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vinod mishra ka blog: लाल सलाम और पाकिस्तान का तालिबान

vinod mishra ka blog: लाल सलाम और पाकिस्तान का तालिबान

लाल सलाम और पाकिस्तान का तालिबान

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परेशान रात सारी है ,सितारे तुम तो सो जाओ" । पाकिस्तान में एक शायर का यह दर्द उस समय फुटा जब एक १६ साल की लड़की "चाँद "तालिबान के ३६ कोडे खा कर कराह रही थी और पाकिस्तान का समाज भीष्म पितामह की तरह मजबूर रोता रहा लेकिन तालिबान के ख़िलाफ़ एक शब्द नही निकाल पाया । यह कौन सी मजबूरी है पाकिस्तान की सैकडों लड़किया सरे आम तालिबान के हाथो पिटती रही है ,सैकडो का सर कलम कर दिया गया है लेकिन पाकिस्तानी समाज चुप है । क्या शरिया कानून के लिए पाकिस्तानी समाज इतना लालायित है कि वह तालिबान के हर उल्टे सीधे फैसले को स्वीकार कर रहा है । क्या वाकई मजहब की ताकत पर तालिबान ने पुरे सिस्टम को बौना बना दिया है और संसद से लेकर सेना तक घुटने टेक कर तालिबान के सामने खड़ा है । दरअसल यह तालिबान का सिर्फ़ मजहबी ताकत नही है बल्कि पाकिस्तान में बढ़ते लाल सलाम के प्रभाव का नतीजा है । कभी अफगानिस्तान में कम्युनिस्ट को खदेड़ने के लिए लिए पाकिस्तान और अमेरिका ने तालिबान को खड़ा किया था। पाकिस्तान के मदरसों का साथ लेकर सी आई ने तालिब को मुजाहिद्दीन बना दिया था । आज वही मदरसा और उसके तालिब अमेरिका के पीछे प...

vinod mishra ka blog: प्यार करो या नफरत मुद्दा आडवानी ही है

vinod mishra ka blog: प्यार करो या नफरत मुद्दा आडवानी ही है

प्यार करो या नफरत मुद्दा आडवानी ही है

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क्या यह चुनाव लाल कृष्ण आडवानी के लिए जनमत संग्रह है ?हो सकता है कि आपका जवाब ना में भी हो । लेकिन चुनाव प्रचार और नेताओं के बयानों का लेखा जोखा करे तो सबसे ज्यादा बयान आडवानी जी को लेकर ही दिया गया है । आम तौर चुप रहने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब भी कभी बयान दिया है आडवानी पहला और अन्तिम मुदा रहा है । तो यह मान लें कि बगैर किसी मुद्दे के इस अनोखे चुनाव में मुद्दा सिर्फ़ अडवानी हैं । पहले चरण का चुनाव संपन्न हुआ । नक्सल के रेड कोरिडोर में शांतिपूर्ण चुनाव के दावे को नक्सालियों ने बेमानी साबित कर दिया । चुनाव के दौरान सुरक्षा में लगे २९ जवान मारे गए । मुंबई हमले में मारे गए जवानों से दो गुना ज्यादा । लेकिन न तो नक्सल हिंसा मुद्दा बना न ही देश में जड़ जमा चुका आतंकवाद, यानि मुद्दा आडवानी ही है । बाबरी मस्जिद गिराने का तोहमत आडवानी पर लगा कर प्रधान मंत्री ने चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी । आज भी चुनाव प्रचार में सोनिया हो या राहुल , लालू हों या रामविलास मुद्दा सिर्फ़ आडवानी है । १९८४ के लोक सभा के चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्वा में बीजेपी चुनावी मैदान में उतरी थी और म...

सेकुलर हिंदुस्तान में जरनैल सिंह के जूते.......

