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कानिमोझी के बाद कौन ?

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२जी स्पेक्ट्रोम  मामले में करुनाधि की बेटी कानिमोझी की गिरफ़्तारी ने मौजूदा भ्रष्ट व्यवस्था के ताबूत में एक और कील ठोक दी है .१ लाख ७६ हजार करोड़ रूपये के टू जी घोटाले को लेकर बहस का दौर अभी जारी है .इस बहस में पिछले वर्षो में हुए लाखों करोडो रु के दुसरे घोटाले की चर्चा का स्वर अभी धीमा है .दर्जनों  घोटाले और भ्रष्ट घोटालेवाजो की सुनवाई उची अदालतों में हो रही है .कई महा घोटालो की सुनवाई खुद सुप्रीम कोर्ट कर रहा  है जाहिर है पूर्व केंद्रीय मंत्री डी राजा और डी एम् के सांसद कानीमोझी सहित कई आला अधिकारी नप गए  है . सवाल यह है एक क्षेत्रीय पार्टी डी एम् के का आज राजनितिक अस्तित्व संकट में है लेकिन इन तमाम घोटाले में बराबर का हिस्सेदार रही कांग्रेस एक के बाद एक जीत का जश्न मनाने में व्यस्त है .सुरेश कलमाड़ी को छोड़कर अन्य किसी बड़ी मछली पर अभी हाथ डालने की हिम्मत सरकारी एजेंसी नहीं दिखा रही है . बीस साल पहले महज ९०० करोड़ के चारा घोटाले के कारण लालू यादव को जेल की हवा खानी पड़ी थी .लालू जी ने इसे ...

क्या उखाड़ लेंगे अन्ना

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हाथ में दो केला और एक सेव थामे मै कुछ देर निर्विकार भाव से ठेले वाले को निहारता रहा ..मुझे लगा उसने अभी अभी जो कीमत बताई है वह शायद उसका फम्बल था  .मैंने उसे  रिटेक देने के आग्रह के साथ दुबारा कीमत बताने को कहा .उसने लगभग खीजते हुए कहा "यहाँ रिटेक नहीं चलता आपने सही सुना है " यानि पुरे ४५ रुपया ठेले वाले   को  भुगतान  करके मै यह गीत गुनगुनाता वापस ऑफिस की ओर चला "मोरे सैया तो खुबे कमात है ,महगाई डायन खाई जात है " .फल खाने का यह आईडिया अचानक क्यों आया .इस बात पर मैं खुद अपने आपको कोस रहा था .अभी अभी तो कैंटीन वाला से लड़कर बाहर आया था .४० रुपया में थाली ,लूट है क्या ? मैंने हुंकारते हुए कहा था इतने पैसे के फल खरीद कर खा लेंगे .बुद्ध को ज्ञान प्राप्त होने में १८ साल लग गए थे लेकिन मुझे यह ज्ञान कुछ मिनटों में मिलगया .ऑफिस आकर मै यह खबर पढ़ कर तनिक भी विचलित नहीं हुआ की मुंबई में एक माँ अपने 6 साल के बेटे को लेकर ७ वी मंजिल  से छलांग लगा दी .ओड़िसा में एक माँ ने  पाच बच्चों के साथ   आत्महत्या कर ली . देश के १२ लाख करोड़ रूपये के बजट बनाने वाले वित्त...

