संदेश

देश ,काल और परिस्थिति से अनजान राहुल गांधी : ये तारीख़ सही करने का वक्त है

चित्र
प्रिय राहुल गाँधी जी , आप भी न ! नहीं बदलने की कसम ले रखी है। नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री मोदी पर आपके तीखे हमले से लबालब भरा हुआ मैं लखनऊ से दिल्ली वापस आ रहा था। एयरपोर्ट के रास्ते में पड़ने वाले एटीएम बूथ  पर  सर्दी के मौसम में लगी लाइन देखकर मैंने अपने बुजुर्ग ड्राइवर ताज मोहम्मद से पूछा भाई ! आपका क्या हाल है ? नोटबंदी में ? उनका जवाब था भाई जान ,अपना तो सब कुछ लाइन में लगकर ही मिलता है ,, हमें क्या चिंता ,चिंता वो करे जो अपना काला धन घर में रखा था अब  बैंक में जमा करवाने के लिए किराये पर  लोगों को लाइन में खड़ा किये हैं। गरीबों के  सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता  है…  धन्ना सेठ चोरों को अब डर लगने लगा है..  ताज साहब भारत की गरीबी पर एक संक्षिप्त भाषण मुझे सुना गए। ताज मोहम्मद की आवाज मेरे कानों फिर गूंजने लगी है जब आपने कश्मीर पर धारा 370 और तथाकथित बढ़ी हिंसा को लेकर  मोदी सरकार को घेरने की सियासी पहल तेज की है। लेकिन अब मैं इस बात से आश्वस्त हूँ  कि बूढी सेठानी (सोनिया जी )को दुबारा गद्दी क्यों संभालनी पड़ी है। राहुल जी ,जो ...

पहलीबार जब सरस्वती जी के रूप में मुझे सुषमा जी मिली थी

चित्र
1996 में जब 13 दिन बाद अटल बिहारी वाजपेयी की पहली सरकार गिरी और विपक्षी पार्टियां  सांप्रदायिक बनाम धर्मनिरपेक्षता का हवाला देकर संयुक्त मोर्चा की सरकार बना कर संसद में विश्वास मत लेने पहुंची । सुषमा जी ने इस अवसरवादी सियासत को धोखा बताते हुए संसद में अपने ओजश्वी भाषण में कहा था आज भारत में रामराज्य की नींव पड़ गयी है। उन्होंने जोर देकर कहा था यह देश देख रहा है कम्युनल कौन है और सेक्युलर कौन है और जल्द ही एक मजबूत बीजेपी सत्ता में वापस होगी और अपने संकल्पों को पूरा करेगी। कल लोकसभा में धारा 370 हटाने के निर्णय के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी को भेजे अपने अंतिम ट्वीट में सुषमा जी ने कहा "'मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी" और चंद घंटो के बाद मानो वे आश्वस्त होकर महानिर्वाण की अनंत यात्रा पर निकल गयी थी।  सांप्रदायिक बनाम धर्मनिरपेक्षता :1996  "धर्मनिरपेक्षता का बाना पहनकर हम पर साम्प्रदियकता का आरोप ये तमाम लोग सत्ता के लिए एक हो गए हैं। संविधान निर्माताओं ने धर्मनिरपेक्षता के स्वरुप की क्या कल्पना की होगी और इस सत्ता की सियासत न...

कश्मीर में क्या चल रहा है ?

चित्र
मीर साहब आदाब , इंडिया से बोल रहा हूँ। बोलो साहब आदाब ! कश्मीरियों का हाल पूछा शुक्रिया। क्या चल रहा है ? उधर से आवाज आयी। मैंने कहा भाई मैं भी आपसे ही पूछ रहा हूँ क्या चल रहा है। मीर साब की तेज हंसी की आवाज़ आयी। उन्होंने घर परिवार का हाल पूछा और कहा जब भी आप फोन करते हो खुश कर देते हो लेकिन ये भारत ये कश्मीर कबतक चलेगा ? मैंने पूछा दिक्कत क्या है ? उन्होंने कहा भाई दिक्कत तो कुछ नहीं है लेकिन अपने ओमर साहब और मेहबूबा की गड्डी पार्क नही ं हो रही है। हर चार घंटे में मीडिया के साथ राजभवन यह पूछने पहुंच जाते हैं कि क्या चल रहा है ? अरे भाई ! दो दिन पहले दोनों बाप बेटा पी एम मोदी से मिलकर आये हैं फिर गवर्नर साहब से क्यों पूछने जाता है ? ये तो उमर साहब को बतानी चाहिए कि कश्मीर में क्या चल रहा है ? मीर साहब बड़े बुजुर्ग की हैसियत में समझाते हुए बताया भाई ! गवर्नर मलिक साहब कह रहे हैं "कल क्या होगा यह नहीं पता लेकिन आज तो मैं कह सकता हूँ ऐसा कुछ भी नहीं है जो अफवाह में फैलाये जा रहे हैं। यानि क्या चल रहा है यह ठीक से गवर्नर साहब को नहीं पता है लेकिन वह जोर देकर कहते हैं, संसद ...

कश्मीर के पूर्व सीनियर आई ए एस अधिकारी शाह फैज़ल को कश्मीर में सिक्योरिटी डेप्लॉयमेंट से क्यों डर लगता है ?