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पत्रकार जरनैल सिंह के जूते ने जो कमाल दिखाया संभवतः वह कमाल इराक के पत्रकार मुन्तजिर अल जैदी के जूते ने नही किया । दुनिया के सबसे ताक़तवर राष्ट्रपति जोर्ज बुश पर जूता फ़ेंक कर जैदी ने अपने पत्रकार बंधुओं को बताया था कि जरूरत पड़े तो कलम की जगह वे जूते का भी इस्तेमाल कर सकते है । हालत बदलने के लिए उत्साहित पत्रकारों के कलम की धार मोटी हो गई है तो जूता सबसे उम्दा विकल्प हो सकता है । जैदी ने जूते से सीधा निशाना बुश को किया था ,जोर्ज बुश इससे घायल भी हो सकते थे लेकिन उन्होंने अपने को उस वार से बचा लिया । जूते की चोट से हमारे गृह मंत्री भी बच गए लेकिन कांग्रेस पार्टी इस जूते के असर को कम नही कर सकी । नतीजा यही हुआ पार्टी को जूते भी खाने पड़े और एक बोडी प्याज भी । जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को १९८४ के दंगे के कारण पहले भी टिकेट कटे हैं ,तब भी कांग्रेस देलही से लेकर पंजाब तक चुनाव हारी है । लेकिन जरनैल सिंह के जूते ने कांग्रेस को सेकुलरिस्म की एक नई सीख दे दी। 4००० से ज्यादा सिखों के कत्लेआम का आरोप कांग्रेस के लीडरों पर लगते रहे लेकिन पार्टी हर समय अपने को सेकुलर चैम्पियन बताती रही । बीजेपी ल...

जय हो राहुल गाँधी ,भय हो वरुण गाँधी ?

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उत्तर प्रदेश में एन एस ऐ किसी पर लगाये गए हों और वह बड़ी ख़बर बनी हो ऐसा कभी सुना नही गया था । यहाँ १४ साल के बच्चे पर भी रासुका लगे हैं । पिछले वर्षों में दर्जनों लोग राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के लपेटे में आचुके हैं । लेकिन यह कभी भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का मुद्दा नही बना । कुछ मानवाधिकार संगठनों ने इस काले कानून को लेकर अदालत का दरवाजा जरूर ख़त खटाया । लेकिन इस बार मानवाधिकार संगठन चुप हैं और न ही एन एस ऐ उनके लिए कला कानून है । क्योंकि इस बार इसके गिरफ्त में कोई सेकुलर लोग नहीं है । राज्य सरकार वरुण गाँधी को अतीक अहमद ,मुख्तार अंसारी ,गुड्डू पंडित ,हाजी याकूब ,अमर मणि त्रिपाठी जैसे स्वनाम धन्य लीडरों से खतरनाक मानती है । सियासत में सुचिता लाने के लिए संकल्पित सरकार वरुण गाँधी को लोकतंत्र के लिए खतरा महसूस कर रही है । हलाकि उत्तर प्रदेश ने पिछले साल लोक सभा में आपराधिक चरित्र के राजनेताओं की सबसे बड़ी सूचि भेजी थी । कमोवेश ऐसी ही सूरत इस बार भी होने वाली है । कह सकते है की एक पिछडे प्रदेश में सियासत कांग्रेस राहुल जी की जय हो के सहारे कर रही है । मायावती राहुल गाँधी का भय हो बता कर ...

जेहादी शबीर मालिक को सलाम !

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शबीर अहमद मालिक । एक आम कश्मीरी ,एक साधारण किसान का बेटा ,लेकिन जज़्बात के मामले में कुछ अलग । श्रीनगर के पास के एक गाँव दूब का रहने वाला शबीर में ऐसा क्या था कि उसके मरने पर हजारों की तादाद में लोग मातम मानाने ,उन्हें श्रधांजलि देने उसके घर पहुंचे । माहोल ऐसा मनो जमी रो रही थी आसमा रो रहा था । पिछले ३० वर्षों में कश्मीर के लोग शायद ही ऐसे मातमी नज़ारे देखे हों । शायद ही ऐसी तड़प लोगों की आंखों में पहले देखा गया हो । जाहिर है जहाँ मौत का सिलसिला वर्षों से जारी हो वहां एक शख्स की मौत से हजारों लोगों को जज्वाती होना एक अनहोनी सी बात थी । पिछले वर्षों तक कश्मीर में मारे गए आतंकवादी के लिए मातमी जलूस निकल ते थे , जहाँ नारे तकबीर और अल्लाह ओ अकबर के नारे लगते थे और इस नारे में जिले जिले पाकिस्तान होता था । लेकिन शबीर मालिक के जनाजे में शामिल हजारों भीड़ का भी वही नारा था नारे तकबीर ,अल्लाह ओ अकबर ,लेकिन जिले जिले पाकिस्तान की जगह आजाद हिंदुस्तान की गूंज थी । कुपवारा के घने जंगलों में लश्कर ऐ तोइबा के दहशतगर्दों के साथ एक मुठभेड़ में मेजर मोहित शर्मा , काम्मान्दो शबीर मालिक सहित आठ जवान मारे ग...