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सी एम अखिलेश की मन की बात

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देश के सबसे कम उम्र और   सबसे बड़े  प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव को इस बात का मलाल है कि उनके ही प्रदेश के गांवों में रहने वाले लोग उन्हें   नहीं पहचानते। युवा मुख्यमंत्री   अखिलेश ने कहा, "गांव के लोग तो मुझे पहचानते तक नहीं हैं।" मुख्यमंत्री कहते हैं कि कई मौके पर उन्हें इस कड़वी हक़ीक़त का सामना करना पड़ा है। आखिर इस रहस्योद्घाटन के पीछे सी एम का चिंतन   क्या है यह समझने की जरुरत है।  १. क्या गाँव के लोग इतने भोले हैं कि वे अपने सी एम तक  नहीं पहचानते ? २. क्या सी एम अखिलेश अपना दर्द  बताना चाहते हैं कि वो जिनके लिए इतना कर रहे है वे उन्हें जानते तक नहीं ? ३. या फिर सी एम अखिलेश यह बताना चाह रहे हैं कि समाजवादी सरकार का असली मुखिया मुलायम सिंह यादव है. वे सिर्फ नेताजी के आदेश पालक हैं।  राज्य के विपक्षी पार्टिया जब सी एम अखिलेश पर यह तंज करती है कि उत्तर प्रदेश में साढ़े चार मुख्यमंत्री है तो अखिलेश के हिस्से में आधा ही आता है। ।क्या इस स्थिति के लिए स्वयं नेताजी ,प्रो रामगोपाल ,शिवपाल यादव और आज़म ख...

कश्मीर पर यह बकवास बंद कीजिये

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अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई के बाद मचे सियासी घमासान ने यह साफ़ कर दिया है कि कश्मीर मामले में राजनेताओ के नज़रिये  में कोई   बदलाव नहीं आया है। मसले कश्मीर को लेकर लगातार नाकामी झेल चुकी कांग्रेस हर उस पहल का विरोध करेगी ,जिसे करने का साहस इस पार्टी की सरकार ने पहले नहीं दिखाया।  जाहिर है यह चुनौती बीजेपी सरकार और मोदी के लिए बड़ी है। मोदी सरकार को  आलोचना से ऊपर उठकर देश हित में फैसला लेने का जज़्बा दिखाना होगा । मसरत आलम २०१० में सबसे खतरनाक अलगाववादी लीडर के रूप में उभर कर सामने आया ,यह वह दौर था जब कश्मीर में अलगाववाद हासिये पर चला गया था। यह वह दौर था जब एक दो दशक के बाद  वादी में देशी विदेशी पर्यटकों का आंकड़ा १० लाख को पार कर गया था। अमन की नयी फ़िज़ा में कारोबार बुलंदियों पर था लेकिन मसरत आलम के हुड़दंगियों   ने सबकुछ बिगाड़ दिया था। यह वादी की अनोखी सियासत थी  कि ओमर अब्दुल्लाह की सरवराही वाली सरकार पर ११७ नौजवानो के क़त्ल का अंजाम लगा और वादी में एकबार फिर ""हम क्या चाहते आज़ादी और जिले ज...

लोग पूछते है क्या वाजपेयी दोबारा नहीं आयेंगे ?

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हानि लाभ के पलडो में ,तुलता जीवन व्यापर हो गया .! मोल लगा विकने वालों का ,बिना बिका बेकार हो गया ! मुझे हाट में छोड़ अकेला ,एक एक कर मीत चला जीवन बीत चला .... एक दार्शनिक -राजनीतिग्य  अटल बिहारी वाजपेयी जीवन के ९०  वे वसंत पूरा कर इन दिनों जिंदगी के अखिड़ी पड़ाव पर  खड़े हैं ।राजनीती के अखाड़े  में अपनी प्रखर बौधिक क्षमता की बदौलत अटल जी 50 साल तक निरंतर अजेय रहे। अपने सिधान्तो  लेकर  वे हमेशा अटल रहे   .गैर कांग्रेसी सरकार के वे पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने 6 साल देश के शासन की जिम्मेदारी संभाली और देश के आर्थिक प्रगति खासकर संचार और सड़क निर्माण  देश को जोड़ने में अटल जी का योगदान मील का पत्थर साबित हुआ  है .संवाद और संपर्क अटल जी के विकास दर्शन में शामिल थे और यही दर्शन उनके  शासन काल में आदर्श बना यही वजह...

राजनाथ जी कश्मीर को यू पी के चश्मे से मत देखिये

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का कश्मीर में यह बयान  कि  मोदी सरकार  वाजपेयी के "इन्शानियत के  दर्शन " को  कश्मीर  मामले में आदर्श  मानती है। कानून के दायरे में सबको लाने की अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए जेटली ने १० जवानो के खिलाफ कार्रवाई को अहम फैसला बताया। लेकिन जेटली के कश्मीर दौरे के ठीक दो दिन बाद हुए फिदायीन  हमले में २१ की मौत ने कश्मीर को दुबारा ९० दशक के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इसे महज एक इत्तिफ़ाक़ नहीं कहा जा सकता है कि दो दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी कश्मीर दौरे पर है और श्रीनगर के उसी ग्राउंड  से  कश्मीर को सम्बोधित करने वाले है जहाँ १२ साल पहले अटल जी ने  महजूर के एक ग़ज़ल सुनाकर कश्मीर में एक नयी फ़िज़ा का आगाज़ किया था। यानि वाजपेयी ने आतंकवाद से लहूलहान कश्मीर में ""बहारे फिर से आएगी का भरोसा पुख्ता किया। क्या पी एम मोदी हीलिंग टच के उसी पुराने फॉर्मूले को आजमाएंगे या लीक से हटकर कश्मीरियों का भरोसा जीतकर पाकिस्तान के मनसूबे पर पानी फेरेंगे. ?  पिछले ...

