संदेश

नजरिये में फसी सियासत .....

चित्र
"सारी जिंदगी बैठ के खाइये सिर्फ 40 रूपये में " गली में  एक व्यक्ति जोर जोर से आवाज़ लगा रहा था। बाहर निकल कर करीब से   देखा तो वह व्यक्ति   लकड़ी का पीढ़ा बेच रहा था।(ग्रामीण पृष्ठभूमि में लोग  पीढ़े पर बैठ कर भोजन करते हैं )  हिंदुस्तान की सियासत में आम आदमी के लिए राजनेता  आज वही पीढ़ा बेच रहे हैं  । यानी नजरिये की सियासत में फसे लोग गली नुक्कड़ों में लगने वाली हर उस आवाज से प्रभावित हो रहे हैं जो उसे तात्कालिक लाभ का भरोसा देती   है। किसान कर्ज माफ़ी के लिए लालायित है ,मध्यम वर्ग ज्यादा से ज्यादा करों में छूट चाहता है ,अनाज से लेकर सारी चीजें सस्ती पाना चाहता है ,व्यापारी के लिए हर टैक्स उसके साथ धोखा   है। सरकारी कर्मचारी/अफसर अपने लिए हर सुविधा हर  चीज पक्की चाहता है ऊपरी आमदनी के साथ  । नौजवान तबका रोजगार चाहता है जो उनका हक़ है  । लेकिन इन चाहनेवालो में कोई यह चाहने की कोशिश नहीं कर रहा है कि मुफ्तखोरी से देश की बुनियाद नहीं बनती ,मुफ्तखोरी कभी अगली पीढ़ी के लिए  मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं दे सकती...

समर शेष है, उस स्वराज को सत्य बनाना होगा क्योंकि किसानों में आज भी अंसतोष है

चित्र
लेखक : प्रभाकर केलकर ,भारतीय किसान संघ         पिछले महीनो में देश के अनेक राज्यों में किसानों द्वारा अपनी मांगो को लेकर विधानसभा एवं संसद घेराव के मार्च का सिलसिला तेज हुआ है। किसान संगठनो की  अलग अलग सभाऐं हो रही है। जिनमें अनेक राजनैतिक दलों के झण्डे एवं नेता भी  शामिल होतें है और उत्तेजक भाषणों के साथ ये कार्यक्रम किसी अगली योजना के एलान के साथ समाप्त होते हैं... हर सभाओ में प्रमुख मुद्दे            1. कर्जमाफी  2.  पेंशन  3.  लाभकारी मूल्य  4. न्यूनतम समर्थन मूल्य ( MSP ) होते हैं ,लेकिन समाधान की पहल नज़र नहीं आती है।       विगत  30  वर्षो में अनेक सरकारें बनी    अनेक योजनाए भी सामने आयी  ,  पूरे देश में किसानों के नाम पर लगभग  3  लाख करोड़ की कर्जमाफी भी हुई लेकिन इन उपायों के वाबजूद किसानों की समस्याऐं समाप्त नही हुई । ये एक कटु सत्य है। उपरोक्त समस्याओं के उपा...

प्रधानमंत्री नहीं पटवारी बदलिए राहुल जी !

चित्र
राजधानी दिल्ली में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति का किसान मुक्ति मार्च कई मामले में ऐतिहासिक रहा। सवालों की  बौछारों के बीच समाधान का सूत्र न तो मंचासीन राजनेताओ  ( एम पी निवास  के किसान नेता ) की ओर से आया न ही मंच सजाने  के लिए दूर दराज गाँव से आये किसान/मजदूरों से कर्जे के अलावा कोई समाधान की मांग उठी।  लेकिन मंच से राहुल गाँधी का सन्देश जरूर आया समाधान के लिए पीएम बदलना जरूरी है तो अरविन्द केजरीवाल जी ने अपना ब्रह्म वाक्य दुहराया " ये मोदी हानिकारक है "  समाधान सुझाने  वाले की दृष्टि मंच और भीड़ तक सिमित थी और किसानो की दृष्टि  अपने हजार /लाख कर्जे पर टीकी थी कि कब कर्ज माफ़ी का एलान हो जाय। लेकिन समस्या पीछ छूट गयी कि इस कर्जे के लिए जिम्मेदार कौन है ? क्या ग्रामीण अंचलों में भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे  पटवारी/सिस्टम  इतने ताकतवर हैं  कि किसानो के फायदे की योजनाए डकार रहे हैं। और  सरकारे मूक दर्शक बनी हुई है ?  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ...

"मन की बात " यानी जन संवाद ,जनतंत्र का संवाद....

चित्र
"मन की बात " यानी जन संवाद ,जनतंत्र का संवाद ,लोकपरम्परा का संवाद यानी जनता  और एग्जीक्यूटिव का   टू वे कम्युनिकेशन।  क्या  जनतंत्र का  यह पहला प्रयोग है ? शायद नहीं ,प्राचीन  भारत के गणराज्यो में शासकों  से जनता का ऐसी   ही संवाद की परंपरा रही होगी। आधुनिक लोकतंत्र में पांच साल बाद जनता सिर्फ तय करती है कि सत्ता पार्टी को  जितना है या हराना है। गवर्नेंस में उसकी कोई भूमिका नहीं होती। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने   मन की बात कार्यक्रम के   50 वे एपिसोड में जोर देकर कहा  कि इस कार्यक्रम में सिर्फ आवाज़ उनकी है लेकिन भावना / विचार   देश के अवाम का है,आईडिया देश के युवाओं का है । आज़ाद भारत में   किसी प्रधानमंत्री की  संभवतः यह सम्भवतः पहली कोशिश है जिसमे संवाद को समावेशी बनाकर आम और खास के फर्क को कम किया गया है और देश के हर घर से संवाद स्थापित करने में कामयाबी मिली है। देश में ऐसे दर्जनों लोकप्रय अभियान चल रहे हैं इन  सरकार के अभियानों  के आई...

