्तान में १२५ से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी . नए साल के मोके पर वोलीबोल मैच का आनंद उठा रही भीड़ पर फिदायीन हमले करके कुछ आतंकवादियों ने हजारो लोगों की खुशिया एक पल मे छीन ली . पाकिस्तान के अलग अलग इलाके मे हुए आतंकवादी हमले मे पिछले साल १०००० से ज्यादा लोग मरे है .लेकिन भारत मे हम इस बात से दुखी होने के वजाय खुश है कि पाकिस्तान में आज उन्ही के जूते उन्ही के सर बज रहा है . हमारे राजनितिक समीक्षक हमें बता रहे है कि ब्लीडिंग इंडिया बाय थौसंड्स कट्स की पालिसी पाकिस्तान पर भारी पर रही है . हम इसलिए भी खुश हो रहे है कि जिस विष बेल को पाकिस्तान ने बड़ा किया वही आज पाकिस्तान को डस रहा है . इस्लामाबाद से लेकर लाहोर तक पेशावर से लेकर कराची तक पाकिस्तान का शायद ही कोई शहर है जो आतंकवादी हमले से लहुलाहन न हो . आर्मी हेड कुअर्टर से लेकर पुलिस छावनी ,आई एस आई के दफ्तर से लेकर मस्जिद तक हर प्रतिष्ठान धमाको से दहल रहा है . इस्लामिक दे...

झारखण्ड चुनाव ;२००९ का सबसे बड़ा सियासी हादसा

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झारखण्ड में कौन जीता कौन हारा की समीक्षा अभी जारी है .किंग और किंगमेकर के इतिहास और भूगोल का विश्लेषण अभी जारी है . सत्ता पाने का दंभ प्रदर्शन और खोने की खीज अभी जारी है . लोकतंत्र के नाम पर व्यवस्था का चीरहरण अभी जारी है . यानी २००९ के सबसे बड़ा सियासी हादसा की समीक्षा अभी बांकी है . छोटे राज्य और विकास के बड़े बड़े  सपने के साथ सन २००० में झारखण्ड अस्तित्वा मे आया था . लोकतंत्र के नाम पर कई छोटी बड़ी पार्टियों ने विकास का जिम्मा अपने ऊपर लेने की जद्दोजहद शुरू की .जाहिर है पुरे ८ वर्षों मे मुख्यमंत्रियों की कतार लग गयी . और तो और विकास का जिम्मा एक निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा को भी दिया गया .लोकतंत्र के नाम पर  सत्ता और व्यवस्था का निरंतर बलात्कार होता रहा और लोग चुप चाप तमाशा देखते रहे . चुनाव के दौरान यह बताया गया की पूर्ब मुख्यंमंत्री ने अपने दौर में ४ हजार करोड़ रूपये की अकूत दौलत बनायीं .सवाल यह उठता है इससे पहले साबिक ६ मुख्यमंत्रियों ने कितनी दौलत बटोरी . चुनाव अभियान में भ्रस्टाचार प्रमुख मुद्दा बना .मुधू कोड़ा और उनके निर्दलीय सहयोगी मंत्री सवालों के घेरे में आये ...

vinod mishra ka blog: और कितने राज्य पहले एक देश तो बनालो

और कितने राज्य पहले एक देश तो बनालो

और कितने राज्य पहले एक देश तो बनालो

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मुझे कल रात एक मित्र का फोन आया .सियासत से उनका दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है लेकिन पहलीबार उन्होंने सियासी मैदान मे कूदने की इच्छा जताई . उनके हिसाब से यह एक अच्छा मौका है .तैयारी के नाम पर उनके पास गाँधी जी का सत्याग्रह का अस्त्र है . चन्द्र शेखर राव की तरह वे आमरण अनसन पर भी जा सकते है ,अगर मिडिया उनका साथ दे . यानी उनके आमरण अनसन की पल पल की खबर देकर मिडिया उनके पक्ष में एक माहोल जरूर बना सकती है .लोग उनके साथ नहीं है तो क्या हुआ मीडिया के जरिये वे लोगों के बीच जरूर पहुँच जायेंगे . मैंने पुछा आपकी मांग क्या होगी ? उनका जवाब था मिथिला राज्य .मिथिलांचल मांगने के पीछे उनका यह तर्क था कि बिहार का यह इलाका नेतृत्वा बिहीन है ,जाहिर है तरक्की के मामले मे भी बिहार में सबसे पीछे है . मैंने उनसे पुछा कि मिथिलांचल मे आपको कोई जानता नहीं कोई पहचानता नहीं फिर आपकी बात को लोग गंभीरता से लेंगे इसमें मुझे शक है . अति उत्साहित मेरे मित्र का मानना था कि मधु कोड़ा को कौन जानता था ,अर्जुन मुंडा को कौन जानता था ,बाबू लाल मरानादी को कौन जानता था .बी सी खंडूरी को कौन जानता था ,जब अलग राज्य बना तभी तो लोग...