पाकिस्तान में ब्लासफेमी का ब्लास्ट

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सस्ता खून और महगा पानी पाकिस्तान में कहाबत नहीं बल्कि जीवन की हकीकत है .पुरे मुल्क में खुनी खेल का सिलसिला जारी है .आम आदमी मारे जा रहे है तो वी आई पी भी  ..ब्लासफेमी लाव की मुखालफत के नाम पर गवर्नर सलमान तासीर की मौत हो चुकी है तो फेडरल मिनिस्टर शाहबाज भट्टी को भी मौत की नींद सुला दिया गया है .सलमान तासीर की हत्या उनके बॉडी गार्ड ने की तो शाहबाज की हत्या पाकिस्तान के तालिबान ने .यानी मुल्क में आज कुख्यात इश निंदा कानून के पैरोकार मुल्ला - मिलिट्री और दहशतगर्द तंजीमो के सामने सरकार और समाज ने घुटने टेक दिए है .हालत को इस तरह समझा जा सकता है की एक गवर्नर की मौत पर कोई दो शब्द सहानुभूति के भी नहीं आये .मुल्क के सद्र और वजीरे आजम ने सलमान की मौत पर चुपी साध ली तो मुल्लाओं ने उनके आखरी रसुमात पर किसी मौलबी को भी नमाज पढने की इज़ाज़त नहीं दी और कातिल कादरी पर फूल बरसाए गए .यही हाल कमोवेश शाहबाज भट्टी को लेकर भी था .लेकिन  एलिट क्लास के लोगों की बर्बर हलाकत और पाकिस्तान में समाज की अनदेखी कुछ अलग कहानी वया कर रही है . १९०६ में पहलीबार आल इंडिया कांग्रेस के सामने मुस्लिम जमींदारो ,र...

इस्तीफा भी दे सकते है प्रधानमंत्री ?

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आम तौर पर अपना मुहं बंद रखनेवाले प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने आखिरकार अपना मुह खोला ,कई बार जवान फिसली ,कई बार सवाल टाल गए लेकिन एलोक्ट्रोनिक मिडिया के संपादकों के साथ बातचीत मे उन्होंने यह जरूर साबित कर दिया कि वे ज्यदादिनो तक अपना मुंह बंद नही रखेंगे .आमतौर पर प्रधानमंत्री साल मे सिर्फ एकबार मीडिया से रुबरु होते है लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घिरी सरकार के मुखिया होने के कारण उन्होंने यह जरूरत समझी कि अपना पक्ष लोगों के सामने रखे.उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि वे मजबूर है ,उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया कि सरकार मे हर फैसले उनके ही मुताबिक नही होते है .उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया है कि गठबंधन की सरकार चलानी है तो मुखिया को कही न कही समझौता करना ही पड़ता है .यानि २जी स्पेक्ट्रुम मे मची लूट से वे पूरी तरह वाकिफ थे लेकिन वे राजा पर कोई कारवाई नही कर सके .उन्होंने यह भी साफ़ किया कि राजा को उन्होंने २००७ विधि सम्मत फैसले लेने को कहा था फिर भी राजा ने उन्हें अनसुना किया .खास बात यह है कि जब प्रधानमंत्री राजा के बारे मे सबकुछ जानते थे फिर उन्हें यु पी ऐ -२ के सरकार गठन के मौके पर दुबारा वही मंत्...

तहरीर चौक के बाद अब कौन चौक .......

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"अब मिस्र आज़ाद है " तहरीर चौक पर अपार जनसमुदाय का यह नारा पूरी दुनिया मे व्यवस्था परिवर्तन की लो को एक उम्मीद से भर दिया है इजिप्ट के .तहरीर चौक से उठी यह क्रांति की चिंगारी अरब वर्ल्ड के साथ साथ एशिया के देशो मे जल्द ही फैलने वाली है .अरब देशो मे सत्ता शीर्ष पर कब्ज़ा जमाये हुए सत्ताधीशों की बेचैनी बढ़ने लगी है .टूनिसिया मे एक मजदूर की मौत क्रांति का आगाज कर सकती है और वर्षो से सत्ता पर काबिज निरंकुश शासक को मुल्क छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है .मिस्र मे फेसबुक पर एक लड़की का यह मेसेज "मै तहरीक चौक जा रही हूँ" .........एक नयी क्रांति की नीव डालती है और महज १८ दिन  के आन्दोलन ३० साल के हुस्नी मुबारक की सत्ता को उखाड़ फेकता है .तो क्या ऐसी क्रांति आज भारत मे संभव है ?क्या भारत मे व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा कभी क्रांति का रूप धारण कर सकता है ? व्यवस्था के खिलाफ रोष और क्षोभ न्यायपालिका को है ,मिडिया को है ,लोगों को है ,बुधिजिबियों को है लेकिन क्रांति को लेकर उत्साह कही नही है .सुप्रीम कोर्ट के जज की  शिकायत है कि सरकार न्यायपालिका को अधिकार संपन्न नही देखना चाहती ....