जब फैक्स मशीन ने बदली कश्मीर की सियासत !

चित्र
गर्व करें या रोएं?,स्वार्थ की दौड़ में कहीं आजादी फिर से न खोएं। अपने ही हाथों तुम अपनी कब्र न खोदो ,अपने पैरों आप कुल्हाड़ी नहीं चलाओ ,सत्ता की अनियंत्रित भूख...(अटल जी ) ... अटल बिहारी वाजपेयी की इस कविता ने शायद जम्मू कश्मीर के गवर्नर सत्य पाल मालिक को प्रेरणा दी और उन्होंने सत्ता पर काबिज होने की कश्मीर से उठी सियासी आंधी को फैक्स मशीन का सहारा लेकर रास्ता ही बदल दिया। राजभवन की फैक्स मशीन अटक गयी या फिर गुलाम नबी आज़ाद ने अपने 2008 के अपमान का बदला लेने के लिए मेहबूबा मुफ़्ती को भटका दिया। कभी मेहबूबा ने भी आज़ाद जी को कश्मीर में पैदल कर दिया था। क्या सही है ? कहना मुश्किल है लेकिन उधर सरकार बनाने की दो चिठ्ठी फैक्स मशीन में फंसी उधर मौजूदा विधान सभा भंग। गठबंधन की तमाम अटकले धरी की धरी रह गयी। दो साल पहले बीजेपी और पीडीपी के सत्ता समीकरण को बेमेल शादी करार देने वाले लोग ओमर अब्दुल्ला और मेहबूबा मुफ़्ती के सत्ता गठबंधन  को आदर्श शादी करार दे रहे थे। पीडीपी और बीजेपी की तथाकथित बेमेल शादी को लेकर बीजेपी मुल्क में एक आदर्श स्थापित करने की बात कह रही थी , कुछ लो...

मीडिया का स्वर्णिम काल ::आज़ादी तो शायद कुछ ज्यादा ही मिल गयी है !

चित्र
राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर अपने भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने  कहा कि आज के समय में मीडिया पर दबाव बना पाना नामुमकिन है। इमेर्जेंसी और सेंसरशिप की बात तो सोची भी नहीं जा सकती क्योंकि बहुआयामी मीडिया प्रिंट, इलेक्ट्रनिक, वेब ,सोशल मीडिया जैसे तमाम माध्यम आज टेक्नोलॉजी की  बदौलत ओपेनियन मेकर्स की भूमिका में हैं और इसने लोगों को फ्रीडम ऑफ़ स्पीच की एक  बड़ी ताक़त दी है. हालाँकि  विश्वसनीयता (क्रेडिबिलिटी ) का सवाल कल भी था और आज भी है। लेकिन मेरा सवाल अपनी जगह दुरुस्त है क्या हमारे कुछ पत्रकारों /सम्पादकों ने जब तब इसी क्रेडिबिलिटी /शाख को नहीं बेचा है ? क्या पत्रकारों ने अपनी मार्केटिंग के जरिये क्रेडिबिलिटी नहीं बनायीं है  और उसे सियासी बाजार में जब तब  ऊँचे दामों में बेचा है ?  बड़े पत्रकारों के ऊँचे दाम की बोली दो दशक पहले नेताजी मुलायम सिंह ने लगाई थी । जब सूची बाहर आई तो कौन सूप और कौन चलनी सबके एक जैसे ही छेद और सबके जुबान  पर अलीगढ का ताला। लेकिन हम आजादी के रक्षक और चौ...

अयोध्या में दीपोत्सव यानी राजीव गाँधी के रामराज्य का शंखनाद !

चित्र
1989 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने अयोध्या से चुनावी रैली की शुरुआत की थी और  "रामराज्य" लाने का संकल्प दोहराया था। लेकिन पिछले वर्षो में ऐसा क्यों हो रहा है कि  जब कभी भी बात "अयोध्या" और रामलला की होती है  तो बहस सेक्युलर कम्युनल पर टीक जाती है । कौन हैं ये लोग जनमानस के राम को टीवी स्टूडियो में बैठा दिया है। पहलीबार   अयोध्या में आयोजित   भव्य दीपोत्सव में दक्षिणी कोरिया की प्रथम महिला किमजोंग सुक  मुख्य अतिथि के रूप में पधार रही हैं । आयोजन में दुनियाभर  के करीब 900 कलाकार प्रस्तुति देंगे ।  इंडोनेशिया के रामलीला के कलाकार  ओर श्रीलंका, रूस व त्रिनिदाद सहित अलग-अलग महाद्वीपों के कुल सात सौ कलाकार अपनी प्रस्तुति से भारत से अपने संस्कृति के रिश्तों की डोर मजबूत करेंगे।इस  भव्य दीपोस्तव के आयोजन में राम के घर वापसी का भाव है अयोध्यावासी की ख़ुशी में दुनियाभर से लोग पहुँच रहे हैं ।  फैजाबाद से गुजरती हुई ट्रेन में किसी यात्री ने कहा...