मनरेगा के बाद आदर्श गाँव.....

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प्रिय मोदी जी , मुझे याद है गाँव के भोर का वह राग . मवेशियों के गले मे बंधी घंटियों की आवाज़  ,किसानो की चहल पहल ... दूर से आती ढेकी की आवाज ... उखल समाठ की आवाज,मस्जिद से उठती अज़ान की आवाज़ ,मंदिरो से आती हर हर महादेव की आवाज़ ,बजती घंटिया  .. सुबह की ये सारी आवाजे मिलकर एक मेलोडी बना रही थी. कह सकते है कि  गाँव की यह सास्वत पहचान थी . तमाम असुविधाओं के बावजूद पिछले सैकड़ो वर्षो में गाँव  न तो अपना लय खोया न ही अपनी पहचान लेकिन मॉडल विलेज के ज़माने में आज  गाँव कही खो गया है। प्रधानमंत्री  जी  आज जिस आदर्श ग्राम की बातआप  कह रहे हैं वह देश के नक्से से गायव है सामाजिक सरोकार का  विहंगम दृश्य मुल्क  के हर गाँव मे मौजूद था . जहाँ हर आदमी हर की जरूरत में शामिल था . अपने इसी गाँव को तलाशने मै काफी अरसे के बाद गाँव पंहुचा था .अल सुबह एक बार फिर  मै  तैयार बैठा था  अपने बचपन के मेलोडी को सुनने लेकिन न तो किसानो के कदम ताल  की आवाज सुनाई दी न ही कही से मवेशियों की ...
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"कश्मीर में लालच की बाढ़ " कहा जाता है कि पिछले साठ वर्षों में ऐसी बाढ़ कश्मीर में नहीं आई थी। जम्मू कश्मीर से दूर बैठे टीवी देख रहे  लोगों को यह यकीन नहीं  हो रहा था कि बाढ़ का  यह दृश्य जम्मू कश्मीर का है या फिर बिहार का। सरकारी आंकड़े १६० लोगों की मौत और १५०० सौ से ज्यादा गाँव प्रभावित होने की पुष्टि करता है जबकि बतया जाता है कि वादी में ३९० गाँव पूरी तरह से जलमग्न है। राजधानी श्रीनगर में घरों के दरवाजे पर दस्तक देकर पानी ने  प्रलय का संकेत दे दिया है। बिहार में बाढ़ की विभिषिका केंद्र और राज्यफ्लड  सरकारों के ढुल मूल रवैये से पैदा हुई है जबकि कश्मीर में यह जल प्रलय लोगों की लालच और भ्रष्ट तंत्र के बीच अनैतिक संबंधों को रेखांकित करता है।   गृहमंत्री के बाद प्रधान मंत्री का जम्मू -कश्मीर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा केंद्र सरकार की जिम्मेदारी का एहसास जरूर करता है। लेकिन बाढ़ की इस विभीषिका के बीच देश के लाखों कर दाताओं को केंद्र से यह सवाल पूछने का हक़ जरूर बनता है कि पिछले वर्षों में वूलर और डल लेक से एन्क्रोअचमेंट हटाने और उ...

पाकिस्तान को भी है मोदी से उम्मीदें

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नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशो के राष्ट्राध्यक्षों के शामिल होने को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। पाकिस्तान को अबतक जी भर कोसने वाले मोदी जी को आख़िरकार अपने शपथग्रहण समारोह में पाकिस्तान की याद क्यों आई ?क्यों सार्क फोरम नरेंद्र मोदी के लिए इतना महत्वपूर्ण हो गया जो पिछले दस साल से उपेक्षित था। क्या भारत सहित दुनिया के दुसरे देशों में अपनी छवि बदलने के लिए मोदी ने सार्क को एक प्लेटफॉर्म बनाया है ? सवाल कई हैं लेकिन जवाब कम। लेकिन पाकिस्तान के वज़ीरे आज़म नवाज़ शरीफ के भारत आने की चर्चा ने एक नई सियासी पहल का संकेत दिया है।  पिछले २५    वर्षों से पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अघोषित    हमला बोल रखा है इन वर्षों में हमारे   ९०    हज़ार से ज्यादा लोगों की जान गयी है .  इस छदम युद्ध में हमारे २०    हजार से ज्यादा जवान मारे गए है .लेकिन हरबार हमने अब और नहीं ,कह कर सिर्फ दूसरे हमले का ही इन्तजार किया है .कल तक  कांग्रेस को कारवाई करने के लिए उकसा रही बीजेपी आज खुद अमन बहाली के लिए "वाजपेयी फार्मूला"ढ...