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क्या आप पत्रकार हैं ,मैं तो नहीं हूँ

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न्यूज़ २४ के एक तथाकथित संपादक पिछले दिनों अपने एक ब्लॉग पोस्ट पर अख़बारों के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त कर रहे थे । संपादक महोदय ने दर्जनों अख़बारों को खंगाला ,पन्ना पलटा लेकिन उन्हें किसी पेज में संपादक का नाम नहीं दिखा । अख़बारों के प्रिंट लाइन से संपादक का नाम गायब हो जाना वे एक खतरनाक संकेत मानते है । मुझे नहीं मालूम कि बैग फ़िल्म के इस वरिष्ट संपादक का अख़बार से क्या सरोकार रहा है या यूँ कहे कि मीडिया से किस प्रकार का नाता रहा है क्योंकि न्यूज़ २४ की समाचार प्रस्तुति में ऐसा कभी कुछ नही दिखा जिस पर गर्व किया जाय और मेरे जैसे लोग कुछ सीख सके । प्रिंट मीडिया को नशिहत देने से पहले इन तथाकथित संपादको से यह निवेदन होगा कि वे अपने गिरेवान झांके तो उन्हें शायद यह एहसास होगा कि इसके लिए जिम्मेदार इलेक्ट्रानिक्स मीडिया ही है । अखबार पहले संपादक के नाम से जाना जाता था । मुझे याद है कि टाईम्स ऑफ़ इंडिया को गिरिलाल जैन के नाम से नहीं जानते थे बल्कि दिलीप पदगोंकर के नाम से जानते थे । एशियन एज को आज तक मै एम् जे अकबर के नाम से ही जानता हूँ । ये अलग बात है कि कुछ वर्ष पहले तक दिलीप पदगोंकर ज...

चुनावी मुद्दे इस बार आएंगे पाकिस्तान से ...

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संसद का मोजुदा सत्र कई मामले मे अहम् और खास है । अहम् इसलिए कि मौजूदा लोक सभा का यह आखिरी सत्र है, अगर १३ वी लोक सभा की परम्परा कायम रही तो हो सकता है सौ दो सो सांसद दोबारा संसद न पहुच पाए । चुनाव सर पर है तो जाहिर है संसद में चुनावी मुद्दे भी गढे जायेंगे । लालू जी का अंतरिम रेल बजट ने कमोवेश यह इशारा दे दिया है कि अंतरिम बजट का आकर्षण चुनाव ही होगा । लेकिन इस चुनावी गहमागहमी के बीच बार बार पाकिस्तान की चर्चा और सरकार की ओर से लगातार बयान से यह साफ़ हो गया है कि कांग्रेस को चुनाव में जाने से पहले पाकिस्तान से कोई ठोस अस्वासन चाहिए । सो कांग्रेस के लीडर संसद में गद गद थे कि पाकिस्तान आख़िर कार अपने नकारने वाले अंदाज से अलग हटकर यह कबूल तो लिया कि मुंबई हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और हमलावर पाकिस्तानी थे । संसद के सत्र की पहली बैठक के दिन ही पाकिस्तान ने यह खुलासा कर के भारत सरकार को बता दिया कि वह भारत सरकार की चिंता को समझता है । हलाकि उसने सरकार के सामने ३० सवाल रखकर यह भी बता दिया है की सरकार चलाने और पार्टी को बचाने की चिंता सिर्फ़ कांग्रेस को ही नही होनी चाहिए पी पी ...

