SIR : देश में यूरोप के तीन देश गुम हो गए और किसी को पता नहीं चला !
SIR : देश में यूरोप के तीन देश गुम हो गए और किसी को पता नहीं चला !
अगर यह बात सच है तो सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी है कि गुम हुए लोगों के नाम फिर से लिस्ट में शामिल करने के लिए चुनाव आयोग से कहे। बिहार से लेकर अबतक मतदाता सूचि की गहन पुनरीक्षण यानी SIR सुप्रीम कोर्ट के ही दिशा निर्देश में कराये गए हैं। सो राहुल गांधी को अकेले ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा।
भारत एक अकेला लोकतांत्रिक देश है जहां प्रेस के नाम पर दुनिया में सबसे ज्यादा पब्लिकेशन और टीवी चैनल्स है। इस दौर में हर स्मार्ट फोन धारक पत्रकार होने का दावा करता है। अगर उसे सोशल मीडिया पर 1 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं तो वह संपादक की श्रेणी में आता है। उन्हें ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने का हक़ संविधान से मिल जाता है । 11 करोड़ से ज्यादा यू ट्यूबर्स अपने लाखों इंस्टाग्रम फॉलोवर्स के दम पर कॉकरोच को भी इंकलाब का चेहरा बना सकते हैं। लेकिन आज तक किसी ने गुम हुए करोड़ों नाम में 100 को जिन्दा जंतर मंतर पर नहीं ला सका कि CEC ने इन्हे जीवित रहते मृतक घोषित कैसे कर दिया है। या इन्हे डीरेजिस्टरड कर दिया है। उम्मीद है 1 नवंबर को राम लीला मैदान, दिल्ली में प्रस्तावित रैली में 5000 से ज्यादा ऐसे लोग होंगे जिनका नाम SIR में गुम हो गया था। वोट चोरी को लेकर पांच लाख भीड़ जुटने का दावा किया जा रहा है। बिहार SIR के दौरान डिलीटेड 65 लाख लोगों के दावे के बीच 15 लोगों को सशरीर सुप्रीम कोर्ट में लाने को कहा गया था। पत्रकारों से छुपा कर कांग्रेस के दिग्गज वकील 5 लोगों को लाकर तमाशा बनाने की भरपूर कोशिश की थी लेकिन वे सभी फेक निकले।
देश में ऐसा यह पहली बार हो रहा है कि राहुल गांधी के चूरन लेकर कुछ उत्साही एक्टिविस्ट आंदोलन करने का दावा कर रहे हैं। रील बनाने के लिए जंतर मंतर सरीखे आंदोलन कई लोगों को रोजगार दे रहा है लेकिन वोट चोरी के दावे को बिना परखे अगर कोई अपने को बुद्धिजीवी घोषित करना चाहता है तो जंतर मंतर उनके लिए भी सुनहरा मौका दे रहा है।
चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक लगभग 2.8 करोड़ मृत मतदाता अबतक SIR प्रक्रिया के बाद लिस्ट से हटाए गए हैं। 6.3 करोड़ स्थानांतरित मतदाता , 1 करोड़ से ज्यादा डुप्लिकेट प्रविष्टियां और 3 करोड़ ऐसे लोग शामिल थे जिनका कोई कोई पता नहीं चल सका था। 22 साल बाद हुए SIR के बाद दावा किया जा सकता था कि देश के पास एक स्वच्छ वोटर लिस्ट हैं जिसमे नए लोगों और युवाओं के नाम जुड़ने की सम्भावना वोटर लिस्ट को आगे और अधिक पुख्ता करेगी। लेकिन राहुल गांधी देश के 35 लाख से ज्यादा BLO के रात दिन की मेहनत पर पानी फेरते हुए इसे नकली साबित करने पर तुले हैं। यानी इस स्वच्छ वोटर लिस्ट से चुनाव जीते हुए भी लोगों को वे साबित कर सकते हैं कि यह जीत वोट चोरी से हुई है। पहले पार्टी की हार का ठीकरा evm पर डालते थे। तीन बार से लगातार प्रधानमंत्री बन रहे नरेंद्र मोदी की करिश्मा को कम करने के लिए पूरी कांग्रेस पार्टी पूरे दम से वोट चोरी का नारा दे रही है। ताकि राहुल गाँधी की क्षमता पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर सके।
उत्तर प्रदेश के विधान परिषद के चुनाव में किसी मतदाता का नाम पर्ची पर राम ने यादव को मारा लिखा मिला । जाहिर है समाजवादियों को CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा से कम नहीं चाहिए था। लेकिन किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की हिंदी में लिखा नाम रामहित यादव किसी BLO की भूल ने गूगल ट्रांसलेशन में राम ने यादव को मारा ट्रांसलेट कर गया। बड़ा सवाल यह है कि एमएलसी चुनाव में 18 लाख लोगों के ऑनलाइन अप्लीकेशन में महज 100 लोगों के नाम में स्पेलिंग एरर क्या वोट चोरी का मुद्दा बन सकता है। लेकिन सोशल मीडिया के क्रन्तिकारी इसे एमएलसी चुनाव में बड़ी धाँधली के रूप में प्रचारित कर रहे हैं।
पीलीभीत में एक ही एपिक नंबर पर कई नाम और पुराने एपिक नंबर पर नए नाम जोड़कर सनसनी फ़ैलाने की कोशिश की गयी। दो एसडीएम अधिकारी निलंबित हुए ऑपरेटर बर्खास्त हुए। कई लोगों की नौकरी गयी। लेकिन स्थानीय स्तर पर खेला गया इस खेल का मकसद भी एक्सपोज़ हो गया। वोट चोरी का सबूत। इस वाकये ने लोगों को यह जानने का मौका दिया है कि चुनाव आयोग का मतलब सिर्फ CEC ज्ञानेश कुमार नहीं होता बल्कि देश के लाखों बूथ के BLO भी चुनाव आयोग ही हैं। हर एक वोट जरुरी है। चुनाव आयोग छूटे हुए हर वोटर को अपने नाम की एंट्री के लिए हर समय मौका देता है। चुनाव आयोग देश के करोड़ों मतदाता से ही बनता है। जाहिर है उसे किसी त्रुटि की शिकायत करने का पूरा अधिकार है। लेकिन उसे वोट चोर कहना संवैधानिक संस्था का अपमान है। विनोद मिश्रा

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