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जिम्मेदारी सबकी बनती है

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यह तन विषय की बेलरी, गुरु अमृत की खान। सीस दिये जो गुरु मिलै, तो भी सस्ता जान...  भारत की गुरु -शिष्य  परम्परा में कबीर ने भी मुक्ति और मोक्ष के लिए गुरु को ही साधन माना था। पंजाब हरियाणा जैसे राज्यों में गुरु की इस  शानदार रिवायत  ने सामाजिक जीवन में इंसानियत के आदर्शो को गौरवान्वित किया था। और जीवन में त्याग को ही आदर्श बना दिया। पंचकूला में  32 लोगों की जानें बाबा के  आदर्शो को बचाने में नहीं गयी है बल्कि  बाबा के  अहंकार और लालच ने मासूमो की जान ले ली है।  जब से तथाकथित गुरुओ  ने " डेरा " को स्थायी निवास मानना कर शुरू  दिया।  डेरा का रास्ता सत्ता और बाजार से जोड़ दिया तबसे बाबा  राम रहीम ,रामपाल ,आशाराम ,भीमानंद ,नित्यानंद,जय गुरु देव ,रामवृक्ष  जैसे गुरुओं ने बाज़ार और भक्तो के जरिये अपने डेरों को पावर सेंटर /वोट बैंक में तब्दील कर दिया और सियासी दलों को  डेरा के  चौखट पर ला खड़ा कर दिया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल मीडिया के उन ...

बाढ़ :उपेक्षित बिहार हर बार सियासत का ही शिकार होता है

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“ बाढ़? ”  “बकरा नदी का पानी पूरब-पश्चिम दोनों कछार पर ‘छहछह’ कर रहा है। मेरे खेत की मड़ैया के पास कमर-भर पानी है।” “दुहाय कोसका महारानी!”  इस इलाके के लोग हर छोटी-बड़ी नदी को कोसी ही कहते हैं। कोसी बराज बनने के बाद भी बाढ़?... कोसका मैया से भला आदमी जीत सकेंगे?  ..लो और बांधों कोसी को!  “अब क्या होगा?”  कल मुख्यमंत्रीजी ‘आसमानी-दौरा’ करेंगे। ...केंद्रीय खाद्यमंत्री भी उड़कर आ रहे हैं। नदी-घाटी योजना के मंत्रीजी ने बयान दिया है। और रिलीफ भेजा जा रहा है। चावल-आटा-तेल-कपड़ा-किरासन-तेल- माचिस-साबूदाना-चीनी से भरे दस सरकारी ट्रक रवाना हो चुके हैं। ...कल सारी रात विजिलेंस कमिटी की बैठक चलती रही। फणीश्वरनाथ रेणु के 40 साल पुराने संस्मरण को पढ़कर लगा ,कुछ भी तो नहीं बदला है। .बिहार, बाढ़ और भ्रष्टाचार की कहानी में। गंगा ,सोन ,पुनपुन ,फल्गु ,कर्मनाशा ,दुर्गावती ,कोसी ,गंडक ,घाघरा ,कमला ,भुतही बलान ,महानंदा इतनी नदियाँ जो जीवन धारा बन सकती थी लेकिन साल सिर्फ तबाही लाती है और हमारी सरकार फिर  अगलीबार का इन्तजार करती है।   बिहार के 18 जिलों में जलप...

गाली से न गोली से बात बनेगी बोली से : पी एम मोदी का नया संकल्प

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आज़ादी के 70 वें सालगिरह पर प्रधानमंत्री मोदी का लाल किला से सम्बोधन एक नयी शुरुआत ,एक नयी पहल का आगाज है ।   नए भारत के संकल्प के साथ  कश्मीर पर सरकार का दृष्टिकोण कश्मीरियत से लवरेज है  जिसमे हिंसा की कोई जगह नहीं होगी। "गाली से न गोली से बात बनेगी गले लगाने से प्यार की बोली से " क्या वाकई में ऐसे हालत कश्मीर में है या प्रधानमंत्री ने  इस दर्शन को आगे रखकर एक नयी शुरुआत का मन बनाया है ?  याद कीजिये "बम से न गोली से बात बनेगी बोली"  से अटल जी  के दौर में तत्कालीन सी एम मुफ़्ती मोहम्ममद सईद ने यह नारा दिया था। कश्मीर में एक नयी पहल की जीद  अटल जी ने  की थी । याद दिलाने की जरूरत यह भी है कि अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में मिलिटेंसी इससे ज्यादा गंभीर थी। श्रीनगर अस्सेम्ब्ली और संसद पर  अटैक उन्ही के दौर में हुआ था लेकिन वाजपेयी ने कश्मीर में अपना तार कभी टूटने नहीं दिया। जो लोग कहते थे अब्दुल्लाह के बिना कश्मीर नहीं ,बिना रिगिंग के वोट नहीं वहा फ्री एंड फेयर इलेक्शन करवाकर गैर अ...

