संदेश

किसका भारत ?

अभी तो ये अंगडाई है बाकि अभी लड़ाई है । बचपन से इस नारे को समझने का हमारा प्रयास कामयाब नहीं हो पाया था लेकिन मौजूदा गुर्जर आन्दोलन ने इसके भाव को स्पष्ट कर दिया है । पूरे देश मे इनदिनों गुर्जर आन्दोलन के अलावे कोई मुद्दा ही नहीं बचा है । राजस्थान हो या हरियाणा या फ़िर उत्तरप्रदेश इन आन्दोलनकारियों का एक ही नारा था ' जो हमसे टकरायेगा चूर चूर हो जाएगा , ये चूर चूर की बात सरकार पर तो कोई असर नहीं कर पाई लेकिन बेचारी आम जनता जरूर चूर चूर हो गई। इस आन्दोलन के दौरान अगर आप कही बंद या फ़िर जाम के शिकार हुए हों तो मेरी तरह आप ने भी ये जरूर ऑफर किया होगा की मेरे हिस्से का आरक्षण आप लेलो लेकिन भगवान् के लिए लोगों को आने जाने की सहूलियत देदो । यह देश गुर्जरों का भी उतना ही है जितना मिनाओं का जितना ठाकुरों का उतना ही पठानों का उतना ही पंडितो का लेकिन ये अलग बात है की सत्ता की दलाली मे कभी मीना धोके से आरक्षण का कोटा पा लेता है । मीना के यह चालाकी गुर्जरों ओ बी सी से और नीचे आने के लिए प्रेरित करता है । ये इस देश मे ही सम्भव है की आर्थिक रूप से जो तबका ज्यादा सम्प्पन है वही अपने को सामजिक रूप से ...

धमाके में कौन मरा ?

जयपुर धमाके की गूंज आज भी सुनाई देती है । मैंने ग़लत कहा ये गूंज शायद आपको नही सुनाई देती होगी क्योकि इन धमाकों मे शायद आपका कोई नही खोया होगा । हर एक धमाके के बाद हम भूल जाते हैं मानो कुछ हुआ ही नहीं हो । जयपुर के अस्पताल के बाहर डॉक्टर और उनके मेडिकल टीम एक एक यूनिट खून देने की मिन्नतें कर रहे थे । बार यह बताया जा रहा था की आपके एक यूनिट खून से किसी की जान बचायी जा सकती है । कुछ लोग इसलिए नही निकल रहे थे क्योंकि ओ पूरी तरह से आश्वस्त थे इन धमाको मे उनका कोई हताहत नही हुआ है । कुछ लोग दर्जनों टीवी चैनल के लाइव शो का इस निराकार भाव से देख रहे थे मानो आई पी एल के मैच देख रहे हो । यानि हमारा सरोकार का दायरा इतना सिमट चुका है कि हम हर हादसे मे पहले अपने परिवार को खोजते है सब कुछ ठीक ठाक होने पर निश्चिंत हो जाते है कि दुनिया जाई भाड़ में हमे क्या पड़ी । धमाके के बाद हालत jase ही सामान्य होती है मीडिया के लिए यह भी एक बड़ी ख़बर बन जाती है कि लोगों ने आतंक को हरा दिया है , आतंकवादियों के मनसूबे को पस्त कर दिया है । लोगों का हजूम पहले कि तरह बाजारों में दाखिल होता मानो कल कुछ हुआ ही न हो । ...

