हुन्जक हुन्ज गाम सं भागैत लोक .ट्रेन मे ठसाठस ठुसल लोक , बस के छत पर नार पुआर जकाँ पसरल लोक , कहियो अहाँ पुछिअलैक जे एतेक लोक कतई जारहल अछि। शायद नहि , लोकक ई पलायन ककरालेल चिंता के विषय भई सकैत अछि , अहाँ लेल ! शायद नहि , अहांक परोशी लेल ! शायद नहि , जाहिर अछि ई चिंता मिथिला के भई सकैत अछि ओही समाज के भई सकैत अछि । कोनो वयक्ति के शायद ही अहि सा नुकसान हो । अहांके खेती नहि भई रहल अछि त कोई बात नहि परदेश मे काज करे बाला कोनो समांग घर जरुर सम्भैल लेतः । आई तकरीबन हर घर के कियो नहि कियो लोक परदेशी जरुर छथि, अहि तरहे अगर अहांके अहि पलायन सं चिंता नहि अछि त शायद ककरोऊ नहि छैक . अहांके याद अछि आपन खेत और खलिहान , आजुक उजरल उप्तल खेत खलिहान मिथिला सं भेल पलायन के कहानी खुद बयां करि सकैत अछि .मनिओदर आई मिथिला मे कातिक के असर के लगभग खतम कई देलक अछि लेकिन एहो बात सत्य अछि जे मिथिला सं अगहोनों गायब भई गेल अछि , हमरा याद अछि किछु साल पहिले तक गाम सं आबे बाला लोक फसल के चर्चा करैत छल आई हाल चाल मे धान के चर्चा बाहर भई गेल अछि , मिथिला मे उद्योग के जरुरत छैक , मिथिला मे धन के जरुरत छैक लेकिन ...