चित्र
प्रिय शाह फैज़ल साहब , कश्मीर को  लेकर आपकी और इमरान खान की बढ़ी चिंता के बीच मेरे व्यक्तिगत सुझाव पर प्रकाश डाला जा सकता है।  जनसंघ के संस्थापक नेता श्यामाप्रसाद मुख़र्जी की कश्मीर में  रहस्मयी मौत पर दुःख व्यक्त करते हुए  तात्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने   कहा था   जब बड़ी गलतियां की जाती हैं, तब इस उम्मीद में चुप रहना अपराध है कि एक-न-एक दिन कोई सच बोलेगा" . यह अपराध आपकी पीढ़ियों ने आपको झूट बोलकर की है और हमारे सियासतदानो ने भी की है।   कश्मीर में भारत से  गलती हुई है यह बात पंडित नेहरू जी को तब पता चला जब वे पाकिस्तानी फौज को लाहौर तक खदेड़ देने के बावजूद यू एन अमन बहाली  के लिए चले गए। नतीजा डिक्सन और जनमत संग्रह जैसे प्रस्ताव आये जो भारत के मुँह पर झन्नाटेदार तमाचा था। कश्मीर पर अमेरिकी राष्ट्रपति  ट्रम्प की  हालिया मध्यस्तता की बात सामने आयी तो मुझे  अपना गाल एक बार फिर  सहलाना पड़ा। हमने तीन जंगे लड़ी, दर्जन भ...

अपराजीत कोसी या अपराजिता जातवादी मानसिकता : मिथिला को बचाना है

चित्र
"पग पग पोखरि माछ मखान ,सरस बोल मूसकी मूख पान ,विद्या वैभब शांति प्रतीक ... ई मिथिला थीक"। लेकिन सरलता ,सरसता और मुस्की वाला मिथिलांचल में  कोसी ,कमला बागमती ,गंडक के प्रलय में कराहती ज़िंदगी के बीच आज उस मिथिला के वैभव को देख आइये। जीवन संघर्ष की इससे भयानक तस्वीर आपने शायद ही कभी देखी होगी । हिंदी और मैथिली साहित्य के महान  विद्वान और कोसी अंचल के बाढ़ पीड़ित राजकमल चौधरी से  बेहतर मिथला के इस सलाना  फोटो ऑप  और मौत के मुहं से निकलने की आमजन की जद्दोजेहद शायद  नहीं देखा होगा।  “गारंटी ऑफ पीस” खत्म हुआ …विद्यापति के  गीत अब सुर ताल खो चूके हैं । रूस और मेक्सिम गोर्की की कहानी अब किसी मैथिल के दरबाजे पर डिसकस नहीं हो रही है । डकैती और अपराध की चर्चा  भी लगभग बंद हो चुके हैं। सोना-चानी और बाज़ार का हाल लेने वाला आजकल कोई नहीं है । उदासी और सन्नाटे के बीच सिर्फ अपराजिता मौजूद है।  सच में  बागमती, कमला, बलान, गंडक और  खासकर  कोसी तो  अपराजिता है ,इसे कोई पराजित नहीं कर सका...

कश्मीर :मर्ज पकड़ने की कोशिश में अमित शाह

चित्र
यह सवाल आम लोगों   के मन में जरूर उठता है कि कश्मीर का मसला क्या है ? जितना मैं समझ पाया हूँ कि वर्षो पहले कुछ नेताओं ने जो गांठ अपने   हाथों से लगायी थी मौजूदा पीढ़ी को वह गांठ दातों से खोलना पड़ रहा है। तो क्या पहलीबार संसद में धारा 370 को लेकर गृह मंत्री अमित शाह का बयान समस्या से मुंह चुराने के बजाय एक सीधी    अभिव्यक्ति थी ? कुछ चुनिंदा एलिट खानदानो  के लिए कश्मीर में बने नियम कायदे आज़ादी के बाद कानून बन गए। आर्टिकल 35 ए और 370 उन्ही चंद कानूनों में है जिसे दिल्ली ने कश्मीर  के कुछ परिवारों को खुश करने के लिए उपकृत किया था । आज  अमित शाह ने कश्मीर में इस एलिट रिवायत के नस पकड़ने की कोशिश की है  और कश्मीर के   पावर ब्रोकर्स और भ्रष्टाचार पर चोट करने की पहल की है।   अगर ऐसा है तो  माना जायेगा कि इस सो कॉल्ड स्पेशल स्टेटस के नाम पर लूट की छूट को वो पूरी तरह से ख़तम करने का उन्होंने कदम उठाया   है। याद रहे 70 वर्षो से कश्मीर में इस सिस्टेमैटिक    करप्शन के लिए सिर्फ धारा 370 और 35 ...

संत कबीर दास जयंती पर विशेष : मीडिया में एक अदद कबीर की जरुरत है

चित्र
संत कबीर की जयंती ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को जून में मनाई जाती है। एक ऐसा उपदेशक जिसने हर धर्मों में व्याप्त रूढ़ियों की निंदा की  ,कुरीतियों के खिलाफ मुखर आवाज बने लेकिन  कबीरदास जी को हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही संप्रदायों में बराबर का सम्मान मिला ।   गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पांय । बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय  . .. कबीर को जानने के लिए उनके गुरु को जानना भी जरुरी है। हालाँकि हमने भारत की गुरु शिष्य परम्परा को ही  नज़रअंदाज कर दिया है इसलिए न तो कबीर हमें याद आते हैं न हमें अपनी संस्कृति।   कबीर के गुरू स्वामी रामानंद थे। आठ साल की अवस्था में रामानंद का यज्ञोपवीत कराया गया। विद्वान ब्राह्मणों नें पलास का डंडा देकर उन्हें काशी पढ़ने  जाने के  लिए कहा और कुछ वक्त  बाद लौटने की भी नशीहत दी । लेकिन बालक रामानन्द लौटकर आने के लिए तैयार नहीं  हुए।  एक बार डंडा और कमंडल पकड़ी फिर सांसारिक माया में लौटने का कहाँ कोई सवाल रहा गया था। काशी में  महर्षि राघवानन्द जी ने उन्हें राम ...