इंडिया के लिए आई पी एल और भारत के लिए नक्सल

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आर्थिक मंदी से गुजर रही दुनिया के लिए यह ख़बर चौकाने वाली हो सकती है कि इंडिया में खिलाड़ियों पर लगने वाली बोली ने अबतक के तमाम रिकॉर्ड को तोड़ दिया है । आई पी एल- २ के लिए होने वाली मैच के लिए इंग्लैंड के फ्लिंतोफ्फ़ को लगभग ८ करोड़ रूपये मिले है जबकि दुसरे क्लब ने पिएतेरसेन के लिए भी ८ करोड़ की बोली लगायी है । आप अंदाजा लगा सकते है कि आई पी एल में शामिल ८ क्लब में लगभग २०० खिलाड़ी है और उनपर हमारे धनकुबेरों ने अरबो रूपये वर्षाये हैं । भारत में आर्थिक मंदी का साया पड़ने लगा है । सिर्फ़ इस आशंका के बिना पर लाखों लोगों की छटनी हो चुकी है ,लाखों लोगों के सर पर तलवार लटकी हुई है और उनकी नौकरी कभी भी जा सकती है । बाजार में रूपये गायब हो जाने की ख़बर ने सरकार को इस कदर चिंतित कर रखा है कि सरकार ब्याज दर लगातार कम करने के साथ साथ कई बेलोउट पैकेज लाने की तयारी में है । सरकारी बाबू से लेकर अफसरों को पे कमीशन के नाम पर लाखों करोडो के अरिएर का भुगतान हो रहा है ताकि बाज़ार संभले । लेकिन बाज़ार रूठा हुआ है । लेकिन यह बात समझ से पड़े है कि क्रिकेट के लिए कौन सा बाज़ार है जहाँ लीकुइदिटी की कोई समस्या नही ...

सावधान : आजमगढ़ एक्सप्रेस दिल्ली पहुँच चुकी है ....

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लोक सभा चुनाव के एन मौके पर आजमगढ़ एक्सप्रेस ने दिल्ली पहुँच कर आने वाले चुनाव की तस्वीर साफ़ कर दी है । बाटला हाउस मुठभेड़ के मामले को उलेमा काउंसिल ने मुद्दा बनाकर तमाम सेकुलर सियासी पार्टियों को यह भी संदेश दे दिया है कि muslim वोट पाने के लिए एकबार फ़िर राजनेताओं को मौलानाओं के शरण में ही जाना होगा । आजमगढ़ से चली इस स्पेशल ट्रेन पर उलेमा काउंसिल ने १३ लाख रूपये खर्च करके और हजारों नौजवानों को अपने साथ में लेकर अपनी राजनितिक हैसित भी बता दिया है । याद हो कि कुछ महीने पहले जामा मस्जिद के इमाम बुखारी ने युनितेड डेमोक्रेटिक फ्रंट बनाकर सेकुलर सियासत में अपनी दखल बढ़ाने की कोशिश की थी । लेकिन अवाम ने उनकी हैसियत बता दी थी । एकबार यही कोशिश उलेमा काउंसिल की तरफ़ से हो रही है । लेकिन अफ्शोशनाक पहलु ये है कि उलेमा काउंसिल ने मुद्दा बाटला हाउस एनकाउंटर का बनाया है । सबसे बड़ी सेकुलर पार्टी का दाबा करने वाली कांग्रेस के सामने मुश्किल यह है कि एक ओर सरकार ने बाटला हाउस एनकाउंटर के हीरो मोहनचंद शर्मा को मरणोपरांत अशोक चक्र उपाधि से नवाजा है ,लेकिन उसी सरकार के आला मंत्री बाटला हाउस मामले को ले...

यहाँ हर पार्टी में है ओबामा और जूनियर ओबामा

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अमेरिका के नए राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा १९६१ के जिस दौर में पैदा लिए थे उस समय अमेरिका में अफ्रीकन -अमेरिकन को वोट देने का अधिकार नहीं था । १९६४ में पहलीबार नागरिक कानून के तहत अमेरिका में तमाम लोगों वोट का अधिकार दिया गया । यहाँ तक कि ७० के दशक तक गोरे और काले के वैवाहिक संबंधों को कानूनी मान्यता नही मिली थी । लेकिन महज ३०-३५ वर्षों में ऐसा क्या चमत्कार हुआ कि एक अफ्रीकन -अमेरिकन बराक ओबामा अमेरिका का सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता बनकर व्हाइट हाउस पहुँच गए । दुनिया के लोग इसे ओबामा का चमत्कार मान रहे हैं , राजनितिक पंडित इसे अमेरिका के हालत से जोड़ रहे हैं । लेकिन ओबामा के शपत ग्रहण समारोह में ४० लाख से ज्यादा लोगों की उमड़ी भीड़ ने दुनिया को बता दिया की ओबामा आम अमेरिकी के नेता है और वो लोगों के उम्मीदों के प्रतिनिधित्वा करते है । ओबामा ने लोगो को भरोसा दिया" वी कैन "और लोगों ने इसे साबित करने के लिए उन्हें मौका दिया । बराक ओबामा के इस चमत्कार को आजमाने की कबायद भारत में भी तेज हुई और हर पार्टी से एक ओबामा को सामने लाया जा रहा है । हमारे सियासी लीडरों में पहले तथाकथित दलि...