आओ सरकार सरकार खेलें

सरकार- सरकार के खेल में हर कोई मशगूल है । सत्ता में बैठी कांग्रेस vipaksh में बैठी भाजपा ,सरकार को समर्थन दे रहे वाम दल हर कोई इस खेल में अपनी बाजी जीतने की पूरी जदोजहद कर रहे हैं । महगाई के मुद्दे पर वाम दल कांग्रेस के आमने सामने खड़े हैं। परमाणु मुद्दे पर उन्हें कांग्रेस से सख्त विरोध है। यानि कांग्रेस के साथ सत्ता का सुख भोगती वाम पार्टियाँ vipaksh की भी भूमिका में अपने को बरक़रार रखना चाहती हैं । पिछले कुछ दिनों से महगाई के नाम पर वाम दल संसद को चलने नहीं दे रहें हैं । सरकार से समर्थन वापस लेने के मुदे पर उनका टका सा जवाब होता है सरकार का समर्थन भी देते रहेंगे और आलोचना भी करेंगे। बीएसपी की अलग कहानी है । कोंग्रेस की ओर से मायावती जी को जब कभी भी तीखी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ती है, मायावती सरकार से सीधे समर्थन वापस लेने के मुद्दे पर विचार करने लगती है । जहाजरानी मंत्री टी आर बालू को लेकर संसद मे मचा घमासान संसद के अन्दर और बाहर हंगामा मचा रखा है ,लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नही है । साफ है , इसका निर्णय करूणानिधि को लेना है । प्रधानमंत्री डी एम् के जैसे मजबूत घटक को नाराज नहीं कर सकते...

चीनी ओल्य्म्पिक

एक दुनिया ,एक सपना के नारे के साथ ओलंपिक २००८ का बिगुल बज चुका है । यह ओलंपिक इसलिए भी खास है की यह चीन में हो रहा है और तिब्बत के लोगों ने ठीक इसी समय अपने मुद्दे को दुनिया के सामने असर दार तरीके से रखने की कोशिश की है । लेकिन यह चीन है जिसने अपनी चतुराई और रणनीति से हर को स्तब्ध किया है । तिब्बत के मामले को लेकर वहाँ के मानवाधिकार के मुद्दे को लेकर अमेरिका के दोनों सदनों मे जोरदार हंगामा हुआ ओलंपिक खेलों को बायकाट करने की बात भी हुई लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश ने यह कहकर सारे विरोध की हवा निकल दी, की वे ओलंपिक समारोह मे हिस्सा लेने बीजिंग पहुंचेंगे । कहते हैं की अमेरिका को आर्थिक मंदी से उबारने के लिए चीन ने काफी मदद की है । भारत मे तिब्बती शरणार्थियों का धरना प्रदर्शन जारी है लेकिन पुरा तंत्र ओलंपिक मशाल की सुरक्षा मे हर विरोध को दबाने मे कोई कसर नही छोडी । यहाँ तक की ओल्य्म्पिक के भारत प्रमुख सुरेश कलमाडी तिब्बत को कश्मीर से जोड़ कर प्रबुद्ध लोगों को चुप कराने की कोशिश की । उन्होंने कहा की जो लोग तिब्बत मे मानवाधिकार के मुद्दे पर आज चीन में ओलंपिक का विरोध कर र...

किसका अर्जुन

महाभारत के अर्जुन को लेकर एकबार पाण्डवों मे यह संशय बढ़ा था की यह किसका अर्जुन है । लेकिन अपने कोंग्रेस के अर्जुन को लेकर कोंग्रेस जानो मे यह संशय हमेशा बना रहा की यह किसका अर्जुन है । पिछले दिनों यह कयास लगाया जा जहा था कि इस बार अर्जुन सिंह कि विदाई निश्चित है । अपने अर्जुन सिंह ठहरे पुराने कोंग्रेसी घाघ । सो अर्जुन सिंह ने शिगूफा छोड़ा अगले प्रधान मंत्री के रूप मे राहुल गाँधी को पेश किया जाय । आगामी चुनावी वैतरणी से पार उतरने के लिए बेचारा प्रधान मंत्री पुरी जोर आजमाइश कर रहे हैं , लेकिन अर्जुन सिंह ने राहुल गाँधी का नाम उछाल कर उनके खिलाफ उठ रही आवाज को बंद कर दिया है । कहा जा रहा था कि अर्जुन सिंह को किसी प्रान्त का राज्यपाल बनाया जाएगा लेकिन सियासत का यह मजा हुआ खिलाड़ी अपने विरोधियों को हर समय मात देते नजर आए । २००६ मे यह चर्चा जोर पकड़ने लगी थी कि अर्जुन सिंह को अब राज्य सभा कि टिकट नही मिलेगी अर्जुन सिंह ने अपने विरोधियों को चुप करने के लिए अलीगढ़ muslim विश्वविद्यालय का मामला सामने लाकर अपने को कोंग्रेस मे सबसे बड़ा सेकुलर नेता के रूप मे पेश किया । ये अलग बात थी कि अलाहाबाद ...

