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गणतन्त्र दिवस : कश्मीर मसले में गणतंत्र की भूमिका बढाने की जरूरत है

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64 वे गणतन्त्र दिवस के मौके पर यह तय करना जरूरी है कि हमारा लोकतंत्र 64 साल का बुढा हो गया है या इस उम्र में भी 64 साल का शैशव दिखता है .गणतन्त्र के संस्थापको ने जिस जिम्मेदरी से हमें एक संविधान दिया और उसपर चलने का हमसे वचन लिया था ,क्या हम उस उम्मीद पर खड़े उतरे हैं .लोकतंत्र के  एक दो स्तंभ को छोड़कर बाकी सभी सतून दरकते नजर आ रहे है।हमारे तमाम तारीखी धरोहर पर यह आरोप लगते हैं कि उसमे नए ज़माने के साथ बदलाव की जरूरत है लेकिन हमने यह पड़ताल करने की जरूरत नहीं समझी कि बदलाव हमारे सोच में हुई है और इस सोच में मुल्क का सवाल ,मर्यादा का सवाल ,सहिष्णुता का सवाल ,भाईचारे का सवाल पीछे छूट गया है .भारत -पाकिस्तान के बीच बढे तनाव के बीच कई मुद्दे एकबार फिर चर्चा में है .यह मीडिया की समझदारी कहिये या बडबोलापन मुद्दे को भड़का कर सरकार और व्यवस्था को दोड़ने के लिए मजबूर जरूर कर देता है लेकिन ऐसे कई सवाल है जिन पर मीडिया समाज को जोड़कर एक राय बना सकता है . सरकार के सामने पहल के लिए विकल्प दे सकता है लेकिन ऐसे मुद्दे पर सशक्त चौथा स्तम्भ खामोश है .मसलन जम्मू कश्मीर में धारा 370 और...

धृतराष्ट्र के हस्तिनापुर में" दामिनी" के साथ इन्साफ?

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भाई साहब !बलिया कहाँ है?.औटो ड्राईवर के इस सवाल ने पहले मुझे चौकाया लेकिन उसके दिमाग में चल रहे सवालो को जानने के लिए मैंने कहा उत्तर प्रदेश में ."नाक कटने से बच गयी " ऑटो ड्राईवर ने कहा मुझे लग रहा था बलिया बिहार में है और " दामिनी " बिहार की थी .इससे पहले वह कुछ और बोलता ,मैंने उसे टोकते हुए कहा ,भाई वह देश की बेटी थी ,वैसे भी बलिया बिहार का बॉर्डर इलाका है ,भाषा और संस्कृति से एक है .जी !सब कुछ ठीक है लेकिन घर का मामला थोडा ज्यादा शर्मिंदा करता है ड्राईवर ने कहा .मै उसके जवाब से सन्न था  .16 दिसंबर की रात जब देश की बेटी (जिसे ज़माने ने "अवला " का नाम दिया था मौजूदा दौर में मिडिया ने उसे "दामिनी "निर्भय जैसे कई नाम दिए है ) मदद के लिए गुहार लगा रही थी ,आधुनिक कौरवों के चीरहरण से व्यथित पीड़ित बेटी समाज को कृष्ण बनने के लिए दुहाई दे रही थी लेकिन मदद के हाथ कही से नहीं बढे, क्योंकि  वह अपने घर की बेटी नहीं थी .यह इन्द्रप्रस्थ है आज दिल्ली बन गयी है लेकिन यहाँ कौरब कल भी थे और आज भी है सिर्फ भूमिका बदल गयी है . जाड़े की ठिठुरती रात में हमारी ब...

देश में सब कुछ "ठीक "नहीं है अटल जी

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हानि लाभ के पलडो में ,तुलता जीवन व्यापर हो गया .! मोल लगा विकने वालों का ,बिना बिका बेकार हो गया ! मुझे हाट में छोड़ अकेला ,एक एक कर मीत चला जीवन बीत चला .... एक दार्शनिक -राजनीतिग्य  अटल बिहारी वाजपेयी जीवन के 88 वे वसंत पूरा कर इन दिनों सियासी हाट में अकेले खड़े हैं ।राजनीती के मंडी में अपनी प्रखर बौधिक क्षमता की बदौलत अटल जी 50 साल तक आम और खास सबको प्रभावित किये   .गैर कांग्रेसी सरकार के वे पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने 6 साल देश के शासन की जिम्मेदारी संभाली .देश के आर्थिक प्रगति और नई दिशा देने में अटल जी का योगदान मील का पत्थर साबित हुआ  है .संवाद और संपर्क अटल जी के विकास दर्शन में शामिल थे यही वजह है की भारत में संचार क्रांति और सड़क निर्माण का...

कश्मीर के मसले को लेकर खामोश संसद

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 हर आतंकवादी हमले के छः महीने या फिर साल भर बाद फिर शुरू होती है भारत -पाकिस्तान के बीच बातचीत की पहल .फिर शुरू होता है पुराने जख्मो को भुलाकर नयी शुरुआत का संकल्प .मुंबई हमले में हमने अपने 200 से ज्यादा अजीजों को खोया, लेकिन दोषियों पर कारवाई करने में पाकिस्तान ने कभी भी रुची नहीं दिखाई लेकिन हमारे गृह मंत्री कहते है "छोडो कल की बाते ..." मुल्क में कही भी आतंकवादी हमले हुए हों ,उनका मकसद कुछ और हो लेकिन पाकिस्तान हर बार  उसे मसले कश्मीर से जोड़ता है।यानी मसले कश्मीर को लगातार सुर्ख़ियों में रखने की जो महारत पाकिस्तान ने हासिल की है उसका तोड़ कम ही देखने को मिला है . यानी बगैर आम कश्मीरियों के समर्थन के पाकिस्तान ने इन वर्षों में महज  प्रोपगंडा के बदौलत क...