सच का सामना करने के लिए क्यों नही तैयार है कश्मीरी ?

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सच का सामना करने के लिए इस बार हुर्रियत कान्फेरेंस के साबिक चेयरमेन अब्दुल गनी बट सामने आये .मौका था जे के एल ऍफ़ के सेमिनार का .मौका था भारत के खिलाफ जहर उगलने का लेकिन प्रो बट का खुलासा सबको चौका दिया ,उन्होंने कहा" मारे गए हमारे हुर्रियत के लीडर वाकई मे शहीद है या फिर हमारी अंतर्विरोध के साजिश के शिकार " .हुर्रियत कान्फेरेंस के चेयरमेन ओमर फारूक और बिलाल गनी लोन की मौजदगी मे प्रो बट ने यह सवाल उठाया कि इनके पिता की हत्या किसने की थी ?उन्होंने जोर देकर कहा कि झूठ बोलने की आदत छोड़कर हम यह सच बताये कि मौलवी फारूक ,गनी लोन और प्रो अहद जैसे लीडरो की हत्या हम मे से कोई की थी इनकी हत्या किसी सुरक्षा वालों ने नही की थी .हुर्रियत लीडरो की हत्या की एक लम्बी फेहरिस्त है मौलवी मुश्ताक ,पीर हिसमुदीन ,शेख अजीज़ रफीक शाह ,माजिद डार इनकी हत्या के बारे मे यही बताया गया कि अज्ञात बन्दुक धारियों ने इनकी हत्या की थी लेकिन किसी हत्या की जांच की हिम्मत स्थानीय पुलिस नही दिखा सकी .तो क्या प्रो बट के हालिया खुलासे के बाद इन हत्यायों का राज ढूंढने के लिए किसी हुर्रियत लीडर से पूछ ताछ करेगी ?शायद ...

बिहारी तो सुधर गए आप कब सुधरोगे

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   प्रख्यात अर्थशास्त्री श्री जगदीश भगवती ने पिछले दिनों   संसद भवन के सेंट्रल हाल मे सांसदों को संवोधित करते हुए कहा कि उच्च विकास दर गरीबो के लिए भी फायदेमंद हो सकता है और गरीब जनता इसका इनाम भी देती  है .बिहार मे नीतीश कुमार का आम अवाम का  भारी समर्थन इसी सन्दर्भ मे देखा जा सकता है .लेकिन उच्च विकास दर का २००४ मे जब केंद्र की एन ड़ी ऐ सरकार ने इंडिया शायनिंग के नाम से नारा दिया था तो लोगों ने इसे ख़ारिज कर दिया था .लेकिन उसी एन ड़ी ऐ के बिहार शायनिंग को लोगों ने न  केवल सराहा है बल्कि राज्य के तमाम राजनैतिक समीकरण भी बदल दिए है .लम्बे अरसे के बाद यह पहलीबार बिहार मे सत्तापक्ष २४३ सीटो मे २०६ सीटों पर जीत दर्ज की है ,तो एक दर्जन से ज्यादा सत्तापक्ष के उम्मीदवार महज हजार -दो हजार मतों के अंतर से पराजित हुए है .राजनीतिक पंडितो का विश्लेषण जारी है ,लालू -रामविलास और कांग्रेस इस शर्मनाक पराजय से स्तब्ध है ,नीतीश के गुणगान मे कसीदे  पढ़े जा रहे है लेकिन इस बहस मे  बिहारी जनमानस ने मुल्क को जो रास्ता ...