आरक्षण का मतलब क्या ?

आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से न तो मेरे गांव का सियाराम मिश्रा खुश हैं न ही फोचु पासवान । सियाराम मिसिर कई पुश्तों से महराजी का काम करते हैं । आज भी गांव के लोग भोज के दौरान उनके बाबा को खास तौर से याद करते हैं । उनके बनाई हुई सब्जी की चर्चा आज भी लोग करते हैं । सियाराम मिसिर का खानदान अर्थ और धर्म से विशुद्ध ब्राह्मण है। खेती बादी है नही इसलिए उपार्जन कभी मसला नही बना । मांग चांग कर गुजरा करना इन्होने परम्परा से पाई है सो मिसिर जी के खानदान का गुजारा चलता रहा । लेकिन पिछले एक अरसे से इन्हे अब शहरों की खाक छाननी पड़ी है । जाहिर है सियाराम मिसिर को यहाँ भी वही काम मिला जिसकी प्रसिधी उन्होंने गांव मे पाई थी । कलकत्ता मे २० साल गुजारने के बाद सियाराम मिसिर गांव लौटे तो ठगे से रह गए की उनके बेटे भी वही महराजी का काम कर रहे थे । उनकी दिली तमन्ना थी उनके बच्चे पढे और इज्जत की रोटी खाय लेकिन ऐसा हो न सका । गरीबी की दलदल मे फसा ऐसे सैकडो सियाराम मिसिर का खानदान जिल्लत की जिन्दगी जी रहा है लेकिन इस देश का विधान इस देश की संसद उसे सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर अगडा मान रही है । फोचु पास...

प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी

पॉलिटिक्स यानि प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी ,यह वाक्य दोहराते हुए आपको भले अटपटा लगे लेकिन बाजारवाद के इस दौर मे आप भी देर सवेर इस सच को स्वीकार जरूर करेंगे। मैं नहीं कहता हूँ कि आप मेरी बात से इतिफाक रखिए लेकिन जरा कुछ चेहरे पर गौर कीजिये ,अभिषेक मनु सिंघवी , सत्यव्रत चतुर्वेदी , आनंद शर्मा , कपिल शीबल , अरुण जेटली , जक्वेद्कर , बलवीर पुंज , प्रेम गुप्ता , अमर सिंह , सतिस चंद्र मिश्रा ऐसे दर्जनों चेहरे आपको प्राइम टाइम के टेलीविजन शो मे करीब करीब हर दिन दिख जायेंगे । भारत के ७० करोड़ मतदाता को शायद ही इनसे कभी भेंट हो (हराने जितने कि बात आप छोड़ दीजिये ) अपनी पार्टी के यही लोग चेहरे हैं । आप कह सकते है कि अपनी अपनी कम्पनी के ये मार्केटिंग मेनेजर हैं। कांग्रेस देश के सबसे बड़ी जनतांत्रिक पार्टी है ये बात अलग है कि मैडम सोनिया गाँधी के अलावे इस पार्टी मे कोई दूसरा अध्यक्ष नही हो सकता । कांग्रेस पार्टी मे सोनिया जी सबसे ज्यादे दिनों तक प्रेसिडेंट रहने का गौरव हासिल किया है । राहुल बाबा ने कब क्या कहा यह याद रखना हर पार्टी pravakta के लिए जरूरी होता है । कोंग्रेस के एक pravakta सकिल साहब को राह...