बीजेपी का अंतर्विरोध ,कांग्रेस की सियासत और मुश्किल में आवाम

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 अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी एक कविता में लिखा था । "मेरे प्रभु , मुझे इतनी उचाई कभी मत देना ,गैरों को गले न लगा सकूँ ..... शायद पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को यह एहसास हो गया था कि सत्ता पाने के बाद बीजेपी का न केवल रुतवा बदला है  बल्कि उसकी चाल ,चरित्र और चेहरा भी पूरी तरह से बदल गयी है । कुछ अलग दिखने की बात करने वाली पार्टी विचारधारा की दल दल में ऐसी फसती जा रही है कि उसके सामने अगर सबसे बड़ी चुनौती है तो वह विचारधारा को लेकर ही है । हालत यह है कि वाजपेयी गैरों को गले लगाने की बात करते थे ,आज पार्टी में एक दुसरे के खिलाफ तलवार भांजी जा रही है .येदुरप्पा जैसे पुराने लीडरों से पार्टी  पल्ला छुडा रही है ।क्या यह ढोंग सिर्फ ईमानदार दिखने के लिए है या फिर पार्टी कोंग्रेस के तीखे प्रहारों से आहात अपने ही लोगों से मुहं चुरा रही है .अगर बीजेपी वाकई  कांग्रेस के भ्रष्टाचार संस्कृति से अपने को अलग मानती है फिर कांग्रेस के लाखों करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार का मुकबला करने के बजाय कभी पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को कभी अपने लोकप्रिय मुख्यमंत्री येदुरप्पा ...

कश्मीर की सियासत और लाचार मुल्क

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सैयद अली शाह गिलानी क्या आज कश्मीर के  सबसे बड़े कद्दाबर लीडर है ? आम कश्मीरी भले ही इस बात से इतिफाक न रखते हो लेकिन  गिलानी साहब का खौफ राज्य के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्लाह के सर चढ़ कर बोलता है .अमरनाथ श्रायण बोर्ड के मसले पर पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए बोर्ड को यात्रियों के लिए समुचित व्यवस्था का निर्देश दिया था .ज्ञात हो कि पिछले 3 वर्षों में यात्रा के दौरान 250 से यात्रियों की मौत की वजह सिर्फ बुनियादी सुविधा का अभाव रहा है .ओमर अब्दुल्लाह की सरकार अभी बुनियादी सहूलियत उपलब्ध कराने का मन भी नहीं बनाया है लेकिन गिलानी  के द्वारा यह अफवाह फैलाया गया कि पवित्र गुफा तक पक्की सडको का निर्माण हो रहा है .(बुनियादी सुविधा के नाम पर कश्मीर के हज पर जाने जायरीनो के लिए  श्रीनगर से जेद्दा की सीधी उड़ान की व्यवस्था की गयी है लेकिन उसी कश्मीर में सियासतदान  अमरनाथ यात्रियों को थोड़ी सहूलियत का विरोध कर रहे हैं) सैयद अली शाह गिलानी ने उधर अमरनाथ चलो का नारा दिया उधर रियासती हुकूमत बचाव की मुद्रा में आ गयी...

राष्ट्रीय दामाद की शान में गुस्ताखी

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ये अरविन्द केजरीवाल भी कमाल की चीज है। राजनीतिक पार्टी बनाने का एलान कर दिया लेकिन नाम अभी तय नहीं कर पाए है .खास बात यह है कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन वाले लोग यह भी तय नहीं कर पाए है कि उनका दर्शन दक्षिण पंथी है या बाम पंथी या फिर कांग्रेसी मध्यममार्गी .उनकी पार्टी चार दिन पहले बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के बारे में बड़ा खुलासा करती है कि 70 हजार करोड़ रूपये के सिचाई घोटाले में बीजेपी का समर्थन शरद पवार की पार्टी और उनके भतीजे को हासिल है .अचानक कोंग्रेस अध्यक्षा  सोनिया गाँधी के दामाद रोबेर्ट वाड्रा की बत्ती गूम करने के लिए बड़ा धमाका कर देती है .500 करोड़ रूपये का घोटाला की आवाज़ अब रेज्की या छुट्टे पैसे की खनक जैसे लगती है लेकिन यह देश के सबसे शक्तिशाली परिवार के दामाद या यूँ कहे कि राष्ट्रीय दामाद के खिलाफ मुहं खोलने का दुसाहस था .राबर्ट वाड्रा डी एल ऍफ़ से 65 करोड़ रुपया उधार लेते है और 500 करोड़ रुपया एक झटके में कमा लेते है यह आरोप गले से नीचे नहीं उतरता  है .भाई इस कांग्रेस जी के राज में 2जी से लेकर कोलगेट तक अपने छुटभैये नेताओं ने भी लाखों करोडो रूपय...