प्रधानमंत्री बनने के लिए पप्पुओं में जंग

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मुंबई हमले को लोग अबतक भूल गए होते । लेकिन इस देश का मीडिया उसे भूलने नहीं देता। ४० दिनों तक पाकिस्तान ने हमारे नेताओं को थकाया कि अजमल आमिर कसाब का पाकिस्तान से कोई सरोकार नहीं है । अब कह रहा है कि भारत की कमजोर सूचना के आधार पर नॉन स्टेट ऐक्टर को ढूंढा जा रहा है । पाकिस्तान के बयान से खुश हमारे विदेश मंत्री ने कहा कि अगर पाकिस्तान उनपर करवाई अपनी अदालत में भी करता है तो हमें कोई एतराज नहीं है । ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिल्बंद ने ठीक एक दिन पहले भारत आकर हमें बता गए थे कि पाकिस्तान की अदालत में भारत को न्याय मिल सकता है । और वहां की न्यायपालिका के बारे में ढेर जानकारियां बाट गए थे। हो सकता हो की राहुल के साथ अमेठी जाने की हड़बड़ी में वे डेनिअल पर्ल और पाकिस्तान के साबिक चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी के वाकये को वो भूल गए हों । लेकिन मुंबई हमले और कश्मीर मसले को जोड़कर उन्होंने हमारे नेताओं को यह संदेश दे दिया कि अगर पाकिस्तान के मामले में भारत अमेरिका और इंग्लॅण्ड का सहयोग चाहता है तो उसे कश्मीर के मामले में उसकी दखल को माननी होगी । यानि कुलमिलाकर देखें तो मम्मी की बदौलत पाकिस्...

कौन है इस देश का दुश्मन :जेहादी या हमारे नेता ....

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जरा इन तस्वीरों पर गौर कीजिये कमोवेश यही सूरत हमारे सुरक्षाबलों की है जो अपने मारे गए साथी को लेकर खून के आंसू बहाता है लेकिन वो कुछ कर नही सकता है । पूँछ के सरहदी इलाके में सेना के हालिया मुठभेड़ में सुरक्षा वलों के तीन जवान मारे गए । लगातार ९ दिनों तक चले ओपरेशन के बाद सेना ने यह कहते हुए करवाई बंद कर दी कि सभी आतंकवादी सरहद्पार जाने में कामयाब हो गए हैं । हलाकि दबी जुबान से यह भी बताया जा रहा है कि आतंकवादियों को सरहद पार भाग जाने के लिए सेफ पासेज दिया गया था , बताया जाता है कि आतंकवादियों ने कई लोगों को बंधक बना लिया था .हो सकता है कि उसमे कुछ सेना के भी जवान हों।हमें इस बात से तनिक भी शर्म नही होने चाहिए क्योंकि १९९५ में चरारे शरीफ में घुस आए अफगानी दहशतगर्द मस्त्गुल और उसके दर्जनों साथियों को हमने सेफ पासेज दिया था । इसी श्रीनगर के हजरत वाल के मशहूर दरगाह में घुसे आतंकवादियों को एक महीने तक बिरयानी और कबाब खिलने के बाद हमने सेफ पासेज दे दिया था । पाकिस्तान के आतंकवादी शिविरों पर हमला करने की यही है हमारी राजनितिक इच्छाशक्ति । पुँछ के इसी इलाके में २००३ में सेना ने ओपरेशन सर...