इन १००००० बच्चो को किसने मारा

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5 दिनों में 60 बच्चो की मौत ! जिम्मेदार कौन ? सन 1978  से 1  लाख बच्चों  ने गोरखपुर  के इसी बी आर डी  मेडिकल कॉलेज ,हॉस्पिटल में दम तोडा है। तो इस शर्म से हमारे तीन पीढ़ियों के नेताओं को डूब मरना चाहिए।  उत्तर प्रदेश के 7  जिले और बिहार के तीन जिलों में मानसून सीजन  में  हर साल हजारो बच्चो पर  इंसेफ्लाइटिस /  ब्रेन फीवर मानो काल  बन कर टूटता है और हर साल 700 -800 बच्चो को अपनी  माँ के आँचल से छीन लेता है। तक़रीबन 3 करोड़ की आवादी वाले पूर्वांचल के इन जिलों में एक मात्रा यह हॉस्पिटल अपने टूटी फूटी व्यवस्था से हजारो माताओ को यह आस्वस्त करता रहा कि उसका बच्चा जरूर घर लौटेगा लेकिन अक्सर माँ अपने सूनी आँचल के साथ ही घर लौटती है। वजह इलाके के नीम /हाकिम से इलाज कराकर ,थके हारे माता पिता बी आर डी मेडिकल कॉलेज के शरण में आता  है लेकिन अफ़सोस इन  40  वर्षो में इस महामारी से लड़ने के लिए हमने बिलखते माताओ को अकेले छोड़ दिया।  मीडिया आज सी एम योगी से जवाब मांग रहा है ,माँगना चाहिए...

एक बड़े सियासी बेईमानी का पर्दाफाश होने वाला है

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आज़ादी के 70 वें सालगिरह पर एक बड़े सियासी  बेईमानी  का पर्दाफाश  होने वाला है। इस पर्दाफाश की चिंता ने सियासी तौर पर एक दूसरे के दुश्मन समझे जाने वाले लोगों को एक मंच पर ला दिया है। जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री अचानक अपने घोर विरोधी फ़ारूक़ अब्दुल्लाह से मिल रही है तो सी एम मेहबूबा मुफ़्ती कश्मीर के सियासी रहनुमाओ को गोलबंद कर रही है। चौंकिए नहीं ! संविधान की हिफाजत की दुहाई देते हुए हुर्रियत लीडर सैयद अली शाह गिलानी कश्मीर बंद का आह्वान कर रहे हैं ,कल तक कश्मीर के विलय पर ही सवाल उठा रहे थे। आखिर ये हंगामा क्या है ,किसने बड़पा है ? सवाल बहुत हैं लेकिन जवाब ढूंढने से पहले यह जानना जरूरी है : 1 . क्या आपको मालूम है जम्मू कश्मीर ऐसा एकलौता राज्य है जहाँ सैकड़ो वर्षो से रह रहे बाल्मीकि समाज के  लाखों लोगों  को झाड़ू उठाने /सफाई करने के अलावा कोई नौकरी नहीं मिलती।  2. यह कि पिछले 70 वर्षों से राज्य में रह रहे लाखों लोगों को नागरिकता नहीं मिली है और न ही ये लोग सरकारी नौकरी और रासन कार्ड हासिल कर सकते  3 ....

समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई.

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समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई...हाथी से आई, घोड़ा से आई...... लाठी से आई, गोली से आई.. लेकिन अंहिसा कहाई, समाजवाद..   गोरख पांडेय ने क्या खूब लिखा था। तब जब ये आज के समाजवादी कही  चर्चा में नहीं थे। तो क्या कांग्रेस की तरह लोहिया जी के चेलों ने भी  समाजवाद  को पूंजीवाद के  चासनी में डालकर एक अलग फार्मूला  बना डाला  ? तो क्या भारत में समाजवाद सिर्फ सत्ता हथियाने का जुगाड़ मंत्र  बना और अपने ही भार से दब कर बिखर गया। पहले लोग कहते थे समजवादी और मेढक को तौलना बराबर का काम है लेकिन आज  एक राज्य में पुत्र मोह में सरकार चली गयी तो एक राज्य  में पुत्र ने सत्ता को परमानेंट बनाने के लिए पिता को ही बर्खास्त कर डाला।  तो शायद गोरख पांडेय ने सही कहा था। परसों ले आई ,बरसो ले आई ,हरदम अकासे तकाई। समाजवाद उनके धीरे धीरे आई।  समजवादी कभी फासीवादी ताकतों से लोहा लेने के एकजुट होते थे  तो आज  उनके लिए साम्प्रदायिकता सबसे बड़ी चुनौती बन गयी   है। यानी ये सारे पैतरे सिर्फ वोट बैंक के लिए हो...

ये राजनीति कब प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी बन गयी !

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लालू जी ! आप तो ऐसे न थे ,या ऐसे ही थे और हम लोग गलत समझ बैठे थे। बिहार में कुछ वरिष्ठ  पत्रकारों ने महागठबंधन में मचे  महासंग्राम पर लालू जी को क्लीन चीट देने की कोशिश की है ,तो कुछ लोगों ने नीतीश जी की तुलना में चाँद को भी पीछे कर रखा है। राजनितिक पंडित मानते हैं कि बुनियाद ,महाभारत ,रामायण सिरियल के बाद लालू ही ऐसे शख्स थे जिसे टेलीविज़न ने ब्रैंड बना दिया ,लेकिन आज लालू और उनके सियासी उत्तराधिकारी कहते है कि लालू जी के बगैर टीवी न्यूज़ नहीं बनती  ।  तो क्या लालू  न्यूज़ चैनेल्स के लिए कपिल शर्मा शो थे या लालू  निर्मल बाबा वाली "कृपा " भक्तो पर बरसाते रहे थे   ! अगर ऐसा ही था   तो लालू जी को एक संस्था एक विचार बताने वाले  पत्रकारों को यह बताना चाहिए कि सर्वेंट क्वाटर से अपनी सियासत शुरू करने वाले लालू आखिर किस संस्था और विचार को पाकर पटना के तीन एकड़ में फैले बिहार का सबसे बड़ा मॉल का  मालिक बन बैठे।  ,देश के अलग अलग मेट्रो शहर में उनके बच्चों ने फॉर्म हाउस और करोडो रूपये की  प्रॉपर्टी बना ली। या ...